Pratapgarh: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में भारी बारिश के दौरान करीब 100 साल पुराने जर्जर मकान के ढहने से एक ही परिवार के छह लोगों की मौत के बाद हादसे के इकलौते जीवित बचे अमन श्रीवास्तव ने उस भयावह रात की दर्दनाक कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि जब उनकी आंख खुली तो वह मलबे के नीचे दबे हुए थे और किसी तरह बाहर निकलने के बाद उन्होंने अपने पूरे परिवार को मलबे में फंसा पाया।

अमन श्रीवास्तव ने बताया, "जब मेरी आंख खुली तो मुझे एहसास हुआ कि मैं मलबे के नीचे दबा हुआ हूं। किसी तरह बाहर निकला और देखा कि परिवार के सभी सदस्य मलबे में फंसे हैं। पहले मैंने खुद उन्हें निकालने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद मैं मदद के लिए जोर-जोर से चिल्लाने लगा। मेरी आवाज सुनकर परिवार के अन्य सदस्य, पड़ोसी और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे।"

उन्होंने बताया कि हादसे के समय परिवार के सभी सात सदस्य एक ही कमरे में सो रहे थे। "मेरे माता-पिता, छोटा भाई, पत्नी और मेरे दो छोटे बच्चे उसी कमरे में थे। मुझे तो बचा लिया गया, लेकिन मेरे परिवार के बाकी सभी लोगों की मौत हो गई," यह कहते हुए अमन भावुक हो गए।

बुधवार को हुई इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। लगातार हो रही बारिश के बीच महुली इलाके में स्थित लगभग एक सदी पुराना मकान अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंचे। कई घंटों तक चले अभियान के बाद मलबे से छह लोगों के शव निकाले गए, जबकि अमन श्रीवास्तव को गंभीर हालत में जीवित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।

प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि लगातार बारिश के कारण जर्जर मकान की दीवारें और छत कमजोर हो गई थीं, जिसके चलते पूरी इमारत ढह गई। प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है और आसपास के पुराने एवं जर्जर मकानों का भी सर्वे कराने की बात कही है, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।

हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। स्थानीय लोग इसे हाल के वर्षों की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक बता रहे हैं। प्रशासन ने पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है और घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

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