इस्लामाबाद: आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की किस्मत अचानक बदलती नजर आ रही है। लगातार बढ़ते कर्ज और डूबती अर्थव्यवस्था के बीच पाकिस्तान के हाथ ऐसा खजाना लगा है, जिसने उसे रातों-रात मालामाल बना दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान की एक नदी ने करीब 80,000 करोड़ रुपये का सोना उगला है, और इस चमत्कार के पीछे भारत की भी एक बड़ी भूमिका बताई जा रही है।

कहां से निकला इतना सोना?

यह चौंकाने वाला मामला पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से जुड़ा है, जहां बहने वाली इंडस (सिंधु) नदी के किनारे भारी मात्रा में सोने के कण पाए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सोना भारत के ऊपरी इलाकों से बहकर पाकिस्तान पहुंचा है।

गौरतलब है कि भारत के हिमालयी क्षेत्रों में कई नदियां बहती हैं, जिनमें से कुछ में प्राकृतिक रूप से सोने के कण मौजूद होते हैं। भारतीय भूवैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून और ग्लेशियरों के पिघलने की वजह से यह सोना नदियों के जरिए पाकिस्तान के इलाकों में जमा हो सकता है।

कैसे हुआ खुलासा?

स्थानीय लोगों ने सबसे पहले नदी किनारे चमकते कणों को देखा और इसकी सूचना अधिकारियों को दी। जब वैज्ञानिकों और खनन विशेषज्ञों ने इस पर रिसर्च की, तो यह पुष्टि हुई कि ये कण असल में शुद्ध सोना हैं। अब पाकिस्तान सरकार इस सोने के खनन और प्रोसेसिंग की योजना बना रही है, जिससे उसकी चरमराती अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है।

भारत की वजह से आया पाकिस्तान की झोली में खजाना?

विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल प्रदेश और लद्दाख जैसे भारतीय इलाकों में बहने वाली नदियों में सोने के कण होते हैं, जो पानी के प्रवाह के साथ नीचे की ओर बहते रहते हैं। चूंकि सिंधु नदी का मुख्य स्रोत भारत में है, इसलिए यह संभव है कि पाकिस्तान में मिलने वाला सोना भी भारत के हिमालयी इलाकों से बहकर वहां पहुंचा हो।

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को मिलेगी राहत?

80,000 करोड़ रुपये के इस खजाने से पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिल सकता है। वर्तमान में पाकिस्तान पर लगभग 50 लाख करोड़ रुपये (250 अरब डॉलर) का कर्ज है, और देश में महंगाई दर 30% से ज्यादा पहुंच चुकी है। ऐसे में यह सोना उसके लिए किसी जीवनदान से कम नहीं है।

अब क्या करेगा पाकिस्तान?

सरकार जल्द ही नदी से सोने के खनन को लेकर एक बड़ी योजना बना सकती है।

खैबर पख्तूनख्वा सरकार इस क्षेत्र में माइनिंग प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी कर रही है।

पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचकर अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने की कोशिश करेगा।


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