विजयवाड़ा। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू 30 सितंबर को विजयवाड़ा में हजारों परिवारों को घर और जमीन के मालिकाना हक से जुड़े पट्टे सौंपेंगे। ‘पेदालाकु पट्टाभिषेकम–मी इल्लु मी हक्कु’ कार्यक्रम के तहत लंबे समय से घर की जमीन पर पूर्ण अधिकार का इंतजार कर रहे परिवारों को मालिकाना दस्तावेज दिए जाएंगे। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में लाभार्थियों की संख्या 24,042 बताई गई है।
विजयवाड़ा के सांसद केसिनेनी शिवनाथ, जिन्हें चिन्नी के नाम से भी जाना जाता है, ने बताया कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू 30 सितंबर को आयोजित होने वाले कार्यक्रम में लाभार्थियों को पट्टे सौंपेंगे। इसके लिए पात्र परिवारों की पहचान की गई है और प्रशासन कार्यक्रम की तैयारियों में जुटा है।इस पहल का सबसे बड़ा लाभ उन परिवारों को मिलने वाला है, जो लंबे समय से संबंधित घरों या भूखंडों पर रह रहे हैं लेकिन उनके पास पूर्ण मालिकाना अधिकार से जुड़े दस्तावेज नहीं थे। पट्टे मिलने के बाद पात्र परिवारों को अपनी संपत्ति पर कानूनी अधिकार मिलने का रास्ता साफ होगा।
एनटीआर जिला प्रशासन के अनुसार, पात्र लाभार्थियों की पहचान और दस्तावेजों की जांच के बाद पट्टे जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। जिला कलेक्टर डॉ. जी. लक्ष्मीशा ने कहा है कि पात्र लाभार्थियों को पट्टे उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा रही है। मामले को राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद आगे बढ़ाया गया है।यह कार्यक्रम आंध्र प्रदेश सरकार की ‘पेदालाकु पट्टाभिषेकम–मी इल्लु मी हक्कु’ पहल का हिस्सा है। इसका उद्देश्य लंबे समय से सरकारी जमीन पर बने घरों या आवासीय भूखंडों पर रह रहे पात्र परिवारों को नियमों के तहत मालिकाना अधिकार उपलब्ध कराना है।
इससे पहले विशाखापत्तनम में भी इसी कार्यक्रम के तहत बड़े स्तर पर मालिकाना दस्तावेज वितरित किए गए थे। 19 सितंबर को मुख्यमंत्री नायडू ने विशाखापत्तनम क्षेत्र के 28,445 परिवारों को घर की जमीन से संबंधित मालिकाना दस्तावेज प्रदान किए थे। इस प्रक्रिया के तहत 399 एकड़ भूमि को नियमित किया गया था।विशाखापत्तनम में नियमित की गई जमीन का पंजीकरण मूल्य करीब 8,874 करोड़ रुपये बताया गया था। यह जमीन 11 मंडलों में फैली लगभग 19.33 लाख वर्ग गज भूमि थी। सरकार ने वहां दशकों से रह रहे परिवारों को पूर्ण अधिकार देने के उद्देश्य से यह कदम उठाया था।
विशाखापत्तनम कार्यक्रम के बाद अब विजयवाड़ा और एनटीआर जिले में इसी मॉडल को आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का कहना है कि लंबे समय से घर होने के बावजूद कानूनी मालिकाना दस्तावेज नहीं रखने वाले पात्र परिवारों की समस्या को हल करना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।मालिकाना पट्टा मिलने से परिवारों के लिए संपत्ति से जुड़े कई कानूनी और प्रशासनिक काम आसान हो सकते हैं। स्पष्ट स्वामित्व दस्तावेज होने से संपत्ति का हस्तांतरण, उत्तराधिकार और अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं अधिक स्पष्ट हो जाती हैं। यही कारण है कि दशकों से पट्टे की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों के लिए इस कार्यक्रम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विजयवाड़ा के सांसद केसिनेनी शिवनाथ ने इस कार्यक्रम को गरीब परिवारों के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि पहले चरण में लगभग 24 हजार लाभार्थियों को पट्टे दिए जाएंगे। पात्रता रखने वाले कुछ अन्य परिवारों को आगे के चरण में दस्तावेज दिए जाने की बात भी कही गई है।विजयवाड़ा ईस्ट के विधायक गद्दे राममोहन राव ने भी इस प्रक्रिया को लंबे समय से लंबित मांग से जोड़ा। उनके मुताबिक, जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के स्तर पर इस विषय पर लगातार चर्चा की गई और जटिल मामलों का समाधान निकालने के लिए अधिकारियों ने काम किया।
सरकार का जोर इस बात पर है कि पात्र परिवारों को केवल घर में रहने का अधिकार ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े स्पष्ट मालिकाना दस्तावेज भी उपलब्ध हों। इससे लाभार्थियों को अपनी संपत्ति को लेकर लंबे समय से बनी अनिश्चितता से राहत मिलने की उम्मीद है।एनटीआर जिले का मुख्यालय विजयवाड़ा है। आधिकारिक जिला वेबसाइट के अनुसार जिले में तीन राजस्व संभाग, 20 मंडल और 321 गांव हैं। ऐसे में बड़े स्तर पर लाभार्थियों के दस्तावेजों की जांच और पट्टों के वितरण के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।
30 सितंबर को होने वाला कार्यक्रम विशाखापत्तनम के बाद इस अभियान का एक और बड़ा चरण होगा। विशाखापत्तनम में हजारों परिवारों को मालिकाना अधिकार मिलने के बाद विजयवाड़ा के लाभार्थियों के लिए भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।कार्यक्रम के तहत पात्र परिवारों को उनके घर और जमीन से जुड़े अधिकारों के दस्तावेज सौंपे जाएंगे। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पात्र लाभार्थियों को प्रक्रिया में शामिल करने के लिए दस्तावेजों की जांच की गई है और पहले चरण के बाद शेष पात्र मामलों को भी आगे बढ़ाया जाएगा।
सरकार की इस पहल को आवासीय सुरक्षा और संपत्ति अधिकार से जोड़कर देखा जा रहा है। वर्षों से किसी स्थान पर रहने के बावजूद मालिकाना दस्तावेज नहीं होने के कारण परिवारों को कई व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। नियमितीकरण के बाद ऐसे परिवारों को उनकी संपत्ति पर स्पष्ट अधिकार प्राप्त होगा।मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की मौजूदगी में 30 सितंबर को विजयवाड़ा में होने वाले कार्यक्रम में पहले चरण के लाभार्थियों को पट्टे सौंपे जाएंगे। इसके साथ ही विशाखापत्तनम के बाद विजयवाड़ा में भी ‘पेदालाकु पट्टाभिषेकम–मी इल्लु मी हक्कु’ अभियान के तहत लंबे समय से लंबित मालिकाना अधिकारों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।