नई दिल्ली: एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को तेज़ी से अपनाने से अलग-अलग इंडस्ट्रीज़ में काम करने की जगहें बदल रही हैं। इससे प्रोडक्टिविटी तो बढ़ रही है, लेकिन नौकरी जाने का डर भी बढ़ रहा है, खासकर युवा कर्मचारियों के बीच।
'क्वार्ट्ज़' की रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे-जैसे बीजिंग अर्थव्यवस्था के लगभग हर सेक्टर में AI को शामिल करने की कोशिशें तेज़ कर रहा है, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से लेकर डिलीवरी सर्विस तक के क्षेत्रों में कर्मचारियों पर इसका असर साफ़ दिख रहा है।
इनमें बीजिंग के प्रोग्रामर फी झाओजुन भी शामिल हैं, जिनकी नौकरी तब चली गई जब उनके एम्प्लॉयर ने यह पता लगाना शुरू किया कि क्या AI उन कोडिंग कामों को कर सकता है जो आम तौर पर इंसान करते थे।
फी उन लगभग 160 कर्मचारियों में से एक थे जिन्हें उनकी कंपनी में कर्मचारियों की संख्या कम करने के दौरान नौकरी से निकाल दिया गया था। इस बदलाव पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि AI की क्षमताएं बेहतर होने के साथ-साथ प्रोग्रामिंग के कई मिड-लेवल रोल ऐसे हो गए हैं जिनकी जगह AI ले सकता है। नौकरी जाने के बाद से फी ने टेक इंडस्ट्री से दूरी बना ली है और शॉर्ट-फॉर्म वीडियो बना रहे हैं, साथ ही अपने अगले करियर कदम के बारे में सोच रहे हैं।
चीन में AI को अपनाने की रफ़्तार बहुत तेज़ रही है। मार्केट इंटेलिजेंस फर्म IDC के अनुसार, 2024 में 10 प्रतिशत से भी कम चीनी औद्योगिक कंपनियां AI मॉडल और एजेंट का इस्तेमाल कर रही थीं। पिछले साल यह आंकड़ा बढ़कर लगभग आधी औद्योगिक कंपनियों तक पहुँच गया, जो दिखाता है कि कंपनियां दक्षता बढ़ाने और लागत कम करने के लिए कितनी तेज़ी से इस तकनीक को अपना रही हैं।
यह बदलाव रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी तेज़ी से दिखाई दे रहा है। लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन्स, जैसे पार्सल-सॉर्टिंग सुविधाओं में ह्यूमनॉइड रोबोट तैनात किए जा रहे हैं, जबकि ऑटोनॉमस मशीनें ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसे काम संभालने लगी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, शहरों में फ़ूड डिलीवरी रोबोट भी आम होते जा रहे हैं, जिससे डिलीवरी और उससे जुड़ी सेवाओं में लगे लाखों कर्मचारियों के भविष्य को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं।
लेबर मार्केट पर यह असर चीन के युवाओं के लिए एक मुश्किल समय में पड़ा है। हालाँकि देश में शहरी बेरोज़गारी की कुल दर लगभग 5 प्रतिशत है, लेकिन 16 से 24 साल के उन लोगों में बेरोज़गारी काफ़ी ज़्यादा है जो पढ़ाई नहीं कर रहे हैं; यह राष्ट्रीय औसत से लगभग तीन गुना है। जानकारों का कहना है कि बड़े पैमाने पर ऑटोमेशन से युवा कर्मचारियों के लिए स्थिर नौकरी पाना और भी मुश्किल हो सकता है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि AI के फ़ायदे से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इस बदलाव के गंभीर सामाजिक परिणाम भी हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ऑटोमेशन बढ़ने से प्रोडक्टिविटी में सुधार और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि अगर तेज़ी से नए मौके नहीं बने, तो बड़े पैमाने पर नौकरियों के जाने से रोज़गार से जुड़ा मौजूदा दबाव और बढ़ सकता है और इससे सामाजिक अस्थिरता भी पैदा हो सकती है।
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