उत्तरप्रदेश : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने पार्टी संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को भी जिम्मेदारियों से हटा दिया है। इससे पहले उन्होंने अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया था। अब ईशान आनंद से भी पद वापस लेने के बाद मायावती ने साफ संकेत दिया है कि पार्टी में परिवार के लोगों को आगे बढ़ाने की नीति से वह पीछे हट रही हैं।

मायावती ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पार्टी को मजबूत बनाए रखने के लिए कई बार कड़े फैसले लेने पड़ते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी तरह के व्यक्तिगत मोह या रिश्तों के कारण वह पार्टी के हितों से समझौता नहीं करेंगी।

छह दिन पहले मिली थी बड़ी जिम्मेदारी

ईशान आनंद को बसपा में बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा हाल ही में शुरू हुई थी। मायावती ने उन्हें छह दिन पहले ही पार्टी का मुख्य सेक्टर कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया था। यह पद संगठन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि सेक्टर कोऑर्डिनेटर पार्टी के जमीनी संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय का काम करते हैं।

हालांकि, अब मायावती ने अचानक यह जिम्मेदारी वापस ले ली है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी ऐलान किया कि उनके भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे को भविष्य में पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।

परिवारवाद से दूरी बनाने का संदेश

मायावती ने अपने बयान में कहा कि बसपा एक मिशन आधारित पार्टी है और इसमें किसी व्यक्ति विशेष या परिवार के हित से ऊपर संगठन और आंदोलन का हित है। उन्होंने कहा कि वह रिश्तों के मोह में पड़कर पार्टी को कमजोर नहीं होने देंगी।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, मायावती का यह कदम पार्टी में परिवारवाद को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब माना जा रहा है। बसपा में पिछले कुछ समय से आकाश आनंद को लेकर कई बदलाव देखने को मिले थे। पहले उन्हें पार्टी में बड़ी भूमिका दी गई, लेकिन बाद में उन्हें पदों से हटाया गया और अब ईशान आनंद को भी जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है।

आकाश आनंद की भूमिका पर भी उठे थे सवाल

आकाश आनंद मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं। उन्हें मायावती ने अपना उत्तराधिकारी बनाने के संकेत भी दिए थे। युवा चेहरे के रूप में आकाश आनंद को पार्टी के विस्तार की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने कई राज्यों में चुनावी सभाएं भी की थीं।

हालांकि, बाद में पार्टी नेतृत्व ने उनके बयानों और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर नाराजगी जताई। इसके बाद उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से हटा दिया गया। अब ईशान आनंद से भी जिम्मेदारी वापस लेने के बाद बसपा में परिवार के युवाओं की भूमिका लगभग खत्म होती नजर आ रही है।

बसपा को नई दिशा देने की कोशिश

मायावती लंबे समय से बसपा को अपने मूल सामाजिक और राजनीतिक एजेंडे पर मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं। पार्टी के सामने लगातार चुनावी चुनौतियां रही हैं और संगठन को फिर से सक्रिय करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

माना जा रहा है कि इन फैसलों के जरिए मायावती पार्टी कार्यकर्ताओं को यह संदेश देना चाहती हैं कि बसपा में पद केवल परिवार के आधार पर नहीं बल्कि संगठनात्मक क्षमता और पार्टी के प्रति समर्पण के आधार पर दिए जाएंगे।

कार्यकर्ताओं को दिया साफ संदेश

मायावती ने अपने संदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि बसपा का नेतृत्व किसी पारिवारिक विरासत के बजाय आंदोलन और विचारधारा के आधार पर चलेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी के हित में वह भविष्य में भी कठोर फैसले लेने से पीछे नहीं हटेंगी।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मायावती का यह कदम आने वाले चुनावों को देखते हुए काफी अहम हो सकता है। बसपा को नए नेतृत्व और मजबूत संगठन की जरूरत है। ऐसे में परिवार के सदस्यों को जिम्मेदारियों से दूर रखना पार्टी के अंदर नई व्यवस्था बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

अब देखना होगा कि मायावती के इस फैसले का बसपा के संगठन और आगामी चुनावी रणनीति पर कितना असर पड़ता है। फिलहाल इतना साफ है कि मायावती ने पार्टी में परिवार आधारित नेतृत्व की संभावनाओं पर बड़ा विराम लगा दिया है।

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