ज्योतिष न्यूज़: हिंदू पंचांग में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत और विष्णु पूजा करने से आध्यात्मिक शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। हिंदू कैलेंडर में एक साल के दौरान 24 एकादशी पड़ती हैं और प्रत्येक का अपना अलग महत्व बताया गया है। सितंबर 2026 की पहली एकादशी अजा एकादशी होगी। इसकी तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस है। आइए जानते हैं अजा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा, पारण का सही समय क्या है और पूजा कैसे करनी चाहिए।
कब रखा जाएगा अजा एकादशी व्रत?
पंचांग के मुताबिक, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर 2026 को शाम 7:30 बजे आरंभ होगी और अगले दिन 7 सितंबर को शाम 5:05 बजे समाप्त होगी। व्रत के लिए उदया तिथि को मान्यता दी जाती है। इसलिए अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा।
अजा एकादशी व्रत का पारण कब होगा?
अजा एकादशी व्रत का पारण 8 सितंबर 2026 को किया जाएगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन सुबह 6:02 बजे से 8:33 बजे तक पारण का शुभ समय रहेगा। व्रती इस अवधि में स्नान, पूजा और भगवान विष्णु की आराधना करने के बाद व्रत खोल सकते हैं।
अजा एकादशी पर बनेंगे शुभ योग
इस बार अजा एकादशी को धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। 7 सितंबर की सुबह पुनर्वसु और पुष्य नक्षत्र का संयोग रहेगा। इसके अलावा इस दिन वरीयान योग और सर्वार्थ सिद्धि योग भी बनने की बात कही गई है।
अजा एकादशी की पूजा विधि
सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल की सफाई कर गंगाजल से शुद्धिकरण करें और व्रत का संकल्प लें।
पीले या लाल कपड़े पर भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
भगवान को पीला चंदन, अक्षत, फूल, माला और वस्त्र अर्पित करें। पूजा में तुलसी दल अवश्य शामिल करें।
खीर, मिठाई और मौसमी फलों का भोग लगाएं।
घी का दीपक और धूप जलाकर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
इसके बाद विष्णु चालीसा और अजा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
अंत में भगवान विष्णु और एकादशी माता की आरती करें।
अगले दिन द्वादशी तिथि में पूजा करने के बाद निर्धारित समय में व्रत का पारण करें।