कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और डायमंड हार्बर से सांसद **अभिषेक बनर्जी** के खिलाफ लगातार दर्ज हो रही एफआईआर को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि 'बहुत हुआ, अब और नहीं।' कोर्ट ने संकेत दिया कि अगर इसी तरह अभिषेक बनर्जी के खिलाफ लगातार नई शिकायतों के आधार पर एफआईआर दर्ज होती रही तो भविष्य में नई एफआईआर के लिए हाईकोर्ट की अनुमति लेने जैसी व्यवस्था की जा सकती है।
फिलहाल अदालत ने अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत देते हुए **30 नवंबर 2026 तक उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने** का निर्देश दिया है। हालांकि पुलिस को मामले की जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है और बनर्जी को जांच में सहयोग करने के लिए कहा गया है।
4 मई से देख रहा हूं, अब बहुत हो गया'
मामले की सुनवाई जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की पीठ कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बार-बार दर्ज हो रही शिकायतों और एफआईआर पर सवाल उठाए।
कोर्ट ने कहा कि वह 4 मई से इस मामले को देख रहा है और अब स्थिति ऐसी हो गई है कि व्यापक आदेश देने पर विचार करना पड़ सकता है। अदालत ने भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी से जुड़े एक पुराने मामले में समकक्ष पीठ द्वारा दिए गए आदेश का भी जिक्र किया।
अदालत ने संकेत दिया कि अगर शिकायतों का सिलसिला इसी तरह चलता रहा तो पुलिस को अभिषेक बनर्जी के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज करने से पहले कोर्ट की अनुमति लेने को कहा जा सकता है।
तीन शिकायतों पर कोर्ट ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि उसने व्यक्तिगत रूप से तीन शिकायतें देखी हैं और प्रथमदृष्टया उनमें ऐसा कुछ स्पष्ट नहीं दिखाई देता जो सीधे अभिषेक बनर्जी से जुड़ता हो।
मौजूदा मामला कथित फर्जी दवाओं और मेडिकल प्रैक्टिस में अनियमितताओं से जुड़ा है। अभिषेक बनर्जी की ओर से सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन पेश हुए।
राज्य की तरफ से एडिशनल एडवोकेट जनरल ने कहा कि मामला फर्जी दवाओं से संबंधित है और शिकायतकर्ता व्हिसलब्लोअर है। इस पर अदालत ने सवाल किया कि आरोपों का अभिषेक बनर्जी से सीधा संबंध क्या है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि अगर शिकायतकर्ता को कथित गड़बड़ी की जानकारी पहले से थी तो उसने एक साल पहले शिकायत क्यों नहीं की।
राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की शिकायतों का भी जिक्र
सुनवाई में यह बात भी सामने आई कि शिकायत करने वाले व्यक्तियों में अभिषेक बनर्जी का एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भी शामिल है, जो उनके खिलाफ चुनाव लड़ चुका है।
बनर्जी के वकील की ओर से दलील दी गई कि उनके मुवक्किल को पहले भी हाईकोर्ट से अंतरिम संरक्षण मिला था, लेकिन इसके बाद नई एफआईआर दर्ज होने लगीं। उनका आरोप था कि ये एफआईआर पहले दिए गए न्यायिक संरक्षण को दरकिनार करने की कोशिश हैं।
दलील में कहा गया कि अभिषेक बनर्जी को कई मामलों में बार-बार अदालत का रुख करना पड़ रहा है, जिससे न्यायिक समय भी खर्च हो रहा है।
जांच जारी रख सकती है पुलिस
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह पुलिस जांच पर रोक नहीं लगा रहा है। पुलिस मामले की जांच कर सकती है और सबूत मिलने पर आरोपपत्र भी दाखिल कर सकती है। हालांकि मौजूदा स्थिति में अदालत ने अभिषेक बनर्जी की हिरासत में पूछताछ को जरूरी नहीं माना।
कोर्ट ने कहा कि जांच अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए आरोपों की सच्चाई पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
30 नवंबर तक राहत
अदालत ने अभिषेक बनर्जी को 30 नवंबर तक दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण दिया है। राज्य को नोटिस जारी करने की अनुमति दी गई है और बनर्जी को जांच में सहयोग करना होगा।
बनर्जी के विदेश में होने की जानकारी मिलने पर अदालत ने कहा कि उनके वापस लौटने के बाद पुलिस आगे की जांच प्रक्रिया पूरी कर सकती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि कोर्ट ने भविष्य में नई एफआईआर को लेकर सख्त संकेत दिए हैं। हालांकि अभी नई एफआईआर पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। अदालत केवल इस विकल्प पर विचार कर रही है कि अगर शिकायतों का सिलसिला जारी रहता है तो नई एफआईआर दर्ज करने से पहले कोर्ट की अनुमति जरूरी की जा सकती है।
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