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बृजभूषण के खिलाफ अपील पर सुनवाई टली

Kavita2
26 Sept 2026 5:02 PM IST
बृजभूषण के खिलाफ अपील पर सुनवाई टली
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नई दिल्ली। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को चार महिला पहलवानों की उस अपील पर सुनवाई टाल दी, जिसमें उन्होंने यौन उत्पीड़न मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। मामले की अगली सुनवाई अब 28 सितंबर को होगी। शनिवार को विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह की अनुपलब्धता के कारण मामले पर सुनवाई नहीं हो सकी।

चार महिला पहलवानों ने शुक्रवार को दिल्ली की अदालत का रुख करते हुए अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार के 3 अगस्त 2026 के फैसले को चुनौती दी थी। इसी फैसले में बृजभूषण शरण सिंह और WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को आरोपों से बरी कर दिया गया था। अपील राउज एवेन्यू कोर्ट में विशेष न्यायाधीश के समक्ष दाखिल की गई है।

शनिवार को यह मामला विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए मामले) दिग विनय सिंह की अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। हालांकि, न्यायाधीश के न्यायिक प्रशिक्षण पर होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बाद अदालत ने मामले को सोमवार, 28 सितंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

महिला पहलवानों ने अपनी अपील में बृजभूषण शरण सिंह के साथ ही सह-आरोपी विनोद तोमर को बरी किए जाने को भी चुनौती दी है। तोमर पर एक शिकायतकर्ता से जुड़े मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 506 (भाग-1) के तहत आपराधिक धमकी का आरोप था। निचली अदालत ने उन्हें भी इस आरोप से बरी कर दिया था।

अपील में पहलवानों ने निचली अदालत के फैसले पर कई कानूनी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बरी करने का फैसला कानून की दृष्टि से टिकाऊ नहीं है और रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों का गलत तथा चुनिंदा तरीके से आकलन किया गया। याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया है कि फैसला स्थापित कानूनी सिद्धांतों के बजाय अनुमान और अटकलों पर आधारित है। ये अपीलकर्ताओं के आरोप हैं, जिन पर अब सत्र अदालत विचार करेगी।

अपील में निचली अदालत द्वारा शिकायतकर्ताओं के व्यवहार के आकलन पर भी आपत्ति जताई गई है। महिला पहलवानों का तर्क है कि फैसले के कुछ हिस्सों में यौन उत्पीड़न की पीड़ित महिलाओं के कथित 'अपेक्षित व्यवहार' को लेकर पुराने और रूढ़िवादी मानकों का इस्तेमाल किया गया। अपील में कहा गया है कि शिकायतकर्ताओं की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सबूतों का मूल्यांकन किया जाना चाहिए था।

यह मामला महिला पहलवानों की ओर से बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है। इन आरोपों के बाद वर्ष 2023 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रमुख पहलवानों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने जांच करते हुए जून 2023 में बृजभूषण सिंह और विनोद तोमर के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।

मई 2024 में राउज एवेन्यू कोर्ट ने पांच शिकायतकर्ताओं से जुड़े आरोपों के संबंध में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आरोप तय किए थे, जबकि एक अन्य महिला पहलवान की शिकायत से जुड़े मामले में उन्हें आरोपमुक्त कर दिया गया था। इसके बाद मामले में सुनवाई आगे बढ़ी।

3 अगस्त 2026 को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार की अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354A और 506 (भाग-1) के तहत लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया था। अदालत ने कहा था कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हुआ। विनोद तोमर को भी आपराधिक धमकी के आरोप से बरी कर दिया गया था।

निचली अदालत के इसी फैसले के खिलाफ अब चार महिला पहलवान सत्र अदालत पहुंची हैं। अपील में फैसले के दौरान सबूतों और शिकायतकर्ताओं के बयानों के मूल्यांकन के तरीके को चुनौती दी गई है। फिलहाल सत्र अदालत ने अपील के गुण-दोष पर कोई फैसला नहीं दिया है।

अब 28 सितंबर को मामला दोबारा राउज एवेन्यू कोर्ट के सामने आएगा। उस दिन महिला पहलवानों की ओर से दाखिल अपील पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया होने की संभावना है। इस अपील के जरिए निचली अदालत के 3 अगस्त के फैसले की न्यायिक समीक्षा की मांग की गई है।

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