लखीमपुर खीरी। ईसानगर थाना क्षेत्र में सोमवार सुबह घाघरा नदी में नहाने गईं तीन किशोरियां गहरे पानी में बह गईं। किशोरियों की चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंचे और उन्हें बचाने के लिए नदी में उतर गए। ग्रामीणों ने काफी प्रयास के बाद एक किशोरी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि दो किशोरियां तेज बहाव और गहरे पानी में लापता हो गईं। हादसे की सूचना मिलते ही गांव में खलबली मच गई और बड़ी संख्या में लोग नदी किनारे पहुंच गए।
घटना थाना ईसानगर क्षेत्र के ग्राम हटवा मजरा फिरोजाबाद की बताई जा रही है। गांव निवासी प्यारे की 10 वर्षीय बेटी शैलेंद्री और 15 वर्षीय सुनीता तथा रामप्रसाद की 11 वर्षीय बेटी गोल्डी सोमवार सुबह करीब 10 बजे अपने खेत देखने के लिए घर से निकली थीं। उनका खेत घाघरा नदी के किनारे स्थित है। खेत देखने के बाद तीनों किशोरियां नदी में नहाने लगीं।
नहाते समय तीनों को नदी की गहराई और बहाव का अंदाजा नहीं लगा। कुछ ही देर में वे अपेक्षाकृत गहरे हिस्से में पहुंच गईं और डूबने लगीं। मदद के लिए उनकी आवाज सुनकर आसपास खेतों में मौजूद ग्रामीण नदी की ओर दौड़े। ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए नदी में उतरकर बचाव का प्रयास शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद एक किशोरी को पानी से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन दो अन्य का पता नहीं चल सका।
स्थानीय गोताखोरों ने शुरू की तलाश
दो किशोरियों के लापता होने की खबर फैलते ही उनके परिजन और गांव के लोग नदी किनारे पहुंच गए। स्थानीय गोताखोरों को बुलाया गया और उन्होंने संभावित स्थानों पर तलाश शुरू की। नदी में पानी अधिक होने और बहाव तेज होने के कारण खोज अभियान में कठिनाई सामने आ रही है। गोताखोर नदी के गहरे हिस्सों के साथ आसपास की झाड़ियों और बहाव की दिशा में भी तलाश कर रहे हैं।
हादसे की सूचना ईसानगर पुलिस को दी गई। पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों से घटना की जानकारी ली। स्थानीय संसाधनों से तलाश शुरू कराने के साथ राज्य आपदा मोचन बल यानी एसडीआरएफ को भी सूचना भेजी गई। एसडीआरएफ की टीम को बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि प्रशिक्षित गोताखोरों और आधुनिक बचाव उपकरणों की मदद से अभियान को तेज किया जा सके।
खबर लिखे जाने तक दोनों किशोरियों की तलाश जारी थी। उनकी बरामदगी के संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई थी। इसलिए दोनों को लापता माना जा रहा है। मौके पर मौजूद ग्रामीण और परिजन उनके सुरक्षित मिलने की उम्मीद में नदी किनारे डटे हुए हैं।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
एक साथ दो किशोरियों के नदी में लापता होने से गांव में चिंता और मातम जैसा माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। हादसे की जानकारी मिलने के बाद आसपास के गांवों के लोग भी मौके पर पहुंचकर खोज अभियान में सहयोग कर रहे हैं। ग्रामीण नाव और रस्सियों के सहारे नदी में तलाश करने का प्रयास कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार घाघरा नदी में कई स्थानों पर अचानक गहराई बढ़ जाती है। ऊपर से पानी सामान्य दिखाई देता है, लेकिन नीचे गहरे गड्ढे और तेज धारा हो सकती है। नदी में उतरने वाला व्यक्ति इनका अनुमान नहीं लगा पाता और बहाव की चपेट में आ जाता है। बारिश तथा बाढ़ के मौसम के बाद नदी की तलहटी में भी बदलाव हो जाता है, जिससे पहले सुरक्षित समझे जाने वाले स्थान खतरनाक बन सकते हैं।
बचाई गई किशोरी की हालत पर नजर
ग्रामीणों द्वारा बचाई गई किशोरी को प्राथमिक सहायता दिए जाने की जानकारी है। पानी में डूबने की स्थिति से बाहर निकाले गए व्यक्ति को सामान्य दिखाई देने पर भी चिकित्सकीय परीक्षण कराना जरूरी माना जाता है, क्योंकि फेफड़ों में पानी जाने या सांस लेने में समस्या बाद में भी सामने आ सकती है। प्रशासन की ओर से बचाई गई किशोरी की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।
घटना के बाद पुलिस और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता किशोरियों की तलाश है। नदी के बहाव को देखते हुए तलाश का दायरा आगे तक बढ़ाया जा सकता है। एसडीआरएफ के पहुंचने के बाद मोटरबोट और अन्य उपकरणों की मदद से नदी में अभियान चलाए जाने की संभावना है।
नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत
इस हादसे ने नदी किनारे बसे गांवों में बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा फिर सामने ला दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेत नदी के पास होने के कारण बच्चे और परिवार के सदस्य अक्सर उस तरफ जाते हैं। गर्मी और उमस के दौरान बच्चे नदी में नहाने उतर जाते हैं, लेकिन गहराई, तेज बहाव और असुरक्षित घाटों की जानकारी नहीं होने से दुर्घटनाएं हो सकती हैं।
ग्रामीणों ने संवेदनशील और गहरे स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाने, नदी किनारे नियमित निगरानी कराने तथा बच्चों को अकेले पानी के पास जाने से रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत बताई है। जिन स्थानों पर लोग नियमित रूप से स्नान करते हैं, वहां सुरक्षित घाट, रस्सी, लाइफ जैकेट और बचाव संबंधी प्राथमिक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग भी उठ सकती है।
अधिकारियों ने लोगों से तेज बहाव वाली नदी में न उतरने और बच्चों को अकेले नदी किनारे नहीं भेजने की अपील की है। किसी को डूबता देखकर बिना सुरक्षा उपकरण या तैराकी के अनुभव के सीधे पानी में उतरना भी जोखिम भरा हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन, पुलिस, गोताखोरों या आपदा सहायता दल को सूचना देना चाहिए।
फिलहाल घाघरा नदी के किनारे खोज अभियान जारी है। प्रशासन और ग्रामीणों की टीम दोनों लापता किशोरियों की तलाश में जुटी हुई है। पूरे गांव की निगाहें बचाव अभियान पर टिकी हैं और परिजन उनके सुरक्षित मिलने की प्रार्थना कर रहे हैं।