श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षा बलों के अभियान के दौरान पाकिस्तान आधारित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के मारे जाने की पुष्टि हुई है। बुधवार सुबह पलमैदान इलाके में तलाशी अभियान के दौरान उसका शव बरामद किया गया। सुरक्षा बलों को उसके पास से युद्ध में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी मिली है। श्रीनगर स्थित चिनार कॉर्प्स ने हाशिम मूसा की पहचान पाकिस्तान आधारित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी के रूप में की है।
इस बीच सुरक्षा सूत्रों के हवाले से हाशिम मूसा के अतीत को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। सूत्रों का दावा है कि मोहम्मद आसिफ पाकिस्तान सेना में हवलदार के पद तक सेवा दे चुका था और उसने पाकिस्तान की स्पेशल सर्विसेज ग्रुप यानी SSG के साथ भी काम किया था। उसके सैन्य रिकॉर्ड से जुड़ी इन जानकारियों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
सूत्रों के अनुसार मोहम्मद आसिफ का जन्म 7 मार्च 1980 को हुआ था। दावा किया गया है कि उसने साल 2000 में सर्विस नंबर PA-3106947 के तहत पाकिस्तान सेना में प्रवेश किया था। बाद में वह हवलदार पद से रिटायर हुआ। सुरक्षा एजेंसियां उसके कथित सैन्य प्रशिक्षण और जम्मू-कश्मीर में उसकी गतिविधियों के बीच संबंधों की भी जांच करती रही थीं।
जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान सेना में सेवा के दौरान हाशिम मूसा को कई तरह की विशेष जिम्मेदारियों और प्रशिक्षण से जोड़ा गया था। सूत्रों का दावा है कि उसने उग्रवाद-विरोधी अभियानों में काम किया था और VVIP सुरक्षा ड्यूटी में भी तैनात रहा था। इसके अलावा उसे विशेष हथियारों को चलाने और सैन्य अभियानों से जुड़ी तकनीकों का प्रशिक्षण मिला था। इन्हीं वजहों से सुरक्षा एजेंसियां उसे एक सामान्य घुसपैठिए के बजाय सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त लश्कर ऑपरेटिव के रूप में देख रही थीं।
बडगाम में जिस अभियान के दौरान हाशिम मूसा मारा गया, उसकी शुरुआत विशेष खुफिया जानकारी मिलने के बाद की गई थी। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने यूसमर्ग के कोराग क्षेत्र में तलाशी अभियान शुरू किया था। मंगलवार को अभियान के दौरान संदिग्ध गतिविधि देखे जाने के बाद सुरक्षा बलों ने चुनौती दी, जिसके बाद गोलीबारी शुरू हो गई। दोनों तरफ से हुई फायरिंग के दौरान एक आतंकी मारा गया।
इसके बाद बुधवार सुबह पलमैदान के सामान्य क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया गया। इसी दौरान मारे गए आतंकी का शव मिला और उसकी पहचान मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के रूप में हुई। उसके पास से युद्ध जैसी परिस्थितियों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद किए जाने की जानकारी भी सेना ने दी। इलाके में तलाशी अभियान आगे भी जारी रखा गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वहां किसी अन्य आतंकी की मौजूदगी या छिपाई गई सामग्री तो नहीं है।
हाशिम मूसा पिछले कुछ समय से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था। उसे जम्मू-कश्मीर में सक्रिय पाकिस्तान आधारित लश्कर नेटवर्क से जोड़ा जाता रहा था। उसके बारे में सुरक्षा एजेंसियों को शक था कि वह कठिन पहाड़ी और जंगल वाले क्षेत्रों में लंबे समय तक सक्रिय रहने की क्षमता रखता है। उसके कथित सैन्य प्रशिक्षण को भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
सुरक्षा एजेंसियों ने हाशिम मूसा के कथित पाकिस्तान सेना संबंधों को लेकर भी जानकारी जुटाई थी। सूत्रों का दावा है कि वह SSG से जुड़ी ट्रेनिंग और सैन्य पृष्ठभूमि के कारण हथियारों के इस्तेमाल, जंगल में मूवमेंट और सुरक्षा बलों से बचने की रणनीति में प्रशिक्षित था। हालांकि पाकिस्तान सेना से उसके पूरे सेवा रिकॉर्ड की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है, इसलिए इन विवरणों को फिलहाल सुरक्षा सूत्रों के दावे के रूप में ही देखा जा रहा है।
हाशिम मूसा का नाम अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की जांच में भी सामने आया था। सुरक्षा एजेंसियां उसकी कथित भूमिका की जांच कर रही थीं और वह लंबे समय से वांछित आतंकियों में शामिल था। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उसके बारे में सूचना देने वाले के लिए इनाम भी घोषित किया था।
सुरक्षा बलों के लिए हाशिम मूसा की तलाश इसलिए भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई थी क्योंकि वह पीर पंजाल क्षेत्र और कश्मीर घाटी के कठिन जंगल वाले इलाकों में गतिविधियां बदलता रहता था। ऐसे इलाकों में घने जंगल और दुर्गम पहाड़ी रास्ते तलाशी अभियानों को मुश्किल बनाते हैं। हाल के दिनों में उसके खिलाफ अभियान और तेज किया गया था।
बडगाम अभियान में उसके मारे जाने के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान उसके नेटवर्क और संपर्कों पर है। बरामद सामग्री की जांच से यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि वह किन लोगों के संपर्क में था और उसे स्थानीय स्तर पर किसी तरह की मदद मिल रही थी या नहीं।
हाशिम मूसा के कथित सैन्य रिकॉर्ड ने इस मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है। अगर सुरक्षा सूत्रों द्वारा बताए गए पाकिस्तान सेना और SSG संबंधों की औपचारिक पुष्टि होती है, तो यह उसके प्रशिक्षण और जम्मू-कश्मीर में उसकी भूमिका को समझने में अहम कड़ी हो सकती है। फिलहाल सेना ने उसकी पहचान लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े पाकिस्तान आधारित आतंकी के रूप में की है और बडगाम क्षेत्र में अभियान जारी रखा गया है।