Hasanamba Temple:साल में एक बार खुलता है ये 800 साल पुराना मंदिर, बेहद अनोखी है कहानी

Update: 2026-01-31 02:39 GMT
Hasanamba Temple: भारत में मंदिरों की कोई कमी नहीं है। हर राज्य और हर शहर में धार्मिक स्थल हैं जिनकी अपनी अलग पहचान और परंपराएं हैं। ऐसा ही एक मंदिर कर्नाटक के हासन जिले में स्थित हसनम्बा देवी मंदिर है। यह मंदिर अपनी अनोखी मान्यताओं और रहस्यमयी परंपराओं के कारण पूरे देश में काफी मशहूर है।माना जाता है कि हसनम्बा मंदिर लगभग 800 साल पुराना है। इसे 12वीं सदी में होयसला वास्तुकला शैली में बनाया गया था। मंदिर की मुख्य देवी आदि शक्ति हैं। इसकी बनावट भी बहुत खास है। कहा जाता है कि यह मंदिर दीमक की बांबी के आकार में बनाया गया है, जो इसे और भी खास पहचान देता है।
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह साल में सिर्फ एक बार खुलता है। हर साल दिवाली के दिन भक्तों के लिए मंदिर के दरवाजे खोले जाते हैं। इस दिन दूर-दूर से भक्त पूजा-अर्चना करने आते हैं। पूरा इलाका उत्सव के माहौल में डूब जाता है।मंदिर परिसर में प्रवेश करने पर सिद्धेश्वर स्वामी की मूर्ति दिखाई देती है। यहां भगवान शिव को सामान्य शिवलिंग के रूप में नहीं, बल्कि अर्जुन को पशुपतास्त्र देते हुए दिखाया गया है। इसके अलावा, यहां रावण की दस सिर वाली वीणा बजाते हुए मूर्ति भी दिखाई देती है, जो भक्तों को हैरान कर देती है।
हमेशा जलने वाला दीपक
दिवाली के दिन मंदिर के अंदर दो बोरी चावल, पानी और घी का दीपक रखा जाता है। इस दीपक को नंदा दीपम कहते हैं। मंदिर को फूलों से सजाकर बंद कर दिया जाता है। जब एक साल बाद मंदिर फिर से खुलता है, तो चावल पका हुआ और गर्म मिलता है। कहा जाता है कि यह खराब नहीं होता। नंदा दीपम का घी भी पूरे साल जलता रहता है। यह रहस्य इस मंदिर को खास बनाता है।
हसनम्बा का मतलब है वह मां जो अपने भक्तों को मुस्कान के साथ आशीर्वाद देती है। एक लोक कथा के अनुसार, देवी ने एक दुखी बहू की रक्षा के लिए उसे पत्थर में बदल दिया था। इस पत्थर को 'शोशी कल' कहा जाता है। माना जाता है कि यह पत्थर हर साल थोड़ा-थोड़ा देवी की ओर बढ़ता है और कलयुग के अंत में उन तक पहुंच जाएगा।
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