यूपी विधानसभा में हंगामा, CM योगी ने सपा पर बोला हमला

Update: 2026-08-04 09:19 GMT

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही विपक्ष के भारी विरोध और नारेबाजी के बीच बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की, जिसके कारण सदन में लगातार गतिरोध बना रहा।

कार्यवाही स्थगित होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मीडिया से बातचीत की और समाजवादी पार्टी (सपा) पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का व्यवहार विधानसभा की गरिमा और लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मंगलवार को विधानसभा में सपा और विपक्ष के नेताओं का आचरण पूरे प्रदेश ने देखा। उन्होंने कहा कि ऐसा व्यवहार न केवल सदन की अवमानना है, बल्कि यह अलोकतांत्रिक और शर्मनाक भी है।

सीएम योगी ने कहा कि विधानसभा नियमों और परंपराओं के अनुसार चलती है। सदन में किसी भी विषय पर चर्चा के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं और नियमों का पालन जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन सदन की मर्यादा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश विधानसभा की प्रक्रिया और संचालन नियमावली के नियम 59 का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कोई मामला किसी न्यायाधिकरण, जांच एजेंसी या आयोग के समक्ष लंबित है, तो सामान्य परिस्थितियों में उस विषय पर विधानसभा में चर्चा नहीं की जा सकती।

उन्होंने कहा कि नियमों में यह भी प्रावधान है कि यदि विधानसभा अध्यक्ष को लगता है कि चर्चा से किसी जांच प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा या उसमें कोई बाधा उत्पन्न नहीं होगी, तो विशेष परिस्थितियों में अनुमति दी जा सकती है। लेकिन बिना नियमों का पालन किए सदन में किसी मुद्दे को उठाना उचित नहीं है।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक लाभ के लिए सदन की कार्यवाही को बाधित कर रहा है। उन्होंने कहा कि जनता ने अपने प्रतिनिधियों को समस्याओं पर चर्चा करने और समाधान निकालने के लिए विधानसभा भेजा है, न कि हंगामा करने के लिए।

मंगलवार को सदन की शुरुआत से ही विपक्षी सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई। विपक्ष के हंगामे के कारण प्रश्नकाल और अन्य विधायी कार्य प्रभावित हुए। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से सदस्यों से शांत रहने और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने देने की अपील भी की गई, लेकिन विरोध जारी रहा।

सत्तापक्ष ने विपक्ष के इस रवैये पर नाराजगी जताई और कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए सदन की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

वहीं, विपक्षी दलों का कहना है कि वे जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने के लिए विधानसभा में आए हैं। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह जरूरी सवालों से बचने की कोशिश कर रही है और इसलिए नियमों का हवाला देकर चर्चा रोकना चाहती है।

मानसून सत्र के दूसरे दिन हुए हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। अब सभी की नजर बुधवार को होने वाली कार्यवाही पर है कि क्या सदन में गतिरोध खत्म होगा या विपक्ष और सरकार के बीच टकराव जारी रहेगा।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, विधानसभा सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच बहस और मतभेद सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, लेकिन लगातार हंगामे के कारण विधायी कार्य प्रभावित होने पर दोनों पक्षों की भूमिका पर सवाल उठते हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष को सलाह दी कि वह लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखे और सदन की गरिमा को बनाए रखे। उन्होंने कहा कि विधानसभा जनता की समस्याओं के समाधान का सबसे बड़ा मंच है और यहां गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

दूसरी ओर, विपक्ष अपनी मांगों और मुद्दों को लेकर आगे भी सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी में है। ऐसे में आने वाले दिनों में विधानसभा की कार्यवाही के दौरान राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना बनी हुई है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा का यह मानसून सत्र शुरुआत से ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बना हुआ है। अब देखना होगा कि अगले दिन सदन में कामकाज किस तरह आगे बढ़ता है और क्या सरकार व विपक्ष के बीच किसी सहमति की स्थिति बन पाती है।

Tags:    

Similar News