कोलकाता। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार को पश्चिम बंगाल के दौरे पर एक्शन मोड में नजर आए। अपने दौरे के दौरान उन्होंने देश के बेहद रणनीतिक और संवेदनशील क्षेत्र सिलिगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। इसके साथ ही उन्होंने लंबे समय से चले आ रहे गोरखा मुद्दे के स्थायी समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए समिति के गठन का ऐलान किया।
सिलिगुड़ी कॉरिडोर, जिसे आमतौर पर ‘चिकेन नेक’ के नाम से जाना जाता है, भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण भू-भाग है। इसकी सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार हमेशा विशेष सतर्कता बरतती रही है। अमित शाह ने इस क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था और तैयारियों की जानकारी अधिकारियों से ली।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक
अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ मौजूद रहते हुए राज्य सरकार और केंद्रीय बलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा, कानून व्यवस्था और रणनीतिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान गृह मंत्री ने सुरक्षा एजेंसियों से क्षेत्र में किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा। उन्होंने सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाने और सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया।
सिलिगुड़ी कॉरिडोर की अहमियत पर जोर
सिलिगुड़ी कॉरिडोर भारत की सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह संकरा क्षेत्र पश्चिम बंगाल के माध्यम से पूर्वोत्तर भारत को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। इसकी लंबाई और चौड़ाई सीमित होने के कारण इसे सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है।
गृह मंत्री ने इस क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर अधिकारियों से मौजूदा स्थिति और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि देश की एकता और सुरक्षा के लिए ऐसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की निगरानी और मजबूत व्यवस्था जरूरी है।
गोरखा मुद्दे के स्थायी समाधान की पहल
अमित शाह ने अपने दौरे के दौरान गोरखा समुदाय से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा की। लंबे समय से गोरखा क्षेत्र और समुदाय से जुड़े कई मुद्दे राजनीतिक चर्चा का विषय रहे हैं।
केंद्र सरकार का उद्देश्य बताया जा रहा है कि बातचीत और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से इन मुद्दों का स्थायी समाधान खोजा जाए। समिति इन विषयों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट और सुझाव सरकार के सामने रखेगी।
राज्य और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय पर भी चर्चा हुई। अमित शाह ने अधिकारियों से कहा कि सुरक्षा और विकास से जुड़े मामलों में सभी एजेंसियों को मिलकर काम करना चाहिए।
उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की समस्याओं और वहां की जरूरतों को भी ध्यान में रखने की बात कही। सरकार का मानना है कि सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय विकास भी जरूरी है।
राजनीतिक और रणनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण दौरा
अमित शाह का पश्चिम बंगाल दौरा राजनीतिक और रणनीतिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर जहां उन्होंने सुरक्षा मामलों की समीक्षा की, वहीं दूसरी ओर गोरखा मुद्दे को लेकर पहल कर क्षेत्रीय राजनीति में भी संदेश देने की कोशिश की।
गोरखा समुदाय की मांगें लंबे समय से राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाती रही हैं। ऐसे में समिति का गठन इस दिशा में केंद्र की सक्रियता को दर्शाता है।
सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश
गृह मंत्री ने सुरक्षा अधिकारियों को किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए। उन्होंने आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, बेहतर निगरानी व्यवस्था और आपसी समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया।
बैठक में केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस के अधिकारियों ने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और मौजूदा तैयारियों की जानकारी दी।
अमित शाह का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब पूर्वोत्तर भारत और सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार लगातार सक्रिय है। सिलिगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा समीक्षा और गोरखा मुद्दे के समाधान के लिए समिति का गठन केंद्र की रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है।