नई दिल्ली: संचार मंत्रालय ने ताया कि दूरसंचार विभाग की नागरिकों पर केंद्रित प्रमुख पहल 'संचार साथी' ने जुलाई में 77,692 खोए या चोरी हुए मोबाइल हैंडसेट बरामद करने में मदद की है। यह पहली बार है जब लॉन्च के बाद से एक ही महीने में बरामदगी का आंकड़ा 75,000 के पार पहुंचा है।
मंत्रालय के बयान के अनुसार, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि इस प्लेटफॉर्म पर लोगों के बढ़ते भरोसे और दूरसंचार विभाग (DoT), दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (TSPs) और विभिन्न राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस विभागों के बीच बेहतर तालमेल को दर्शाती है।
बयान में कहा गया है, "दूरसंचार विभाग (DoT) मिलकर काम करते हुए, बरामदगी बढ़ाने पर केंद्रित इस इकोसिस्टम में लगातार सुधार के लिए सभी संबंधित पक्षों (स्टेकहोल्डर्स) से फीडबैक ले रहा है।"
दूरसंचार विभाग की डिजिटल इंटेलिजेंस यूनिट और उसकी फील्ड यूनिट्स ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर डिवाइस का पता लगाने और उन्हें मालिकों को लौटाने का काम किया, जिससे अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच मासिक हैंडसेट बरामदगी में 201 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
बयान में इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए पहल में किए गए बड़े सुधारों पर जोर देते हुए कहा गया कि नागरिकों को SMS, ईमेल और पोर्टल व एप्लिकेशन के माध्यम से ट्रेसिबिलिटी रिपोर्ट में पुलिस स्टेशन का नाम उपलब्ध कराया जाता है।
बरामदगी बढ़ाने के लिए, खोए/चोरी हुए मोबाइल हैंडसेट में सिम डालने की जानकारी (वैकल्पिक मोबाइल नंबरों सहित) पुलिस अधिकारियों को उपलब्ध कराई जाती है।
नागरिकों को SMS के माध्यम से सलाह दी जाती है कि वे किसी भी संदिग्ध मैलवेयर से सुरक्षा के लिए बरामद मोबाइल हैंडसेट को 'फ़ैक्टरी रीसेट' कर लें।
नागरिक वेब पोर्टल या मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से आसान चरणों में 'संचार साथी' पर खोए या चोरी हुए हैंडसेट की रिपोर्ट कर सकते हैं। रिपोर्ट करने के बाद, मोबाइल हैंडसेट को भारतीय दूरसंचार नेटवर्क में ब्लॉक कर दिया जाता है, जिससे ऐसे डिवाइस के दुरुपयोग को रोका जा सके।
खोए या चोरी हुए हैंडसेट का उपयोग करने की किसी भी कोशिश का पता नेटवर्क द्वारा लगा लिया जाता है, जिससे नागरिक और पुलिस स्टेशन को अलर्ट भेजा जाता है ताकि हैंडसेट को बरामद करके सही मालिक को लौटाया जा सके।