शिमला। नियमितीकरण का इंतजार कर रहे हजारों कर्मचारियों को हिमाचल प्रदेश सरकार ने बड़ी राहत दी है। अब मार्च और सितंबर के अंतिम दिनों में नियुक्ति प्रस्ताव पाने और क्रमशः 1 अप्रैल तथा 1 अक्टूबर को कार्यभार ग्रहण करने वाले कर्मचारियों को नियमितीकरण की कटऑफ में छह महीने का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। कार्मिक विभाग ने इस संबंध में नए आदेश जारी कर दिए हैं।

कार्मिक विभाग के सचिव आशीष सिंहमार की ओर से जारी आदेश में सभी प्रशासनिक सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि नई व्यवस्था का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। इस फैसले से उन कर्मचारियों को राहत मिलेगी जिनकी नियुक्ति प्रक्रिया महीने के अंतिम दिनों में पूरी होती थी, लेकिन ज्वाइनिंग अगले महीने के पहले दिन होने के कारण उनकी नियमितीकरण अवधि की गणना में छह महीने का अंतर पड़ जाता था।

पहले व्यवस्था यह थी कि यदि किसी कर्मचारी को मार्च के अंतिम दिनों में नियुक्ति पत्र जारी हुआ और उसने 1 अप्रैल को ज्वाइन किया तो नियमितीकरण के लिए उसकी कटऑफ अप्रैल से मानी जाती थी। इसी तरह सितंबर के अंतिम दिनों में नियुक्ति पत्र जारी होने और 1 अक्टूबर को ज्वाइनिंग करने वाले कर्मचारियों की कटऑफ अक्टूबर से मानी जाती थी।

इस व्यवस्था का सीधा असर नियमितीकरण की समयसीमा पर पड़ता था। कर्मचारियों को अगली कटऑफ तक इंतजार करना पड़ता था, जिससे उनकी सेवा अवधि की गणना में करीब छह महीने का नुकसान हो जाता था।

सरकार के नए आदेश के बाद अब ऐसी स्थिति में कर्मचारियों को केवल ज्वाइनिंग की तारीख के आधार पर नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। नियुक्ति प्रस्ताव जारी होने और कार्यभार संभालने के बीच यदि केवल कुछ दिनों का अंतर है तो नियमितीकरण के लिए उस अवधि को नई व्यवस्था के अनुसार माना जाएगा।

इस फैसले से सबसे ज्यादा लाभ उन कर्मचारियों को होगा जिनकी नियुक्ति मार्च और सितंबर के अंतिम सप्ताह में होती रही है। सरकारी विभागों में कई बार नियुक्ति आदेश महीने के आखिरी दिनों में जारी होते हैं और औपचारिकताएं पूरी करते-करते कर्मचारी अगले महीने की पहली तारीख को कार्यभार संभालते हैं।

ऐसे मामलों में पहले तकनीकी तौर पर कर्मचारी अगली छमाही की कटऑफ में चले जाते थे। इससे उन्हें नियमितीकरण के लिए अतिरिक्त छह महीने इंतजार करना पड़ता था।

कर्मचारियों की ओर से लंबे समय से इस व्यवस्था में बदलाव की मांग की जा रही थी। उनका कहना था कि नियुक्ति पत्र मिलने के तुरंत बाद ज्वाइनिंग करने के बावजूद केवल तारीख के अंतर के कारण उन्हें नियमितीकरण में नुकसान उठाना पड़ता है।

अब कार्मिक विभाग ने इस समस्या को दूर करने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों से कहा है कि आदेशों को अधीनस्थ कार्यालयों तक पहुंचाया जाए और नियमितीकरण के मामलों में किसी कर्मचारी को अनावश्यक नुकसान न होने दिया जाए।

सरकार के इस फैसले का असर अलग-अलग विभागों में कार्यरत अनुबंध, अस्थायी या अन्य श्रेणी के उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जिनका नियमितीकरण निर्धारित सेवा अवधि पूरी होने के बाद किया जाता है।

सरकारी सेवा में नियमितीकरण कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसके बाद उन्हें सेवा से जुड़े कई स्थायी लाभ मिलने लगते हैं। इसलिए छह महीने की देरी भी कर्मचारियों के वेतन, वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभों पर प्रभाव डाल सकती है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद विभागों को पुराने मामलों की समीक्षा भी करनी पड़ सकती है, खासकर उन कर्मचारियों के मामलों में जहां नियुक्ति और ज्वाइनिंग की तारीख के बीच केवल कुछ दिनों का अंतर रहा हो।

हालांकि आदेश का लाभ किन-किन पुराने मामलों में लागू होगा, यह संबंधित विभागों की प्रक्रिया और नियमों के अनुसार स्पष्ट किया जाएगा।

कार्मिक विभाग ने प्रशासनिक सचिवों को निर्देश दिया है कि नियमितीकरण के मामलों में किसी तरह की अलग-अलग व्याख्या न हो। सभी विभागों में एक समान व्यवस्था लागू करना सरकार की प्राथमिकता बताई जा रही है।

पहले कर्मचारियों की शिकायत थी कि मार्च के अंतिम दिनों में नियुक्ति मिलने के बावजूद यदि वे 1 अप्रैल को ज्वाइन करते हैं तो उन्हें अप्रैल वाली कटऑफ में रखा जाता है। इसी तरह सितंबर के अंतिम दिनों में नियुक्ति मिलने और 1 अक्टूबर को ज्वाइन करने वाले कर्मचारियों को अक्टूबर वाली कटऑफ का सामना करना पड़ता था।

इस तकनीकी व्यवस्था के कारण सेवा अवधि की गणना में वास्तविक नियुक्ति समय का पूरा लाभ नहीं मिल पाता था।

नई व्यवस्था से कर्मचारियों को राहत मिलने के साथ-साथ विभागीय स्तर पर भी नियमितीकरण प्रक्रिया अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।

सरकार का यह निर्णय कर्मचारी संगठनों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नियमितीकरण की समयसीमा और कटऑफ लंबे समय से प्रमुख मांगों में शामिल रही है।

इससे उन कर्मचारियों में भी उम्मीद बढ़ी है जो लंबे समय से नियमित होने का इंतजार कर रहे हैं और नियुक्ति की तारीख के कारण उनकी सेवा गणना प्रभावित हुई थी।

कार्मिक विभाग अब यह सुनिश्चित करेगा कि सभी विभाग इस आदेश का एक समान तरीके से पालन करें और किसी भी कर्मचारी के साथ कटऑफ को लेकर अलग व्यवहार न हो।

सरकार के इस फैसले से नियमितीकरण के लिए पात्र कर्मचारियों को छह महीने तक अतिरिक्त इंतजार करने की मजबूरी से राहत मिलेगी।

फिलहाल नए आदेश जारी होने के बाद प्रशासनिक विभागों को संबंधित कर्मचारियों के रिकॉर्ड की जांच कर नई व्यवस्था के अनुसार कार्रवाई करनी होगी।

हिमाचल सरकार का यह कदम उन हजारों कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है जो केवल नियुक्ति पत्र और ज्वाइनिंग की तारीख के अंतर के कारण नियमितीकरण में पिछड़ जाते थे। अब मार्च के अंतिम दिनों में नियुक्ति और 1 अप्रैल की ज्वाइनिंग या सितंबर के अंतिम दिनों में नियुक्ति और 1 अक्टूबर की ज्वाइनिंग की स्थिति में कर्मचारियों को छह महीने का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।

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