कोलकाता। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा 2026 को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने कई बड़े फैसले किए हैं। सबसे ज्यादा चर्चा **महाष्टमी के दिन शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध** लगाने के फैसले की हो रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अष्टमी के दिन राज्य में किसी भी शराब की दुकान, होटल, रेस्तरां या बार में शराब बेचने या परोसने की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही दुर्गा पूजा और प्रतिमा विसर्जन के दौरान DJ बजाने पर भी रोक लगाने का फैसला किया गया है।
हालांकि इसे पूरे राज्य में स्थायी शराबबंदी नहीं समझना चाहिए। फिलहाल सरकार ने **महाष्टमी के दिन एक दिन की पूर्ण शराबबंदी** का ऐलान किया है। इससे पहले सरकार स्कूलों, कॉलेजों और धार्मिक स्थलों के एक किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानों को अनुमति नहीं देने की नीति भी घोषित कर चुकी है।
अष्टमी के दिन नहीं मिलेगी शराब
सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक दुर्गा पूजा की महाष्टमी के दिन पूरे राज्य में शराब की बिक्री बंद रहेगी। इस दिन शराब की दुकानें नहीं खुलेंगी और होटल, रेस्तरां तथा बार भी शराब नहीं परोस सकेंगे।
सरकार ने इस फैसले के पीछे महाष्टमी के धार्मिक महत्व और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा पुष्पांजलि अर्पित किए जाने का हवाला दिया है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आबकारी विभाग कानूनी कार्रवाई करेगा।
पूजा से विसर्जन तक DJ पर पाबंदी
दुर्गा पूजा को लेकर जारी नए दिशा-निर्देश सिर्फ शराब की बिक्री तक सीमित नहीं हैं। सरकार ने पूजा के दौरान DJ के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रतिमा विसर्जन के दौरान भी DJ बजाने की अनुमति नहीं होगी। सरकार का फोकस त्योहार के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने, ध्वनि प्रदूषण नियंत्रित करने और लोगों को परेशानी से बचाने पर है।
हर पूजा समिति को एक लाख रुपये
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दुर्गा पूजा समितियों के लिए आर्थिक सहायता की भी घोषणा की है। राज्य की प्रत्येक पात्र दुर्गा पूजा समिति को **एक लाख रुपये** की वित्तीय मदद देने की बात कही गई है।
हालांकि मुख्यमंत्री ने बड़े बजट वाली पूजा समितियों से अपील की है कि अगर उनके पास पर्याप्त संसाधन हैं तो वे सरकारी सहायता न लें। इससे सीमित सरकारी संसाधनों का ज्यादा लाभ छोटी और कम बजट वाली पूजा समितियों को मिल सकेगा।
धार्मिक भावनाओं का रखना होगा ध्यान
पूजा समितियों के लिए पंडाल और प्रतिमा की थीम को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने कहा है कि मूर्ति निर्माण, मंडप की सजावट या थीम में ऐसी सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जाए, जिससे किसी समुदाय या व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे।
इसके अलावा देवी पक्ष या मातृ पक्ष शुरू होने से पहले पूजा मंडप का उद्घाटन करने की अनुमति नहीं देने की बात भी दिशा-निर्देशों में शामिल है।
पहले भी शराब को लेकर सख्ती कर चुकी सरकार
शुभेंदु अधिकारी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद मई में शराब की दुकानों को लेकर भी महत्वपूर्ण घोषणा की थी। सरकार ने स्कूलों, कॉलेजों और मंदिरों जैसे धार्मिक स्थलों के एक किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानों को अनुमति नहीं देने का फैसला किया था।
दिलचस्प बात यह है कि शुभेंदु अधिकारी इससे पहले विपक्ष में रहते हुए भी शराबबंदी का मुद्दा उठाते रहे हैं। जनवरी 2023 में उन्होंने बंगाल में शराब पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए महिलाओं से शराब विरोधी आंदोलन में शामिल होने की अपील की थी।
क्या पूरे बंगाल में स्थायी शराबबंदी होगी?
फिलहाल इसका जवाब **नहीं** है। नई घोषणा का अर्थ बिहार या गुजरात की तरह पूरे साल शराब पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। मौजूदा फैसला महाष्टमी के दिन शराब की बिक्री और परोसने पर रोक से संबंधित है।
इसलिए 'बंगाल में पहली बार शराबबंदी' वाली बात को अष्टमी के दिन लागू होने वाली राज्यव्यापी पाबंदी के संदर्भ में समझना जरूरी है। आगे सरकार स्थायी शराबबंदी की दिशा में कोई फैसला करती है या नहीं, इस पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
दुर्गा पूजा से पहले शराब और DJ पर पाबंदी का फैसला अब राज्य में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। सरकार इसे धार्मिक भावनाओं, अनुशासन और शांतिपूर्ण आयोजन से जोड़ रही है।
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