SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, नियुक्ति प्रक्रिया पर भी मांगा जवाब
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ और कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कई सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची नागरिक के मताधिकार का आधार है, इसलिए इसमें किसी भी तरह के बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी और कानून के अनुरूप होनी चाहिए।
प्रेस वार्ता में आराधना मिश्रा और अभय दुबे ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट के अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ मामले में आए संविधान पीठ के फैसले का उल्लेख किया। सुप्रीम कोर्ट ने उस समय व्यवस्था दी थी कि संसद की ओर से कानून बनाए जाने तक मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली समिति की सलाह पर की जाएगी।
बाद में संसद ने 2023 में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून बनाया। नई वैधानिक व्यवस्था में चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को रखा गया। इसी बदलाव को लेकर कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाए और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता तथा नियुक्ति प्रक्रिया पर अपनी चिंताएं सामने रखीं। सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले में भी स्पष्ट था कि उसकी अंतरिम व्यवस्था संसद द्वारा कानून बनाए जाने तक लागू रहेगी।
कांग्रेस नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि मतदाता सूची में किसी योग्य मतदाता का नाम शामिल होना उसके लोकतांत्रिक अधिकार से सीधे जुड़ा विषय है। ऐसे में मतदाता सूची से नाम जोड़ने या हटाने की पूरी प्रक्रिया में स्पष्टता और पारदर्शिता होनी चाहिए।
प्रेस वार्ता में कांग्रेस ने दावा किया कि SIR के अलग-अलग चरणों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि तीन चरणों में 13.98 करोड़ नाम हटाए गए, जबकि 5.43 करोड़ लोगों को अतिरिक्त दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए नोटिस जारी किए गए। ये आंकड़े कांग्रेस की ओर से प्रेस वार्ता में किए गए दावे हैं।
कांग्रेस नेताओं ने नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़ी प्रक्रिया और फॉर्म-6 में हुए बदलाव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि मतदाता सूची में नाम शामिल कराने वाले नागरिकों से किस आधार पर दस्तावेज मांगे जा रहे हैं और पूरी प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों का किस तरह पालन किया जा रहा है। पार्टी ने कहा कि चुनाव आयोग को इन मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
आराधना मिश्रा और अभय दुबे ने आयोग के भीतर कथित तौर पर उठी आपत्तियों का मुद्दा भी प्रेस वार्ता में रखा। कांग्रेस ने दावा किया कि चुनाव आयुक्तों की ओर से विभिन्न मामलों में 14 आपत्तियां सामने आई थीं और इस संबंध में आयोग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि SIR सहित आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं।
कांग्रेस नेताओं का कहना था कि चुनाव प्रक्रिया में मतदाता सूची की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और इसी सूची के आधार पर नागरिक मतदान में हिस्सा लेते हैं। इसलिए मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर होने वाले किसी भी संशोधन को लेकर राजनीतिक दलों और मतदाताओं के सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए।
अनूप बरनवाल मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 2 मार्च 2023 को फैसला सुनाया था। पीठ में न्यायमूर्ति केएम जोसेफ, न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी, न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस, न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार शामिल थे। अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए अंतरिम चयन व्यवस्था निर्धारित करते हुए इसे संसद द्वारा कानून बनाए जाने तक लागू रखने की बात कही थी।
कांग्रेस नेताओं ने इसी पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर किसी तरह का संदेह नहीं रहना चाहिए। उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया और मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े अपने सवालों पर आयोग से जवाब मांगा।
प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उनकी आपत्ति मतदाता सूची के पुनरीक्षण की आवश्यकता पर नहीं, बल्कि इसकी प्रक्रिया और पारदर्शिता से जुड़े सवालों पर है। उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची में नाम हटाने या अतिरिक्त दस्तावेज मांगने से जुड़े नियम स्पष्ट किए जाएं और प्रभावित मतदाताओं को अपनी बात रखने तथा आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर मिले।
इस तरह कांग्रेस ने SIR, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली से जुड़े कई मुद्दों को एक साथ उठाया है। वहीं चुनाव आयोग ने SIR सहित अपने फैसलों को तीनों आयुक्तों की सहमति से लिया गया बताया है। अब कांग्रेस की ओर से उठाए गए अन्य सवालों पर आयोग की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार है।