नई दिल्ली: भारत अमेरिका में बनी जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम खरीदने की योजना बना रहा है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। इस कदम से नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच रक्षा सहयोग और मजबूत हो सकता है।गोर ने 'X' पर एक पोस्ट में कहा, "बड़ी खबर! भारत युद्ध में परखी जा चुकी जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम खरीदने की योजना बना रहा है।" जैवलिन एक पोर्टेबल एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम है जिसे लॉकहीड मार्टिन और RTX ने मिलकर बख्तरबंद लक्ष्यों (आर्मर्ड टारगेट) के खिलाफ इस्तेमाल के लिए बनाया है। इस सिस्टम का इस्तेमाल अमेरिका और सहयोगी सेनाओं ने बड़े पैमाने पर किया है।
कंधे से फायर किए जाने वाले इस सिस्टम में ऑटोमैटिक गाइडेंस मैकेनिज्म होता है, जिससे मिसाइल लॉन्च के बाद अपने लक्ष्य को ट्रैक कर सकती है। इससे ऑपरेटर को कवर लेने और जवाबी हमले से बचने का मौका मिलता है। सैनिक या मरीन फायर करने के बाद अपनी जगह बदल सकते हैं या किसी दूसरे खतरे से निपटने के लिए दोबारा लोड कर सकते हैं।
यह मिसाइल 'आर्च-शेप्ड टॉप-अटैक ट्रेजेक्टरी' का इस्तेमाल करती है, यानी यह लक्ष्य के ऊपर जाकर वहां हमला करती है जहां कवच (आर्मर) कमजोर होता है। गनर कर्सर का इस्तेमाल करके लक्ष्य चुनता है, जिसके बाद कमांड लॉन्च यूनिट मिसाइल को 'लॉन्च से पहले लॉक-ऑन' का सिग्नल भेजती है।इसके 'सॉफ्ट-लॉन्च' डिज़ाइन की वजह से इस सिस्टम को इमारतों और बंकरों जैसी बंद जगहों से भी सुरक्षित रूप से फायर किया जा सकता है।
जैवलिन को अमेरिकी सेना और मरीन कॉर्प्स के लिए 'जैवलिन जॉइंट वेंचर' ने विकसित और निर्मित किया था। इस वेंचर में ऑरलैंडो, फ्लोरिडा की लॉकहीड मार्टिन और टक्सन, एरिज़ोना की रेथियॉन शामिल थीं।गोर ने कहा कि प्रस्तावित खरीद से भारत और अमेरिका के बीच संयुक्त उत्पादन (को-प्रोडक्शन) के अवसर भी पैदा हो सकते हैं, क्योंकि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग "रिकॉर्ड स्तर" पर पहुंच गया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब भारत अमेरिकी रक्षा उपकरणों की खरीद बढ़ा रहा है। नवंबर 2025 में, अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत को 100 जैवलिन सिस्टम और 216 एक्सकैलिबर गाइडेड आर्टिलरी प्रोजेक्टाइल की संभावित बिक्री (लगभग 93 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य) को मंजूरी दी थी।भारत पहले से ही अपनी M777 होवित्जर तोपों के साथ एक्सकैलिबर गोला-बारूद का इस्तेमाल कर रहा है।
अमेरिका और भारत ने पिछले साल एक बड़ी रक्षा साझेदारी के लिए फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका मकसद ज़मीन, समुद्र, हवा, अंतरिक्ष और साइबरस्पेस में आपसी तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) को मजबूत करना है। भारत ने अमेरिका में बने कई रक्षा प्लेटफॉर्म भी हासिल किए हैं, जिनमें अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टर, C-17 और C-130J ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, P-8I मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट और M777 होवित्जर तोपें शामिल हैं। गोर ने मई 2026 में शांगरी-ला डायलॉग में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की टिप्पणियों का भी ज़िक्र किया और कहा कि इस ताज़ा घटनाक्रम से अमेरिका-भारत रक्षा संबंध और मज़बूत होंगे।
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