इंदौर। शहर में दूध खरीदने वाले उपभोक्ताओं की जेब पर 1 अक्टूबर से अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है। इंदौर में दूध की खुदरा कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी तय की गई है। नई दर लागू होने के बाद डेयरी और खुदरा दुकानों पर दूध 68 रुपये प्रति लीटर मिलेगा। मौजूदा समय में यही दूध 65 रुपये प्रति लीटर के आसपास बिक रहा है।

नई कीमतें दूध में मौजूद फैट की मात्रा के आधार पर तय की गई हैं। 5.5 से 6 प्रतिशत फैट वाले दूध के लिए 68 रुपये प्रति लीटर की नई दर लागू होगी। वहीं घर तक दूध पहुंचाने यानी होम डिलीवरी की सुविधा लेने वाले ग्राहकों को इसके लिए अलग से शुल्क देना होगा।

दूध की कीमत बढ़ाने के पीछे मुख्य वजह दूध उत्पादक किसानों को अधिक भुगतान किया जाना बताया जा रहा है। उत्पादन लागत बढ़ने और पशुपालकों को बेहतर दर देने के बाद स्थानीय स्तर पर दूध की खुदरा कीमतों में बदलाव का फैसला लिया गया है।

इंदौर में दूध की खपत बड़े स्तर पर होती है। शहर के हजारों परिवार रोजाना दूध खरीदते हैं। ऐसे में प्रति लीटर 3 रुपये की बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ेगा।

यदि कोई परिवार प्रतिदिन दो लीटर दूध खरीदता है तो उसे हर दिन 6 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। महीने के हिसाब से यह अतिरिक्त खर्च करीब 180 रुपये तक पहुंच सकता है। बड़ी मात्रा में दूध खरीदने वाले परिवारों और कारोबारियों पर इसका असर और अधिक होगा।

दूध के दाम बढ़ने का असर केवल घरों तक सीमित नहीं रह सकता। चाय दुकानों, मिठाई की दुकानों, होटल, रेस्टोरेंट, कैफे और डेयरी उत्पाद बनाने वाले छोटे कारोबारियों की लागत भी बढ़ सकती है।

हालांकि इन कारोबारियों की ओर से कीमतों में किसी तरह की बढ़ोतरी का फैसला अलग-अलग स्तर पर लिया जाएगा। दूध महंगा होने के बाद चाय, मिठाई, पनीर, दही और अन्य डेयरी उत्पादों की लागत पर भी दबाव बढ़ सकता है।

नई व्यवस्था में फैट की मात्रा को कीमत तय करने का मुख्य आधार बनाया गया है। 5.5 से 6 प्रतिशत फैट वाला दूध सामान्य तौर पर अधिक गुणवत्ता और पोषण वाले दूध की श्रेणी में माना जाता है। इसी श्रेणी के दूध की नई कीमत 68 रुपये प्रति लीटर तय की गई है।

इंदौर में कई उपभोक्ता स्थानीय डेयरी और दूध विक्रेताओं से सीधे दूध खरीदते हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोगों के घरों तक रोजाना दूध की सप्लाई की जाती है। होम डिलीवरी करने वाले विक्रेताओं को परिवहन और वितरण पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। इसी वजह से होम डिलीवरी का चार्ज अलग से लेने की व्यवस्था रखी गई है।

दूध की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया भी सामने आ सकती है। त्योहारों के समय दूध और इससे बनने वाले उत्पादों की मांग बढ़ती है। ऐसे में अक्टूबर की शुरुआत से बढ़ी हुई कीमत लागू होने के कारण त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं का खर्च और बढ़ सकता है।

दूसरी ओर दूध उत्पादक किसानों के लिए बढ़ी हुई खरीद कीमत राहत का कारण बन सकती है। पशुपालन में चारा, पशु आहार, दवाइयां और परिवहन जैसे खर्च लगातार बढ़ते रहते हैं। ऐसे में किसानों की ओर से लंबे समय से बेहतर कीमत की मांग की जाती रही है।

दूध की खुदरा कीमत बढ़ने से उत्पादकों को मिलने वाले भुगतान और बाजार मूल्य के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। हालांकि उपभोक्ताओं के लिए यह बदलाव रोजमर्रा के खर्च में सीधी बढ़ोतरी के रूप में दिखाई देगा।

शहर में अलग-अलग डेयरी और दूध विक्रेताओं द्वारा गुणवत्ता तथा फैट के अनुसार दूध बेचा जाता है। इसलिए सभी प्रकार के दूध की कीमत एक जैसी होना जरूरी नहीं है। फिलहाल घोषित नई दर 5.5 से 6 प्रतिशत फैट वाले दूध के लिए तय की गई है।

नई कीमत लागू होने के बाद ग्राहकों को दूध खरीदते समय उसकी फैट मात्रा और विक्रेता द्वारा तय दर की जानकारी लेने की जरूरत होगी। होम डिलीवरी लेने वाले उपभोक्ताओं को यह भी देखना होगा कि उनसे वितरण के लिए कितना अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है।

दूध रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल है और बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक बड़ी संख्या में लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। इसलिए दूध के दाम में मामूली दिखने वाली बढ़ोतरी भी लंबे समय में घरेलू खर्च पर असर डालती है।

शहर में पहले से ही सब्जी, अनाज, तेल और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में समय-समय पर बदलाव होता रहता है। अब दूध की कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी ने आम परिवारों के मासिक खर्च में एक और मद जोड़ दी है।

दूध के बढ़े दाम छोटे दुकानदारों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। चाय और दूध आधारित पेय बेचने वाले कारोबारी रोजाना कई लीटर दूध इस्तेमाल करते हैं। यदि उनकी लागत लगातार बढ़ती है तो उन्हें अपनी कीमतों की समीक्षा करनी पड़ सकती है।

मिठाई कारोबारियों के लिए भी दूध सबसे महत्वपूर्ण कच्चे माल में से एक है। त्योहारों के दौरान दूध, खोवा और पनीर की मांग बढ़ती है। ऐसे में नई दर का असर उत्पादन लागत पर पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।

फिलहाल इंदौर में 1 अक्टूबर से नई दूध दर लागू होने की तैयारी है। ग्राहकों को डेयरी और खुदरा दुकानों पर 5.5 से 6 प्रतिशत फैट वाला दूध 68 रुपये प्रति लीटर मिलेगा।

मौजूदा दर के मुकाबले यह 3 रुपये प्रति लीटर ज्यादा है। वहीं घर पर दूध मंगाने वाले ग्राहकों को डिलीवरी शुल्क भी अलग से देना होगा।

इस बढ़ोतरी से एक ओर दूध उत्पादक किसानों को बेहतर भुगतान मिलने की उम्मीद है, तो दूसरी ओर शहर के उपभोक्ताओं को रोजाना दूध के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।

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