Himachal Pradesh हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून लगातार भारी तबाही मचा रहा है। राज्य में लगातार हो रही भारी बारिश, बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने हालात गंभीर बना दिए हैं। अब तक इन घटनाओं में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सड़कें, पुल और कई गांव बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 49 सड़कें अभी भी बंद हैं, जिससे कई इलाकों का संपर्क टूट गया है। वहीं कई जगहों पर बिजली और पेयजल आपूर्ति भी बाधित है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) के मुताबिक, सार्वजनिक और निजी संपत्ति को अब तक 15.27 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है।
प्रशासन की टीमें लगातार सड़कें खोलने, बिजली आपूर्ति बहाल करने और पानी की व्यवस्था को सामान्य करने में जुटी हुई हैं। हालांकि लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों में बाधा डाल रही है।
इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि हर साल हिमाचल प्रदेश में मानसून इतना खतरनाक क्यों होता जा रहा है? क्या इसका कारण केवल भारी बारिश है या इसके पीछे कोई गहरी वजह भी है?
विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जिनमें जलवायु परिवर्तन, अनियंत्रित निर्माण कार्य और पहाड़ों की कमजोर होती प्राकृतिक संरचना प्रमुख हैं।
बादल फटने की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं?
वैज्ञानिकों का मानना है कि बादल फटने की घटनाओं के पीछे सबसे बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन है। पहले मानसून की नमी वाली हवाएं और पश्चिमी विक्षोभ अलग-अलग समय पर सक्रिय होते थे, लेकिन अब ग्लोबल वार्मिंग के कारण ये मौसम प्रणालियां कई बार एक साथ टकरा जाती हैं।
इस टकराव के कारण वातावरण में अचानक अत्यधिक नमी जमा हो जाती है, जिससे कुछ ही घंटों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश होने लगती है। कई बार स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि एक महीने की बारिश कुछ ही घंटों में हो जाती है।
इसी वजह से बादल फटने (क्लाउडबर्स्ट) जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं, जो खासकर पहाड़ी इलाकों में भारी तबाही का कारण बनती हैं। तेज बारिश के कारण नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है और भूस्खलन की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि पहाड़ों पर तेजी से हो रहे निर्माण कार्य, पेड़ों की कटाई और कमजोर ड्रेनेज सिस्टम भी इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं।