BIHAR बिहार। मोकामा विधानसभा क्षेत्र में हाल ही में हुई हिंसक घटना के बाद चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने निर्वाचन प्रक्रिया में लापरवाही बरतने और कर्तव्य में शिथिलता दिखाने वाले कई प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ स्थानांतरण (transfer) और अनुशासनात्मक कार्रवाई (disciplinary action) के आदेश जारी किए हैं। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई उस रिपोर्ट के बाद की गई जिसमें पाया गया कि मोकामा में हुई घटना के दौरान स्थानीय अधिकारियों ने समय रहते उचित कदम नहीं उठाए। चुनाव आयोग ने कहा है कि ऐसी घटनाएं निर्वाचन की निष्पक्षता और शांति व्यवस्था को प्रभावित करती हैं, इसलिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई आवश्यक है।   
आयोग ने मोकामा विधानसभा क्षेत्र में तैनात उप जिला अधिकारी (SDO) और थाना प्रभारी (SHO) को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्देश दिया है। साथ ही, मोकामा के एसडीपीओ और कुछ वरिष्ठ पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के आदेश दिए गए हैं। पटना जिला प्रशासन के कुछ अधिकारियों को भी आयोग ने चेतावनी जारी की है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि आचार संहिता के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसक घटना, धमकी या भय फैलाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आयोग ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि आगामी चुनावी प्रक्रिया में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएं।  
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले मोकामा विधानसभा क्षेत्र में गोलीबारी की घटना में दुलारचंद यादव नामक व्यक्ति की मौत हो गई थी। यह घटना चुनावी माहौल में हुई, जिससे पूरे बिहार में राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी। विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस और राजद ने राज्य सरकार पर “कानून-व्यवस्था की विफलता” का आरोप लगाया था। चुनाव आयोग की इस कार्रवाई को राज्य प्रशासन के लिए एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। आयोग ने कहा कि किसी भी अधिकारी को निष्पक्ष चुनावी माहौल को प्रभावित करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। “हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिहार में मतदान प्रक्रिया भयमुक्त, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो,” आयोग ने अपने बयान में कहा।  
कांग्रेस और महागठबंधन के नेताओं ने चुनाव आयोग की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि “अब समय आ गया है जब प्रशासनिक लापरवाही पर सख्त कदम उठाए जाएं।” वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार पहले से ही इस मामले की जांच कर रही थी और आयोग की कार्रवाई से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। फिलहाल आयोग की टीम ने स्थानीय प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और यह भी संकेत दिया है कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ निलंबन तक की कार्रवाई की जा सकती है।
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