रेवेनशॉ यूनिवर्सिटी ने रैगिंग के आरोपों को किया खारिज, ऑनलाइन गेम को लेकर हुआ था विवाद
कटक। ओडिशा के कटक स्थित रेवेनशॉ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जगन्नाथ हॉस्टल में एक छात्र के साथ रैगिंग किए जाने के आरोपों को खारिज कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि अंडरग्रेजुएट यानी UG के दूसरे वर्ष के एक छात्र और तीसरे वर्ष के कुछ छात्रों के बीच ऑनलाइन मोबाइल गेम को लेकर गलतफहमी हुई थी। मामले को बातचीत के जरिए सुलझा लिया गया है और इसे रैगिंग की घटना के रूप में देखना सही नहीं होगा।
रेवेनशॉ यूनिवर्सिटी के चीफ वार्डन पूर्णेंदु परिधि ने बुधवार को मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के एक हॉस्टल में UG के दूसरे वर्ष के छात्र और उसके कुछ सीनियर छात्रों के बीच ऑनलाइन मोबाइल गेम से जुड़ी गलतफहमी पैदा हुई थी। बाद में दोनों पक्षों से बातचीत की गई और विवाद को सुलझा लिया गया।
यूनिवर्सिटी प्रशासन के मुताबिक यह घटना कुछ दिन पहले जगन्नाथ हॉस्टल में हुई थी। शुरुआती तौर पर इसे सीनियर छात्रों द्वारा जूनियर छात्र के साथ रैगिंग किए जाने के आरोप से जोड़कर देखा गया, जिसके बाद विश्वविद्यालय स्तर पर मामले की जानकारी ली गई।
प्रशासन ने छात्र और अन्य संबंधित विद्यार्थियों से बातचीत की। इसके बाद अधिकारियों ने कहा कि घटना की वजह ऑनलाइन मोबाइल गेम से जुड़ी आपसी गलतफहमी थी और इसमें रैगिंग जैसा कोई मामला सामने नहीं आया।
चीफ वार्डन ने कहा कि हॉस्टल प्रशासन छात्रों के बीच किसी भी तरह के विवाद को गंभीरता से लेता है। जैसे ही इस मामले की जानकारी मिली, अधिकारियों ने संबंधित छात्रों से संपर्क किया और उनकी बात सुनी।
अधिकारियों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हो गया। छात्र भी विश्वविद्यालय की ओर से की गई पहल से सहमत बताए जा रहे हैं।
रैगिंग के आरोप सामने आने के कारण यह मामला विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा का विषय बन गया था। छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच भी इस बात को लेकर चिंता थी कि क्या हॉस्टल के भीतर किसी जूनियर विद्यार्थी के साथ दुर्व्यवहार किया गया था।
हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने साफ कर दिया है कि उसकी प्रारंभिक जांच और संबंधित छात्रों से हुई बातचीत में रैगिंग की पुष्टि नहीं हुई है।
विश्वविद्यालय अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन गेम खेलते समय कुछ बातों को लेकर दूसरे और तीसरे वर्ष के छात्रों के बीच विवाद पैदा हुआ था। बाद में गलतफहमी बढ़ी और इसी वजह से मामला गंभीर दिखाई देने लगा।
प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद विद्यार्थियों को बुलाकर बातचीत की गई। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद विवाद को खत्म कराया गया।
विश्वविद्यालय की ओर से हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को आपसी मतभेद शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने और किसी भी परेशानी की स्थिति में वार्डन या संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने को कहा गया है।
हॉस्टल में अलग-अलग वर्षों और पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी एक साथ रहते हैं। ऐसे में विद्यार्थियों के बीच छोटे-मोटे विवाद या मतभेद हो सकते हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि किसी भी घटना को बढ़ने से पहले नियंत्रित किया जाए।
रैगिंग से जुड़े आरोपों को गंभीर माना जाता है, इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी इस मामले में तुरंत स्थिति स्पष्ट की। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी छात्र के साथ वास्तव में रैगिंग या उत्पीड़न की घटना सामने आती है तो विश्वविद्यालय नियमों के अनुसार कार्रवाई करेगा।
फिलहाल जगन्नाथ हॉस्टल की इस घटना में प्रशासन को ऐसा कोई तथ्य नहीं मिला है जिससे इसे रैगिंग का मामला माना जाए।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि हॉस्टल परिसर में अनुशासन बनाए रखने के लिए वार्डन और अन्य कर्मचारी लगातार निगरानी करते हैं। छात्रों की किसी भी शिकायत को दर्ज कर उसका समाधान करने की व्यवस्था भी उपलब्ध है।
घटना सामने आने के बाद संबंधित छात्र की सुरक्षा और स्थिति को लेकर भी जानकारी ली गई। प्रशासन ने विद्यार्थियों से कहा कि वे किसी भी प्रकार के दबाव या असुविधा की स्थिति में सीधे अधिकारियों को सूचित करें।
रैगिंग के मामलों को रोकने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में एंटी-रैगिंग नियम लागू हैं। ऐसे आरोप मिलने पर संस्थानों को जांच करनी होती है और शिकायत सही पाए जाने की स्थिति में दोषी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
यही कारण है कि रेवेनशॉ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भी शुरुआती जानकारी सामने आने के बाद छात्रों से बातचीत की और पूरे घटनाक्रम को समझने की कोशिश की।
चीफ वार्डन पूर्णेंदु परिधि के अनुसार विवाद का मूल कारण ऑनलाइन मोबाइल गेम था। खेल के दौरान किसी बात को लेकर छात्रों के बीच गलतफहमी हुई, जो बाद में विवाद में बदल गई।
हालांकि प्रशासन ने यह नहीं बताया कि ऑनलाइन गेम को लेकर विवाद किस बात पर शुरू हुआ था और दोनों पक्षों के बीच किस प्रकार की बातचीत हुई थी।
विश्वविद्यालय की ओर से इतना जरूर कहा गया है कि मामला अब सुलझा लिया गया है और संबंधित छात्र सामान्य स्थिति में हैं।
प्रशासन का फोकस अब हॉस्टल में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने और भविष्य में ऐसी गलतफहमियों को बढ़ने से रोकने पर है।
छात्रों को भी सलाह दी गई है कि किसी विवाद की स्थिति में आपस में झगड़ा बढ़ाने के बजाय तत्काल हॉस्टल प्रशासन को इसकी जानकारी दें।
रेवेनशॉ यूनिवर्सिटी के जगन्नाथ हॉस्टल से जुड़े इस मामले में फिलहाल रैगिंग के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। विश्वविद्यालय का आधिकारिक पक्ष यही है कि यह दूसरे और तीसरे वर्ष के छात्रों के बीच ऑनलाइन गेम को लेकर पैदा हुई गलतफहमी थी, जिसे बातचीत के जरिए खत्म कर दिया गया।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन मामले को समाप्त मान रहा है, हालांकि हॉस्टल में अनुशासन और छात्रों के व्यवहार पर निगरानी जारी रखने की बात कही गई है।