परवाणू। परवाणू के लेबर इंस्पेक्टर कार्यालय में शुक्रवार को उस समय हंगामा मच गया, जब मजदूर अपने केस की तय तारीख पर सुनवाई के लिए दिए समय पर पहुंच गए, लेकिन खुद लेबर इंस्पेक्टर घंटों इंतजार के बाद भी कार्यालय नहीं पहुंचे। मजदूरों के मुताबिक सुनवाई की तारीख खुद लेबर इंस्पेक्टर द्वारा तय की गई थी, लेकिन पेशी वाले दिन बिना किसी पूर्व सूचना के उनकी गैरमौजूदगी ने सबको हैरान कर दिया। मजदूरों ने जब इस बारे में लेबर ऑफिसर सोलन पीएस वर्मा से बात की तो पता चला कि उन्हें भी इंस्पेक्टर की अनुपस्थिति की कोई जानकारी नहीं थी। बाद में अधिकारी को यह पता चला कि इंस्पेक्टर नालागढ़ कोर्ट में चल रहे एक मामले के लिए गए हुए हैं। मजदूरों का आरोप है कि विभाग की यह लापरवाही सीधे-सीधे उनके साथ अन्याय है। कई महीनों से लेबर ऑफिस बिना स्थाई एलआई के चल रहा है, जिसका अतिरिक्त कार्यभार कभी किसी को दिया जाता है तो लाभ किसी को। कसौली से आए मजदूर विक्रम सिंह ने आरोप लगाया कि न तो इंस्पेक्टर पहुंचे और न ही मैनेजमेंट का कोई प्रतिनिधि।
इससे मजदूरों में यह शक गहराया कि शायद लेबर विभाग ने पहले ही कंपनी प्रबंधकों को बता दिया होगा कि सुनवाई नहीं होने वाली, जबकि मजदूरों को जानबूझकर अंधेरे में रखा गया। उन्होंने कहा की आज मजदूर हितों की सुनवाई होनी थी लेकिन नहीं हो पाई। इस मुद्दे पर सीटू के जिला अध्यक्ष ओमदत्त शर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि परवाणू में स्थाई लेबर इंस्पेक्टर न होना मजदूरों के साथ सीधा अन्याय है। उन्होंने बताया कि सोलन लेबर ऑफिस मजदूरों की समस्याएं सुनने में नाकाम रहा है। ऊपर से लेबर ऑफिसर महीने में कई बार परवाणू की कंपनियों में तो जाते हैं, लेकिन लेबर कार्यालय में कभी नहीं आते। ऐसे में, जिन फैक्ट्रियों के खिलाफ केस चल रहे हैं उन्हीं उद्योगों में लगातार अधिकारी का जाना भ्रष्टाचार की बू पैदा करता है। ओम दत्त ने सरकार पर भी सीधा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार मजदूरों की परेशानियों को गंभीरता से नहीं ले रही और बड़े उद्योगपतियों के दबाव में काम कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह मजदूर-विरोधी रवैया जारी रहा तो सीटू और मजदूर मिलकर बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे और सरकार को जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा।