नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने थाईलैंड में 840 रेडिएटेड कछुओं की कथित तस्करी से जुड़े मामले में वांछित मुरुगेसन मणिवन्नन को प्रत्यर्पण कार्यवाही से मुक्त करने और जेल से रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने यह आदेश केंद्र सरकार के उस रुख के बाद दिया, जिसमें कहा गया कि फिलहाल मणिवन्नन को थाईलैंड प्रत्यर्पित नहीं किया जाएगा और उससे संबंधित मामला भारत में स्थानीय स्तर पर मुकदमा चलाने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को भेज दिया गया है।दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस मधु जैन ने 9 सितंबर को दिए आदेश में कहा कि मणिवन्नन को 6 जनवरी 2026 को थाईलैंड प्रत्यर्पण के इंतजार में हिरासत में भेजा गया था। प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962 की धारा 24 के तहत निर्धारित दो महीने की अवधि 6 मार्च 2026 को समाप्त हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद उसे भारत से थाईलैंड नहीं भेजा गया।अदालत के सामने केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि अब मणिवन्नन को थाईलैंड भेजने का इरादा नहीं है। उसके खिलाफ भारत में भी वन्यजीव तस्करी से संबंधित कार्यवाही लंबित होने के कारण मामले को स्थानीय अभियोजन के लिए CBI को सौंपने का फैसला किया गया है। इसके बाद हाई कोर्ट ने कहा कि जब केंद्र स्वयं स्पष्ट कर चुका है कि आरोपी को अनुरोध करने वाले देश यानी थाईलैंड को प्रत्यर्पित नहीं किया जाएगा, तो प्रत्यर्पण के पुराने आदेश के आधार पर उसकी हिरासत जारी नहीं रखी जा सकती।
हाई कोर्ट ने मणिवन्नन को प्रत्यर्पण कार्यवाही से मुक्त करते हुए आदेश दिया कि अगर वह किसी अन्य मामले में हिरासत के लिए आवश्यक नहीं है तो उसे जेल से रिहा कर दिया जाए। अदालत ने आदेश की प्रति संबंधित जेल अधीक्षक और निचली अदालत को भेजने का भी निर्देश दिया।मामला थाईलैंड में 840 रेडिएटेड कछुओं के कथित अवैध आयात से जुड़ा है। उपलब्ध अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक, 27 अगस्त 2012 को मणिवन्नन थाईलैंड के सुवर्णभूमि एयरपोर्ट पर 840 रेडिएटेड कछुओं के साथ पहुंचा था। जांच के दौरान उसे छोड़ दिया गया था, लेकिन बाद में वह थाईलैंड से भारत आ गया। इसके बाद थाईलैंड की समुत प्राकान प्रांतीय अदालत ने 4 अप्रैल 2014 को उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। आरोप वन्यजीवों या उनके अवशेषों को आवश्यक अनुमति के बिना आयात या निर्यात करने से संबंधित थे।रेडिएटेड कछुए मुख्य रूप से मेडागास्कर में पाए जाते हैं और वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण प्रजाति हैं। 2021 में मामले की सुनवाई के दौरान भी दिल्ली की अदालत के सामने थाईलैंड की ओर से लगाए गए आरोपों का विवरण रखा गया था।
थाईलैंड ने मणिवन्नन के प्रत्यर्पण के लिए राजनयिक माध्यमों से भारत सरकार को अनुरोध भेजा था। इसके आधार पर भारत में प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई। दिसंबर 2021 में दिल्ली की एक अदालत ने उसे जमानत देते हुए एक लाख रुपये का जमानती बॉन्ड और इतनी ही राशि की जमानत देने का निर्देश दिया था। साथ ही पासपोर्ट जमा करने और बिना अनुमति देश नहीं छोड़ने जैसी शर्तें लगाई गई थीं।इसके बाद मामला आगे बढ़ता रहा और 6 जनवरी 2026 को पटियाला हाउस कोर्ट ने उसे थाईलैंड को सौंपे जाने की प्रतीक्षा में न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में भी यह दर्ज है कि मणिवन्नन थाईलैंड के अनुरोध पर शुरू हुई प्रत्यर्पण कार्यवाही का सामना कर रहा था और 6 जनवरी के आदेश के बाद न्यायिक हिरासत में था।
मणिवन्नन ने अपनी हिरासत और प्रत्यर्पण प्रक्रिया को लेकर अदालतों का रुख किया। मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी विशेष अनुमति याचिकाओं में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। हालांकि उसने लंबे समय तक हिरासत में रहने को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट से मामले को जल्द सुनने और फैसला करने का प्रयास करने को कहा था।इस बीच मामले में महत्वपूर्ण बदलाव तब आया जब भारतीय अधिकारियों ने मणिवन्नन के खिलाफ भारत में चल रही वन्यजीव तस्करी से संबंधित कार्यवाही को ध्यान में रखा। दिल्ली हाई कोर्ट के सितंबर के आदेश में केंद्र की ओर से दाखिल स्थिति रिपोर्ट का उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया कि मध्य प्रदेश वन विभाग ने मणिवन्नन को बरी किए जाने के एक आदेश को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी है और संबंधित कार्यवाही अभी लंबित है।
स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक, CBI ने जुलाई में बताया था कि भारत में आपराधिक कार्यवाही अभी अंतिम रूप से समाप्त नहीं हुई है। भारतीय मामला भी व्यापक वन्यजीव तस्करी गतिविधियों से जुड़ा बताया गया और मणिवन्नन को कथित भारतीय नेटवर्क का हिस्सा बताया गया है। ये आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि भारत और थाईलैंड के बीच प्रत्यर्पण संधि के प्रावधानों को देखते हुए और भारत के पास भी संबंधित अपराधों पर अधिकार क्षेत्र होने के कारण विदेश मंत्रालय ने मामले को भारत में स्थानीय अभियोजन के लिए CBI को भेजने का निर्णय लिया है। केंद्र ने स्पष्ट किया कि मौजूदा स्थिति में मणिवन्नन को थाईलैंड प्रत्यर्पित नहीं किया जाएगा।
इसी रुख को हाई कोर्ट के फैसले का प्रमुख आधार माना गया। अदालत ने कहा कि प्रत्यर्पण के लिए हिरासत का उद्देश्य संबंधित व्यक्ति को अनुरोध करने वाले देश को सौंपना होता है। जब सरकार खुद कह रही है कि फिलहाल प्रत्यर्पण नहीं किया जाएगा, तो उसी प्रत्यर्पण आदेश के आधार पर व्यक्ति को लगातार हिरासत में रखना उचित नहीं होगा।अदालत ने यह भी दर्ज किया कि 6 जनवरी से शुरू हुई दो महीने की वैधानिक अवधि 6 मार्च को समाप्त हो चुकी थी और मणिवन्नन को तब तक थाईलैंड नहीं भेजा गया था। इसलिए हाई कोर्ट ने उसे प्रत्यर्पण कार्यवाही से मुक्त करने का आदेश दिया।
हालांकि इस आदेश का अर्थ मणिवन्नन के खिलाफ सभी आरोपों या भारत में संभावित आपराधिक कार्यवाही का अंत नहीं है। हाई कोर्ट का आदेश मुख्य रूप से प्रत्यर्पण के आधार पर जारी हिरासत से संबंधित है। केंद्र सरकार ने साफ किया है कि मामला CBI को स्थानीय अभियोजन के लिए भेजा गया है और भारत में संबंधित न्यायिक कार्यवाही अलग से जारी रह सकती है।इस तरह थाईलैंड में 840 रेडिएटेड कछुओं की कथित तस्करी से शुरू हुआ मामला अब भारत में संभावित स्थानीय अभियोजन की दिशा में आगे बढ़ गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने मणिवन्नन को प्रत्यर्पण कार्यवाही से मुक्त कर दिया है, लेकिन उसके खिलाफ भारत में लंबित या आगे शुरू होने वाली कानूनी कार्यवाही इस आदेश से स्वतः समाप्त नहीं होती।
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