मानदेय से लेकर पेंशन तक, आशा कर्मचारियों ने सरकार के सामने रखीं 17 मांगें
चंबा। अखिल भारतीय आशा कर्मचारी महासंघ (भामसं संबद्ध) की जिला चंबा इकाई के बैनर तले आशा कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को अपनी लंबित मांगों को लेकर उपायुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा हिमाचल प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजा। प्रतिनिधिमंडल ने आशा कार्यकर्ताओं की मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई करने की मांग उठाई। ज्ञापन में आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं और जच्चा-बच्चा मृत्यु दर को कम करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके बावजूद उन्हें न तो न्यूनतम वेतन मिल रहा है और न ही बुनियादी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं को आज भी निश्चित मानदेय नहीं दिया जा रहा है, जिससे उनमें भारी निराशा व्याप्त है। महासंघ ने अपनी प्रमुख मांगों में सभी श्रेणी की आशा कार्यकर्ताओं, सहयोगिनियों और फैसिलिटेटरों के लिए पदानुसार न्यूनतम 18,000 रुपये से 36,000 रुपये तक मासिक वेतन सुनिश्चित करने की मांग की है।
इसके अलावा आशा योजना में पदोन्नति कैडर बनाने, वार्षिक वेतन वृद्धि लागू करने, समान कार्य के लिए समान वेतन देने तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संविलियन करने की भी मांग की गई है। आशा कार्यकर्ताओं ने सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए ठेका प्रथा और निजी गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को कार्य सौंपने की व्यवस्था समाप्त करने की मांग की। साथ ही उन्हें कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) के दायरे में शामिल करने, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन देने, कार्य के दौरान दुर्घटना या मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये का मुआवजा तथा सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये का एकमुश्त लाभ प्रदान करने की मांग की। इसके अतिरिक्त प्रतिनिधिमंडल ने टीकाकरण संबंधी नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था, आयु सीमा में छूट देकर एएनएम पद पर पदोन्नति का अवसर, वर्ष में दो बार नि:शुल्क यूनिफॉर्म एवं धुलाई भत्ता, अस्पतालों में विश्राम गृह की सुविधा तथा यात्रा भत्ता उपलब्ध कराने सहित अपनी 17 सूत्रीय मांगों को शीघ्र पूरा करने का आग्रह किया।