आंध्र प्रदेश

Andhra: जगन ने पीएम-सीजेआई-एलओपी पैनल में वापसी की मांग की

Tulsi Rao
26 Sept 2026 5:08 PM IST
Andhra: जगन ने पीएम-सीजेआई-एलओपी पैनल में वापसी की मांग की
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अमरावती: YSRCP के अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने शुक्रवार को भारत के चुनाव आयोग में नियुक्तियों से जुड़े कानून पर फिर से विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के अंदर मतभेदों की खबरों ने देश की चुनावी संस्थाओं में जनता के भरोसे को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा मतदाता सूची, वोटर रजिस्ट्रेशन और EC के डिजिटल सिस्टम से जुड़े कई फैसलों पर आपत्ति जताने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए जगन ने कहा कि लोकतंत्र तभी ठीक से काम कर सकता है जब नागरिकों को चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर पूरा भरोसा हो। राष्ट्रीय मीडिया ने बताया है कि इन दो आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं, जिनमें मतदाता सूची में बदलाव और मतदाता सूची डेटाबेस कंट्रोल के केंद्रीकरण को लेकर चिंताएं शामिल हैं। जगन ने कहा, "आरोप-प्रत्यारोप के बजाय, जनता को यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या आपत्तियां दर्ज की गईं, उन पर क्या कार्रवाई हुई और सिस्टम कितनी पारदर्शिता से काम कर रहा था।" उन्होंने खास तौर पर मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने का ज़िक्र किया।

उन्होंने कहा कि पारदर्शिता का दायरा किसी संस्था के कामकाज से कहीं आगे होना चाहिए। उन्होंने कहा, "लोकतंत्र में पारदर्शिता न केवल होनी चाहिए, बल्कि वह दिखनी भी चाहिए।"

जगन ने कहा कि 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023' - जिसका उनकी पार्टी ने उस समय समर्थन किया था - पर अब हालिया घटनाक्रमों को देखते हुए फिर से विचार किया जाना चाहिए।

उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव का एक खास प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा, "बिल में एक संशोधन लाया जाना चाहिए जिसके तहत चुनाव आयुक्त की नियुक्ति तीन सदस्यीय समिति करे, जिसमें विपक्ष के नेता (LoP), भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और प्रधानमंत्री सदस्य हों।"

केंद्र सरकार से पहल करने की मांग करते हुए जगन ने कहा, "केंद्र सरकार को आगे आना चाहिए, सही प्रक्रिया तय करनी चाहिए और इस डर को दूर करना चाहिए।" उन्होंने तर्क दिया कि नियुक्ति की एक निष्पक्ष प्रक्रिया से चुनाव आयोग में भरोसा बहाल करने में मदद मिलेगी। जगन ने इस मामले की तुलना उस सिद्धांत से की जिसके तहत "एग्जामिनर की नियुक्ति" पर तब भी आरोप लग सकते हैं जब एग्जामिनर ईमानदार हो। उन्होंने कहा कि एक निष्पक्ष चयन प्रक्रिया से चुनाव आयोग का "सम्मान और भरोसा" फिर से कायम करने में मदद मिलेगी।

जगन ने यह भी आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश में SIR प्रक्रिया के दौरान सत्ताधारी पार्टी ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया और विपक्ष की आपत्तियों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि स्थानीय निकाय चुनाव प्रक्रिया के दौरान डिवीज़न की सीमाओं को फिर से तय करने को लेकर YSRCP की आपत्तियों को नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने कहा, "आखिरकार, हमें चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा मजबूत करना होगा, हर नागरिक के वोट देने के अधिकार की रक्षा करनी होगी और उन व्यवस्थाओं को मजबूत करना होगा जिनसे लोग बिना किसी डर के अपने इस अधिकार का इस्तेमाल कर सकें।" उन्होंने चुनाव आयोग के कामकाज के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही को बहुत ज़रूरी बताया।

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