Washington वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के साथ हुए हालिया तेल समझौते को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप के मुताबिक, समझौते के तहत मिलने वाले वेनेजुएला के कच्चे तेल का इस्तेमाल सबसे पहले अमेरिका के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) को भरने में किया जाएगा। यह अमेरिका का आपातकालीन तेल भंडार है, जिसका इस्तेमाल ऊर्जा आपूर्ति में संकट की स्थिति में किया जाता है। ट्रंप ने शुक्रवार को वेनेजुएला के साथ हुए समझौते को “दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील” बताया। उन्होंने कहा कि इस समझौते से अमेरिका की कच्चे तेल तक पहुंच बढ़ेगी और देश में तेल की आपूर्ति में इजाफा होगा। ट्रंप के अनुसार, अतिरिक्त आपूर्ति का असर आगे चलकर पेट्रोल और गैस की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
खाली हो रहे तेल भंडार को भरने की तैयारी
अमेरिका का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ट्रंप ने संकेत दिया कि वेनेजुएला से मिलने वाले कच्चे तेल को पहले इस रिजर्व में भेजकर उसे मजबूत किया जाएगा। इसके बाद उपलब्ध तेल का इस्तेमाल अमेरिकी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है। ट्रंप का कहना है कि वेनेजुएला के साथ समझौते से अमेरिका को स्थिर और बड़े पैमाने पर कच्चे तेल की आपूर्ति हासिल करने में मदद मिलेगी। उनका दावा है कि इससे अमेरिकी ऊर्जा भंडार मजबूत होगा और भविष्य में किसी संभावित आपूर्ति संकट से निपटने की क्षमता बढ़ेगी।
पेट्रोल-गैस की कीमतें घटने का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने समझौते के आर्थिक फायदे भी गिनाए। उन्होंने कहा कि तेल की उपलब्धता बढ़ने से बाजार में सप्लाई बढ़ेगी, जिसका सकारात्मक असर ईंधन की कीमतों पर पड़ सकता है। ट्रंप ने दावा किया कि समझौते से अमेरिका में पेट्रोल और गैस की कीमतें कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस डील के जरिए अमेरिका की ऊर्जा स्थिति पहले के मुकाबले और मजबूत होगी। ट्रंप के अनुसार, समझौते से अमेरिकी तेल भंडार “दोगुने से भी ज्यादा” हो जाएंगे।
वेनेजुएला के तेल पर अमेरिका की नजर 
वेनेजुएला दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है और उसके पास बड़े कच्चे तेल भंडार हैं। लंबे समय से अमेरिका और वेनेजुएला के संबंधों में राजनीतिक और आर्थिक तनाव रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच तेल को लेकर हुआ समझौता रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, इस समझौते से अमेरिकी तेल बाजार, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल ट्रंप प्रशासन इसे अमेरिका की ऊर्जा सुरक्षा और ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने की दिशा में अहम कदम के तौर पर पेश कर रहा है।
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