ईरान के परमाणु ठिकानों का होगा IAEA निरीक्षण, एजेंसी प्रमुख ग्रॉसी का बड़ा संकेत

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Update: 2026-06-24 12:12 GMT
New Delhi. नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी ने बुधवार को संकेत दिया कि उनकी एजेंसी की टीम जल्द ही ईरान की परमाणु संवर्धन (न्यूक्लियर एनरिचमेंट) सुविधाओं का निरीक्षण कर सकती है। यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए अंतरिम समझौते के बाद सामने आया है और इसे दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ग्रॉसी का यह अब तक का सबसे स्पष्ट बयान माना जा रहा है, जिसने वैश्विक स्तर पर परमाणु सुरक्षा और मध्य पूर्व की स्थिरता को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी IAEA लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी करती रही है। एजेंसी का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परमाणु गतिविधियों का इस्तेमाल केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए हो और उनका उपयोग हथियार निर्माण में न किया जाए। ऐसे में ईरान की परमाणु सुविधाओं तक निरीक्षकों की पहुंच अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। गौरतलब है कि वर्ष 2025 में ईरान और इजरायल के बीच 12 दिनों तक चले संघर्ष के दौरान ईरान की कई परमाणु सुविधाएं निशाने पर रही थीं। इजरायल ने अपने हमलों में ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया था। इसके बाद अमेरिका ने भी बी-2 बमवर्षक विमानों के जरिए फोर्दो, नतांज और इस्फहान स्थित परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। इन घटनाओं के बाद ईरान ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए IAEA निरीक्षकों की पहुंच कई महत्वपूर्ण परमाणु स्थलों तक सीमित कर दी थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन परमाणु स्थलों पर मौजूद उच्च स्तर का संवर्धित यूरेनियम वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार ईरान के पास इतना उच्च संवर्धित यूरेनियम मौजूद है कि यदि वह चाहे तो उससे कई परमाणु हथियार तैयार किए जा सकते हैं। हालांकि ईरान लगातार इस बात से इनकार करता रहा है कि उसका कोई परमाणु हथियार कार्यक्रम है। तेहरान का दावा है कि उसका पूरा परमाणु कार्यक्रम ऊर्जा उत्पादन, चिकित्सा अनुसंधान और अन्य शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए संचालित किया जा रहा है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता इसलिए बनी हुई है क्योंकि ईरान दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास बिना किसी आधिकारिक परमाणु हथियार कार्यक्रम की घोषणा किए 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्तर हथियार-ग्रेड यूरेनियम के काफी करीब माना जाता है।

जापान के फुकुशिमा दाइची परमाणु संयंत्र में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान IAEA प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने कहा कि राजनीतिक बयान अपनी जगह हैं, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख किया गया है कि परमाणु सामग्री और परमाणु सुविधाओं से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी IAEA द्वारा की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए निरीक्षण अनिवार्य है और यह प्रक्रिया अवश्य होगी। ग्रॉसी ने कहा कि निरीक्षण दो दिन बाद हो, एक सप्ताह बाद हो या दस दिन बाद, इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि निरीक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और एजेंसी अपनी जिम्मेदारी निभाएगी। उनके इस बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

इन निरीक्षणों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते में ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम संवर्धित स्तर तक लाने, जिसे तकनीकी भाषा में "डाउनब्लेंड" कहा जाता है, का प्रावधान शामिल बताया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो परमाणु हथियार निर्माण की आशंकाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। हालांकि ईरान की ओर से ग्रॉसी के बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने हाल ही में कहा था कि अमेरिकी हमलों का शिकार बने परमाणु स्थलों पर संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों को भेजने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों के उन दावों को भी खारिज किया था, जिनमें कहा गया था कि ईरान निरीक्षण के लिए तैयार हो गया है।

वर्तमान स्थिति में IAEA को ईरान के कुछ अन्य परमाणु प्रतिष्ठानों, जैसे बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र, तक सीमित पहुंच मिली हुई है। लेकिन एजेंसी को उन प्रमुख संवर्धन केंद्रों तक जाने की अनुमति नहीं है जहां यूरेनियम संवर्धन का कार्य होता रहा है। यही वजह है कि एजेंसी अभी तक ईरान के वास्तविक यूरेनियम भंडार और सेंट्रीफ्यूज मशीनों की स्थिति का स्वतंत्र रूप से सत्यापन नहीं कर पाई है। हालांकि ईरान और IAEA दोनों का कहना है कि वर्तमान समय में ईरान सक्रिय रूप से यूरेनियम संवर्धन नहीं कर रहा है, लेकिन कई परमाणु विशेषज्ञों को आशंका है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को किसी गुप्त स्थान पर स्थानांतरित कर सकता है। यही कारण है कि प्रस्तावित निरीक्षणों को वैश्विक सुरक्षा और परमाणु अप्रसार व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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