नई दिल्ली। भारत और गुयाना के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने गुयाना के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद इरफान अली के साथ मुलाकात के दौरान 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट यानी ऋण सुविधा के विस्तार की घोषणा की है। इस वित्तीय सहयोग का उपयोग गुयाना में सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं और रक्षा क्षेत्र से संबंधित परियोजनाओं के लिए किया जाएगा। दोनों देशों ने डिजिटल तकनीक, छोटे उद्योगों और विकास परियोजनाओं से जुड़े तीन महत्वपूर्ण समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए हैं। जयशंकर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच संपर्क और सहयोग का स्तर तथा उसकी तीव्रता बदली है।विदेश मंत्री जयशंकर ने एंटीगुआ और बारबुडा में आयोजित राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्ष सम्मेलन (CHOGM) 2026 के दौरान गुयाना के राष्ट्रपति इरफान अली से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति की समीक्षा की और भविष्य में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की। विशेष रूप से व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कृषि, बुनियादी ढांचे, डिजिटल प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई।
जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रपति इरफान अली से मुलाकात सकारात्मक रही। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नवंबर 2024 की गुयाना यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उस यात्रा के दौरान हुई सहमतियों को आगे बढ़ाने और नई परियोजनाओं को गति देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।विदेश मंत्री ने बताया कि भारत गुयाना के विकास में एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। इसी उद्देश्य से 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर की ऋण सुविधा का विस्तार किया गया है। इस राशि के माध्यम से सड़क संपर्क बेहतर बनाने, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और रक्षा क्षेत्र में आवश्यक परियोजनाओं को सहायता देने की योजना है।भारत की ओर से दी जाने वाली लाइन ऑफ क्रेडिट सामान्य अनुदान से अलग एक वित्तीय व्यवस्था है। इसके तहत निर्धारित शर्तों पर विकास परियोजनाओं के लिए ऋण उपलब्ध कराया जाता है। भारत लंबे समय से विभिन्न देशों में बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों को सहयोग देने के लिए इस व्यवस्था का उपयोग करता रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, ऐसी ऋण सुविधाएं साझेदार देशों के आर्थिक विकास और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
गुयाना के लिए घोषित इस वित्तीय सहयोग से सड़क निर्माण और संपर्क सुविधाओं में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी। बेहतर सड़क नेटवर्क से व्यापारिक गतिविधियों, परिवहन और नागरिकों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है। वहीं, स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजनाएं अस्पतालों और अन्य आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं के विकास में उपयोगी साबित हो सकती हैं।दोनों देशों के बीच बैठक के दौरान तीन महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें पहला समझौता सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए विनिर्माण परियोजनाओं की आपूर्ति और स्थापना से संबंधित है। इसके माध्यम से छोटे उद्योगों को प्रोत्साहित करने तथा स्थानीय स्तर पर उत्पादन क्षमता बढ़ाने का उद्देश्य रखा गया है।दूसरा समझौता त्वरित प्रभाव वाली परियोजनाओं यानी क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स के लिए अनुदान सहायता से जुड़ा है। इस प्रकार की परियोजनाएं आमतौर पर स्थानीय समुदायों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जाती हैं। इनका उद्देश्य अपेक्षाकृत कम समय में नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाना होता है।तीसरा समझौता डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में सहयोग से संबंधित है। इसके तहत गुयाना में भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) जैसी डिजिटल भुगतान प्रणाली विकसित करने और उसके संचालन की संभावनाओं पर काम किया जाएगा। यह समझौता भारत की डिजिटल तकनीक के अंतरराष्ट्रीय विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत में यूपीआई ने डिजिटल भुगतान को सरल और सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके जरिए मोबाइल फोन से तत्काल भुगतान किया जा सकता है। यदि गुयाना में इसी प्रकार की प्रणाली प्रभावी रूप से लागू होती है, तो वहां डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिल सकता है। इससे छोटे व्यापारियों, सेवा प्रदाताओं और आम नागरिकों को लाभ मिलने की संभावना है।भारत और गुयाना के बीच संबंध केवल आर्थिक और तकनीकी सहयोग तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध भी लंबे समय से मजबूत रहे हैं। गुयाना में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी है, जिसने दोनों देशों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक संपर्क बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नवंबर 2024 की गुयाना यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक अहम पड़ाव माना जाता है। उस दौरान डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, कृषि और अन्य विकास क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी थी। हालिया समझौते उन्हीं प्रयासों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।गुयाना दक्षिण अमेरिका के उत्तरी हिस्से में स्थित एक महत्वपूर्ण देश है। पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में उसकी बढ़ती भूमिका के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसका आर्थिक महत्व बढ़ा है। भारत के लिए गुयाना के साथ सहयोग व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, निवेश और विकास साझेदारी की दृष्टि से उपयोगी हो सकता है।बैठक के दौरान ऊर्जा और कृषि सहयोग पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच कृषि तकनीक, खाद्य उत्पादन, संसाधन प्रबंधन और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं मौजूद हैं। भारत अपनी तकनीकी विशेषज्ञता और विकास संबंधी अनुभवों के माध्यम से गुयाना के साथ साझेदारी को और विस्तार दे सकता है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत गुयाना में पहले भी कई विकास परियोजनाओं को पूरा कर चुका है। अब नई ऋण सुविधा और तीन समझौतों के माध्यम से इस साझेदारी को आगे बढ़ाया जाएगा। दोनों देशों ने आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है।विदेश मंत्री जयशंकर की यह मुलाकात भारत की कैरेबियाई देशों के साथ बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता को भी दर्शाती है। भारत विकासशील देशों के साथ तकनीकी सहयोग, वित्तीय सहायता और क्षमता निर्माण के जरिए अपने संबंधों को व्यापक बनाने का प्रयास कर रहा है।कुल मिलाकर 500 मिलियन डॉलर की ऋण सुविधा और तीन नए समझौते भारत-गुयाना संबंधों को नई दिशा देने वाले महत्वपूर्ण कदम हैं। अब इन समझौतों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने, वित्तीय शर्तों को अंतिम रूप देने और निर्धारित समयसीमा में योजनाओं को लागू करने पर दोनों देशों का ध्यान रहेगा।
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