कुशीनगर/महराजगंज। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ का भयावह असर अब उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में भी लगातार दिखाई दे रहा है। रविवार को लगातार चौथे दिन बड़ी गंडक यानी नारायणी नदी से चार और शव बरामद किए गए। कुशीनगर के छितौनी तटबंध स्थित भेड़ियारी ठोकर नंबर तीन के पास निगरानी कर रही एसडीआरएफ की टीम ने नदी से दो महिलाओं और दो पुरुषों के शव बाहर निकाले। इसके साथ कुशीनगर और महराजगंज में नदी से बरामद शवों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक कुशीनगर में अब तक 13 और महराजगंज में चार शव बरामद किए जा चुके हैं। रविवार को मिले चारों शवों की भी फिलहाल पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें मोर्चरी भेज दिया है। नेपाल में आई बाढ़ के बाद लगातार शवों और घरेलू सामान के गंडक के रास्ते भारतीय सीमा तक पहुंचने से नदी किनारे बसे गांवों में भय और बेचैनी का माहौल है।
चौथे दिन भी नदी में दिखाई दिए शव
रविवार को एसडीआरएफ की टीम भेड़ियारी ठोकर नंबर तीन के आसपास गंडक नदी की निगरानी कर रही थी। इसी दौरान जवानों को पानी में चार शव बहते हुए दिखाई दिए।
टीम ने तुरंत अभियान चलाकर चारों शव बाहर निकाले। इनमें दो महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं। इसके बाद स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई और जरूरी लिखा-पढ़ी पूरी कर शवों को सुरक्षित रखवाया गया।
पिछले चार दिनों से इसी तरह नदी में शव मिलने का सिलसिला जारी है। अकेले भेड़ियारी क्षेत्र में अब तक 11 शव पहुंच चुके हैं, जबकि कुशीनगर जिले में कुल संख्या 13 हो गई है।
कुशीनगर और महराजगंज में 17 शव
रविवार को हुई बरामदगी के बाद दोनों सीमावर्ती जिलों में कुल 17 शव मिलने की पुष्टि हुई है।
कुशीनगर में 13 शव मिले हैं, जबकि महराजगंज में चार अज्ञात शव बरामद हुए थे। महराजगंज में मिले शवों में तीन महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं।
प्रशासन का मानना है कि तेज बहाव के साथ ये शव नेपाल से भारतीय सीमा में पहुंचे हैं। हालांकि शवों की पहचान नहीं होने के कारण प्रशासन वैज्ञानिक और कानूनी प्रक्रिया के जरिए उनकी पहचान सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है।
महराजगंज में मिले शव नेपाल को सौंपे
महराजगंज में मिले चार अज्ञात शवों को पहचान के लिए नियमानुसार 72 घंटे तक मोर्चरी में सुरक्षित रखा गया था। इस दौरान कोई परिजन पहचान के लिए सामने नहीं आया।
रविवार को 72 घंटे की अवधि पूरी होने के बाद चारों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके साथ DNA नमूने भी सुरक्षित किए गए, ताकि भविष्य में किसी परिवार या नेपाल प्रशासन की ओर से दावा किए जाने पर वैज्ञानिक तरीके से पहचान सुनिश्चित की जा सके।
पोस्टमार्टम और DNA सैंपलिंग के बाद महेशपुर बॉर्डर पर चारों शव नेपाल पुलिस को सौंप दिए गए।
कुशीनगर में एक भी शव की पहचान नहीं
सबसे चिंताजनक स्थिति कुशीनगर में है। यहां अब तक मिले शवों में किसी की भी पहचान नहीं हो सकी है।
प्रशासन ने पहचान के लिए जरूरी जानकारी जुटाने और नेपाल के अधिकारियों से संपर्क की प्रक्रिया शुरू की है। पहले बरामद शवों के कपड़ों, आभूषणों, टैटू और अन्य शारीरिक पहचान चिह्नों को भी दर्ज किया गया है। तस्वीरों के माध्यम से भी पहचान कराने की कोशिश की गई है।
जिन शवों को बरामद हुए 72 घंटे पूरे हो रहे हैं, उनका पोस्टमार्टम और DNA सैंपलिंग नियमानुसार कराई जाएगी।
मोर्चरी में भी जगह कम पड़ी
नेपाल की त्रासदी की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि लगातार शव मिलने के कारण कुशीनगर मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में जगह कम पड़ गई है।
मेडिकल कॉलेज परिसर के पोस्टमार्टम हाउस में उपलब्ध छह फ्रीजर पहले बरामद शवों से भर गए। इसके बाद नए शवों को सुरक्षित रखने के लिए गोरखपुर भेजने की व्यवस्था करनी पड़ी।
इस स्थिति ने प्रशासन के सामने राहत-बचाव के साथ शवों को सुरक्षित रखने और उनकी पहचान कराने की अलग चुनौती खड़ी कर दी है।
गंडक सिर्फ शव नहीं तबाही के निशान भी ला रही
नेपाल में बाढ़ की तबाही के निशान गंडक नदी की धार के साथ भारत तक पहुंच रहे हैं।
कुशीनगर में नदी किनारे लकड़ियां, गैस सिलेंडर, चप्पलें और घर-गृहस्थी से जुड़ा सामान बहकर पहुंच रहा है। स्थानीय लोगों के लिए यह सामान नेपाल में आई आपदा की भयावहता की तस्वीर पेश कर रहा है।
नदी के किनारे कई जगह चप्पलें भी बिखरी हुई मिली हैं। कुछ कीचड़ में दबी हैं तो कुछ पानी के साथ बहकर रेत पर पहुंची हैं।
प्रशासन और राहत टीमें लोगों को नदी के तेज बहाव के पास नहीं जाने की चेतावनी दे रही हैं।
गंडक और नारायणी एक ही नदी
नेपाल में इस नदी को नारायणी के नाम से जाना जाता है, जबकि भारत में प्रवेश करने के बाद इसे बड़ी गंडक कहा जाता है।
नदी नेपाल से निकलकर उत्तर प्रदेश और बिहार की तरफ आती है। यही कारण है कि नेपाल के ऊपरी इलाकों में आई भीषण बाढ़ का पानी और उसके साथ बहा मलबा भारतीय सीमा तक पहुंच रहा है।
तेज बहाव के कारण नेपाल में लापता हुए लोगों के शव भी कई किलोमीटर दूर तक बहकर पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
लगातार निगरानी कर रही राहत टीमें
गंडक नदी के किनारे प्रशासन ने राहत और बचाव टीमों को तैनात किया है। एसडीआरएफ के साथ पुलिस और अन्य एजेंसियां लगातार नदी की निगरानी कर रही हैं।
पहले की बरामदगी के दौरान NDRF, SDRF और PAC की फ्लड यूनिट को भी अभियान में लगाया गया था।
नदी में कोई संदिग्ध वस्तु या शव दिखाई देने पर टीम तुरंत मौके पर पहुंच रही है। इसके बाद शव को सुरक्षित बाहर निकालकर पुलिस के माध्यम से मोर्चरी भेजा जाता है।
नेपाल के 22 श्रद्धालुओं का भी पता नहीं
इस बीच नेपाल से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले 22 श्रद्धालुओं के एक दल का भी पांच दिनों से संपर्क नहीं हो पाया है।
इनमें महराजगंज के प्रधान संघ जिलाध्यक्ष और परसौनी के ग्राम प्रधान/प्रशासक अनिल जोशी के काठमांडू निवासी रिश्तेदार बाबू पंत और शारदा देवी भी शामिल बताए गए हैं।
परिवार के मुताबिक 26 अगस्त की सुबह करीब आठ बजे तिब्बत स्थित केरूंग बॉर्डर के इमिग्रेशन ऑफिस से आखिरी बार संपर्क हुआ था। करीब एक घंटे बाद उसी इलाके में भीषण बाढ़ आने की सूचना मिली। इसके बाद से संपर्क नहीं हो सका है।
नेपाल में भी बड़ी संख्या में लोग लापता
नेपाल में आई फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की इस आपदा में मृतकों और लापता लोगों की संख्या लगातार बदल रही है। रविवार की अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल और तिब्बत में कुल मिलाकर कम से कम 800 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3,000 से ज्यादा लोग लापता बताए गए हैं।
नेपाल में कई अज्ञात शवों की पहचान के लिए DNA नमूने लिए जा रहे हैं। मोर्चरी की सीमित क्षमता और शवों की स्थिति को देखते हुए कुछ क्षेत्रों में रिकॉर्ड और DNA नमूने सुरक्षित करने के बाद अस्थायी दफन की प्रक्रिया भी अपनाई गई है।
अब DNA से पहचान की उम्मीद
कुशीनगर और महराजगंज में मिले अज्ञात शवों की पहचान में DNA जांच सबसे महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
महराजगंज प्रशासन ने चारों शवों के DNA नमूने सुरक्षित कर लिए हैं। इससे भविष्य में नेपाल में लापता लोगों के परिवारों के नमूनों से मिलान कराया जा सकेगा।
कुशीनगर में भी 72 घंटे की निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद पोस्टमार्टम और आगे की वैज्ञानिक जांच की तैयारी है।
नेपाल में बाढ़ का पानी भले धीरे-धीरे कम हो रहा हो, लेकिन त्रासदी के निशान अब भी गंडक की धार के साथ भारत तक पहुंच रहे हैं। लगातार चौथे दिन चार और शवों का मिलना इसी भयावह स्थिति को दर्शाता है।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती इन अज्ञात शवों को पहचान दिलाने की है। भारत और नेपाल के प्रशासन के बीच जानकारी साझा की जा रही है, ताकि नेपाल में अपने परिजनों की तलाश कर रहे परिवारों तक सही सूचना पहुंच सके। नदी किनारे राहत टीमें अभी भी सतर्क हैं, क्योंकि गंडक की अगली लहर अपने साथ क्या लेकर आएगी, इसका अंदाजा किसी को नहीं है।
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