बांगांव। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बांगांव उपमंडल अस्पताल में एक बुजुर्ग महिला की मौत का मामला सामने आया है। परिवार का आरोप है कि आधार कार्ड नहीं होने के कारण अस्पताल में महिला को भर्ती नहीं किया गया और इलाज शुरू नहीं हुआ। इसके बाद जब वह आधार कार्ड लेने के लिए घर लौट रही थीं, तभी अस्पताल के बाहर गिर गईं और उनकी मौत हो गई।

घटना सोमवार शाम की बताई जा रही है। मृतका की पहचान 60 वर्षीय रेनू सरकार के रूप में हुई है। वह पेट्रापोल थाना क्षेत्र के कल्याणी खेड़ापारा इलाके में रहती थीं।

सीने में दर्द के बाद अस्पताल लाई गईं थीं रेनू

परिजनों के अनुसार, रेनू सरकार पिछले कुछ दिनों से सीने में दर्द से परेशान थीं। घर पर वह निजी डॉक्टर की सलाह से दवाइयां ले रही थीं। दवा लेने के बाद कुछ समय के लिए राहत मिलती थी, लेकिन बाद में दर्द फिर बढ़ जाता था।

सोमवार दोपहर के बाद उनकी हालत ज्यादा बिगड़ने लगी। इसकी जानकारी मिलने पर उनकी बहन सरस्वती सरकार उनसे मिलने पहुंचीं। बहन की स्थिति देखकर वह शाम को रेनू को लेकर बांगांव उपमंडल अस्पताल पहुंचीं।

भर्ती प्रक्रिया में आधार कार्ड मांगे जाने का आरोप

परिवार के मुताबिक, अस्पताल में डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के बाद रेनू को भर्ती करने की सलाह दी थी। उन्हें बेड पर ले जाने के लिए भी कहा गया।

आरोप है कि भर्ती से संबंधित कागजी प्रक्रिया के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने आधार कार्ड मांगा। परिवार का कहना है कि रेनू अपना आधार कार्ड घर पर भूल गई थीं।

सरस्वती सरकार ने डॉक्टरों से अनुरोध किया कि पहले इलाज शुरू कर दिया जाए और वह घर जाकर आधार कार्ड ले आएंगी। लेकिन परिवार का आरोप है कि बिना आधार कार्ड के भर्ती करने से मना कर दिया गया।

अस्पताल गेट पर बिगड़ी तबीयत

परिवार के अनुसार, तेज सीने के दर्द के बावजूद रेनू अपनी बहन के साथ आधार कार्ड लेने के लिए अस्पताल से बाहर निकल गईं।

इसी दौरान अस्पताल के गेट के पास अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। चक्कर आने के बाद वह सड़क पर गिर पड़ीं। कुछ देर बाद परिजन उन्हें दोबारा अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्था और मरीजों के इलाज को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

डॉक्टर ने कहा जांच के बाद पता चलेगा कारण

अस्पताल के आपातकालीन विभाग में तैनात डॉक्टर गौरी मंडल ने बताया कि बुजुर्ग महिला को भर्ती करने का निर्णय लिया गया था और उन्हें बेड पर भेजा गया था।

उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि महिला को भर्ती क्यों नहीं किया गया। डॉक्टर ने यह भी बताया कि नियमों के अनुसार आधार कार्ड उपलब्ध नहीं होने पर भी मरीज का इलाज शुरू किया जा सकता है और दस्तावेज बाद में जमा किए जा सकते हैं।

उन्होंने मामले की जांच किए जाने की बात कही।

अस्पताल प्रशासन पर उठे सवाल

अस्पताल अधीक्षक कृष्णचंद्र बराई बीमारी के कारण छुट्टी पर बताए गए हैं। मामले को लेकर उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।

वहीं अस्पताल के अन्य अधिकारियों ने भी इस मामले पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलते ही बांगांव पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है।

जांच का मुख्य बिंदु यह है कि क्या महिला को वास्तव में आधार कार्ड नहीं होने के कारण भर्ती नहीं किया गया और क्या इलाज में देरी हुई।

परिवार ने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं अस्पताल प्रशासन भी अब पूरे घटनाक्रम की जांच की बात कह रहा है।

यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में मरीजों की प्राथमिकता और दस्तावेजी प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर बहस का विषय बन गई है।

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