कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यालय से बोर्ड हटाए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट से सभी लंबित मुद्दों पर जल्द फैसला करने का अनुरोध किया। मामला कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित टीएमसी कार्यालय की इमारत के ऊपर लगे पार्टी के नाम वाले बोर्ड को नगर निगम की ओर से हटाए जाने से जुड़ा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने टीएमसी की याचिका पर सुनवाई की। पार्टी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें बोर्ड हटाए जाने के बाद तत्काल अंतरिम राहत देने से इनकार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले का गुण-दोष के आधार पर अंतिम फैसला सुनाने के बजाय विवाद को पहले से देख रहे हाईकोर्ट को ही सभी पक्षों की दलीलें सुनकर शीघ्र निर्णय लेने को कहा।
टीएमसी का क्या आरोप है?
टीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि पार्टी इस परिसर से काम कर रही थी और कार्यालय के ऊपर उसका बोर्ड लगा हुआ था। पार्टी का आरोप है कि बोर्ड को बिना उचित नोटिस दिए हटा दिया गया। टीएमसी ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था।
पार्टी की ओर से यह भी कहा गया कि नगर निगम के अधिकारियों ने परिसर में प्रवेश कर बोर्ड हटाने की कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान पुलिस की मौजूदगी को लेकर भी विवाद सामने आया था। बोर्ड हटाने की कार्रवाई के दौरान टीएमसी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनने की खबरें सामने आई थीं।
नगर निगम का क्या कहना है?
दूसरी ओर, नागरिक अधिकारियों का पक्ष है कि इमारत के ऊपर लगा बोर्ड कथित तौर पर अनधिकृत था और इसी आधार पर उसे हटाने की कार्रवाई की गई। नगर निगम की कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को विरोध का सामना करना पड़ा, जिसके बाद पुलिस की मदद ली गई। इस दौरान मौके पर तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी।
मामले को लेकर टीएमसी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कार्रवाई को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने तत्काल अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए मामले की सुनवाई आगे जारी रखने का फैसला किया। चूंकि बोर्ड पहले ही हटाया जा चुका था, इसलिए तत्काल राहत देने का सवाल भी अदालत के सामने था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को साफ किया कि हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में की गई टिप्पणियां अंतिम निष्कर्ष नहीं हैं। पीठ ने सभी पक्षों को हाईकोर्ट के सामने अपनी-अपनी दलीलें रखने की स्वतंत्रता दी। साथ ही हाईकोर्ट से विवाद से जुड़े सभी मुद्दों का जल्द निपटारा करने का अनुरोध किया।
इस दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने टीएमसी की सुप्रीम कोर्ट याचिका की सुनवाई पर प्रारंभिक आपत्ति जताई। उनका कहना था कि हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील का वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले को लंबित रखते हुए विवाद के सभी पहलुओं पर हाईकोर्ट को शीघ्र निर्णय लेने को कहा।
राजनीतिक विवाद भी बढ़ा
कैमक स्ट्रीट स्थित टीएमसी कार्यालय का बोर्ड हटाए जाने का विवाद अब महज नगर निगम की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। बोर्ड हटाने के दौरान हुए कथित टकराव को लेकर टीएमसी नेताओं और पुलिस के बीच आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हैं। मामले में पुलिस की कार्रवाई और नगर निगम की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इस मामले की निगाहें कलकत्ता हाईकोर्ट पर टिक गई हैं। हाईकोर्ट को बोर्ड हटाने की वैधता, नगर निगम की कार्रवाई की प्रक्रिया और संबंधित पक्षों की दलीलों पर विचार करना है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल विवाद का अंतिम फैसला नहीं किया है, बल्कि हाईकोर्ट से मामले को तेजी से निपटाने का रास्ता साफ किया है।
Tags: