Shimla. शिमला। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड ने अपनी भुगतान प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए सभी कार्यालयों में केंद्रीकृत भुगतान प्रणाली लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब अधिकांश भुगतान सीधे वित्त एवं लेखा (एफ एंड ए) विंग के माध्यम से किए जाएंगे और इसके लिए पहले की तरह ड्रॉइंग लिमिट जारी करने की आवश्यकता नहीं होगी। बोर्ड प्रबंधन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अप्रैल, 2026 से एसएपी ईआरपी प्रणाली में नई पेमेंट यूटिलिटी शुरू कर दी गई है। इसका उद्देश्य भुगतान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और पूरी तरह डिजिटल बनाना है। इस संबंध में सभी मुख्य अभियंताओं, अधीक्षण अभियंताओं, डीडीओ और अन्य अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
नई व्यवस्था के तहत जिन मामलों में खरीद आदेश पहले से एसएपी ईआरपी में दर्ज हैं, उनके भुगतान सीधे केंद्रीकृत पेमेंट यूटिलिटी के माध्यम से होंगे। आउटसोर्स कर्मचारियों के मासिक बिलों का भुगतान भी इसी प्रणाली से किया जाएगा। ऐसे मामलों में किसी प्रकार की ड्राइंग लिमिट जारी नहीं की जाएगी। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन फर्मों और ठेकेदारों के मामलों में खरीद आदेश बनाना संभव नहीं है, उनके बिल हैंड रिसिप्ट यूटिलिटी के माध्यम से संसाधित किए जाएंगे। इन भुगतानों का निपटारा भी सीधे एफ एंड ए विंग द्वारा किया जाएगा। आदेशों के तहत कर्मचारियों को अपने हैंड रिसिप्ट दावे और संबंधित दस्तावेज कर्मचारी पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। संबंधित कार्यालय दावों की जांच करेगा और स्वीकृति मिलने के बाद भुगतान सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में भेज दिया जाएगा। बोर्ड ने कुछ विशेष वित्तीय मदों के लिए पुरानी व्यवस्था फिलहाल जारी रखने का निर्णय लिया है। इन मामलों में सीमित रूप से ड्रॉइंग लिमिट जारी की जाएगी। जब तक नई प्रणाली में सभी सुविधाएं शामिल नहीं हो जातीं।