Prayagraj (UP) प्रयागराज (UP): इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक व्यक्ति को आदेश दिया है कि वह 16 सितंबर को अपने बेटे को कोर्ट में पेश करे। बेटे ने आरोप लगाया था कि इस्लाम अपनाने और एक मुस्लिम महिला से शादी करने के फैसले की वजह से उसके पिता ने उसे गैर-कानूनी तरीके से बंधक बना रखा है। यह आदेश जस्टिस संदीप जैन ने आयुष मलिक की ओर से उनके दोस्त सुल्तान द्वारा दायर 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
कोर्ट को बताया गया कि 31 साल के मलिक ने अपनी मर्जी से हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाया है और इसके लिए उन पर कोई दबाव, गलत प्रभाव या लालच नहीं डाला गया था। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अपने पिता देवराज सिंह मलिक की मर्जी के खिलाफ चांदनी कुरैशी से शादी की थी। इस बात से नाराज होकर उनके पिता ने शामली जिले के शामली पुलिस स्टेशन में अपने बेटे की पत्नी और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ 'उत्तर प्रदेश गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम, 2021' और BNS की कुछ धाराओं के तहत FIR दर्ज कराई।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि पिता के साथ मिलीभगत करके, राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों ने संबंधित व्यक्ति (आयुष मलिक) को गैर-कानूनी तरीके से बंधक बनाए रखने में मदद की। बेटे को पेश करने का आदेश देते हुए, कोर्ट ने 9 सितंबर को कहा, "रिट याचिका के साथ लगे दस्तावेजों को देखने से पहली नज़र में ऐसा लगता है कि आयुष मलिक ने अपनी मर्जी से हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाया और उसके बाद अपने पिता की मर्जी के खिलाफ चांदनी कुरैशी से शादी की।"
कोर्ट ने आगे कहा, "ऐसा भी लगता है कि आयुष मलिक के इन कामों के बाद ही उनके पिता ने FIR दर्ज कराई।" कोर्ट ने कहा, "याचिकाकर्ता के वकील ने अपने क्लाइंट को गैर-कानूनी तरीके से बंधक बनाए रखने और इसमें राज्य के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत के जो आरोप लगाए हैं, वे गंभीर हैं। इसलिए, इस कोर्ट को इन पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है।"