मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई में सुधार, ब्रेंट अब भी 100 डॉलर के पार
WTI फिसला लेकिन ब्रेंट महंगा
मिडिल ईस्ट : वैश्विक तेल बाजार में सप्लाई धीरे-धीरे सुधर रही है, लेकिन कच्चे तेल और खासकर डीजल की कीमतों पर दबाव अभी भी बना हुआ है। सितंबर 2026 में ब्रेंट क्रूड एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के सितंबर आकलन में ICE ब्रेंट करीब 105 डॉलर प्रति बैरल बताया गया, जो युद्ध से पहले के स्तर से लगभग 45 प्रतिशत अधिक था। एशिया में कच्चे तेल का आयात भी सुधरा है। सितंबर में यह करीब 2.396 करोड़ बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया, जो ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि यह अभी भी युद्ध से पहले के औसत से लगभग 13 प्रतिशत कम है। मध्य पूर्व से एशिया को होने वाली सप्लाई भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
सबसे ज्यादा दबाव डीजल बाजार में दिखाई दे रहा है। अमेरिका में डीजल की थोक कीमत सितंबर की शुरुआत में 200 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई थी, जो युद्ध से पहले के मुकाबले करीब 94 प्रतिशत अधिक थी। यूरोप और एशिया में भी डीजल की कीमतें इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। अमेरिका में इसका असर सीधे पेट्रोल पंपों पर नजर आया। औसत खुदरा डीजल की कीमत सितंबर में पहली बार 6 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर पहुंच गई। वहीं यूरोप में डीजल फ्यूचर्स 2026 की शुरुआत के मुकाबले दोगुने से अधिक हो गए और रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए।
डीजल के महंगा होने की बड़ी वजह रिफाइनिंग और निर्यात में रुकावट है। खाड़ी देशों से अगस्त में डीजल और गैसोइल का शुद्ध निर्यात केवल करीब 3.90 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो युद्ध से पहले के स्तर का लगभग एक चौथाई था। रूस की रिफाइनरियों और निर्यात पर पड़े असर ने भी वैश्विक सप्लाई को और सीमित किया है।
एशियाई बाजार में भी बेंचमार्क डीजल कीमत सितंबर के मध्य में करीब 180 डॉलर प्रति बैरल रही। मार्च में यह 200 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुकी थी। यानी कच्चे तेल की सप्लाई में कुछ सुधार के बावजूद रिफाइंड ईंधन, खासकर डीजल की उपलब्धता अभी बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले दिनों में कीमतों का रुख पश्चिम एशिया में तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आवाजाही, रिफाइनरियों की स्थिति और रूस से होने वाले ईंधन निर्यात पर निर्भर करेगा। जब तक डीजल की सप्लाई पूरी तरह सामान्य नहीं होती, परिवहन और उद्योगों की लागत पर दबाव बने रहने की आशंका है।