कोलकाता। पश्चिम बंगाल में छात्रों को मिलने वाली मोबाइल फोन योजना को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। मुख्यमंत्री **शुभेंदु अधिकारी** की सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री **ममता बनर्जी** के कार्यकाल में शुरू की गई छात्र मोबाइल योजना को बंद करने का फैसला लिया है। सरकार ने कहा है कि अब सामान्य मोबाइल फोन देने की जगह छात्रों की पढ़ाई के लिए उपयोगी विशेष डिजिटल डिवाइस उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
इस फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। जहां सरकार इसे शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे पिछली सरकार की योजना को खत्म करने के फैसले के रूप में देख रहा है।
ममता सरकार की योजना पर लगा ब्रेक
ममता बनर्जी सरकार ने छात्रों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से मोबाइल फोन योजना शुरू की थी।
इस योजना का मकसद आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई में मदद पहुंचाना था। कोरोना महामारी के बाद डिजिटल शिक्षा का महत्व बढ़ने के कारण ऐसी योजनाओं की जरूरत महसूस की गई थी।
कई छात्रों के लिए मोबाइल फोन ऑनलाइन क्लास, डिजिटल सामग्री और पढ़ाई से जुड़ी जानकारी हासिल करने का माध्यम बना था।
अब शुभेंदु अधिकारी सरकार ने इस मॉडल में बदलाव करने का फैसला किया है।
मोबाइल की जगह मिलेंगे शिक्षा केंद्रित उपकरण
सरकार का कहना है कि सामान्य मोबाइल फोन कई बार पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में भी इस्तेमाल होने लगते हैं।
इसी वजह से सरकार अब ऐसे उपकरण उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है जो विशेष रूप से शिक्षा के लिए तैयार किए जाएंगे।
इन डिवाइस में ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल पाठ्य सामग्री और शैक्षणिक सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार का तर्क है कि इससे छात्रों को पढ़ाई के लिए ज्यादा बेहतर डिजिटल संसाधन मिल सकेंगे।
सरकार ने क्यों लिया फैसला?
शुभेंदु अधिकारी सरकार का मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक का इस्तेमाल केवल डिवाइस बांटने तक सीमित नहीं होना चाहिए।
छात्रों को ऐसा माध्यम मिलना चाहिए जिससे उनकी पढ़ाई बेहतर हो सके।
सरकार का उद्देश्य डिजिटल शिक्षा को अधिक व्यवस्थित और उपयोगी बनाना बताया जा रहा है।
इसके तहत पढ़ाई से जुड़े कंटेंट, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और शैक्षणिक संसाधनों पर ज्यादा ध्यान देने की तैयारी है।
छात्रों पर क्या पड़ेगा असर?
मोबाइल योजना बंद होने से सबसे ज्यादा असर उन छात्रों पर पड़ सकता है जो डिजिटल पढ़ाई के लिए सरकार से मिलने वाले फोन पर निर्भर थे।
ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों के लिए डिजिटल डिवाइस तक पहुंच एक बड़ी चुनौती हो सकती है।
हालांकि सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था में छात्रों को पहले से बेहतर और उपयोगी उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।
विपक्ष उठा सकता है सवाल
राज्य सरकार के इस फैसले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आ सकती है।
तृणमूल कांग्रेस की ओर से यह सवाल उठाया जा सकता है कि पिछली सरकार की छात्र हित वाली योजना को क्यों बदला गया।
वहीं भाजपा सरकार इसे सुधार और बदलाव की नीति के रूप में पेश कर रही है।
बंगाल की राजनीति में कल्याणकारी योजनाएं हमेशा से बड़ा मुद्दा रही हैं।
डिजिटल शिक्षा की बढ़ती जरूरत
आज के समय में शिक्षा तेजी से डिजिटल हो रही है।
ऑनलाइन क्लास, ई-बुक, डिजिटल लाइब्रेरी और इंटरनेट आधारित पढ़ाई छात्रों के लिए महत्वपूर्ण बन चुके हैं।
ऐसे में सरकारों के सामने चुनौती है कि तकनीक का फायदा हर वर्ग तक पहुंचाया जाए।
डिवाइस उपलब्ध कराने के साथ-साथ इंटरनेट सुविधा और डिजिटल प्रशिक्षण भी जरूरी है।
मोबाइल योजना से जुड़ी चुनौतियां
छात्रों को मोबाइल देने वाली योजनाओं को लेकर कई बार सवाल भी उठते रहे हैं।
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि केवल मोबाइल उपलब्ध कराने से शिक्षा में सुधार नहीं आता।
इसके लिए अच्छे डिजिटल कंटेंट, शिक्षकों का प्रशिक्षण और इंटरनेट कनेक्टिविटी भी जरूरी है।
इसी सोच के तहत कुछ सरकारें अब शिक्षा केंद्रित डिजिटल उपकरणों पर जोर दे रही हैं।
बंगाल में शिक्षा को लेकर सियासी लड़ाई
पश्चिम बंगाल में शिक्षा क्षेत्र लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है।
भर्ती प्रक्रिया, स्कूल व्यवस्था और छात्रों से जुड़ी योजनाओं को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने आते रहे हैं।
नई सरकार द्वारा पिछली सरकार की योजनाओं में बदलाव करना भी इसी राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
आगे क्या होगा?
अब नजर इस बात पर होगी कि नई शिक्षा आधारित डिवाइस योजना कब शुरू होगी और इसका लाभ किन छात्रों को मिलेगा।
सरकार को यह भी स्पष्ट करना होगा कि पुराने लाभार्थियों और नए छात्रों के लिए क्या व्यवस्था होगी।
अगर नई योजना सही तरीके से लागू होती है तो यह डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।
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