लखनऊ। घर बनाने या मकान खरीदने के लिए बैंक से होम लोन लेने वालों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। विकास प्राधिकरण ने अवैध निर्माण और बिना स्वीकृत नक्शे के बन रही इमारतों पर लगाम लगाने के लिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब किसी भवन या संपत्ति के लिए होम लोन मंजूर करने से पहले उसका **स्वीकृत बिल्डिंग मैप यानी पास नक्शा** जांचना होगा। बिना मानचित्र स्वीकृति वाली संपत्तियों को आसानी से बैंक फाइनेंस मिलने पर रोक लगाने की तैयारी है।
इस कदम का उद्देश्य शहर में तेजी से बढ़ रहे अनधिकृत निर्माण को आर्थिक मदद मिलने से रोकना है। कई मामलों में भवन मालिक या बिल्डर बिना विकास प्राधिकरण से नक्शा स्वीकृत कराए निर्माण शुरू कर देते हैं। बाद में मकान या फ्लैट खरीदार बैंक से लोन लेकर ऐसी संपत्ति खरीद लेते हैं। भविष्य में जब निर्माण अवैध पाया जाता है तो सीलिंग, ध्वस्तीकरण या दूसरी कानूनी कार्रवाई की स्थिति में खरीदार भी परेशानी में फंस जाता है।
नई व्यवस्था में बैंकों की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। केवल जमीन या मकान के कागजात देखकर होम लोन देने के बजाय यह भी जांचना होगा कि निर्माण सक्षम प्राधिकरण से मंजूर मानचित्र के अनुसार वैध है या नहीं।
पास नक्शा देखे बिना नहीं दिया जाए लोन
विकास प्राधिकरण की ओर से बैंकों को कहा गया है कि आवासीय या दूसरी भवन संपत्तियों पर ऋण स्वीकृत करते समय मानचित्र की वैधता जरूर जांची जाए।
अगर किसी भवन का निर्माण नक्शा स्वीकृत नहीं है तो ऐसी संपत्ति पर ऋण देने से पहले बैंक को विशेष सावधानी बरतनी होगी।
इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है जो बिना नक्शा पास कराए मकान बनाकर बाद में उस पर बैंक से ऋण लेने की कोशिश करते हैं।
इसके साथ उन बिल्डरों पर भी दबाव बढ़ेगा जो बिना जरूरी अनुमति के प्रोजेक्ट बनाकर ग्राहकों को बैंक फाइनेंस उपलब्ध कराने का दावा करते हैं।
क्यों उठाना पड़ा यह कदम?
शहरी क्षेत्रों में अनधिकृत निर्माण लंबे समय से बड़ी समस्या है।
कई कॉलोनियों और आवासीय इलाकों में स्वीकृत नक्शे के बिना भवन खड़े कर दिए जाते हैं। कहीं आवासीय नक्शे पर व्यावसायिक निर्माण किया जाता है तो कहीं निर्धारित मंजिलों से ज्यादा फ्लोर तैयार कर लिए जाते हैं।
कुछ मामलों में सेटबैक, पार्किंग, सड़क की चौड़ाई और अग्नि सुरक्षा से जुड़े नियमों का भी पालन नहीं किया जाता।
ऐसी इमारतों पर विकास प्राधिकरण कार्रवाई करता है, लेकिन तब तक कई फ्लैट या मकान ग्राहकों को बेचे जा चुके होते हैं।
नतीजा यह होता है कि कार्रवाई की मार बिल्डर के साथ उस आम खरीदार पर भी पड़ती है जिसने अपनी जीवनभर की कमाई और बैंक लोन लगाकर संपत्ति खरीदी होती है।
बैंक लोन को लोग मान लेते हैं वैधता की गारंटी
प्रॉपर्टी बाजार में एक आम धारणा है कि अगर किसी मकान या फ्लैट पर बैंक लोन दे रहा है तो संपत्ति पूरी तरह वैध होगी।
लेकिन वास्तविकता इतनी सरल नहीं है।
बैंक का लोन स्वीकृत होना किसी संपत्ति की हर तरह की कानूनी वैधता की सरकारी गारंटी नहीं होता।
बैंक मुख्य रूप से अपनी क्रेडिट और कानूनी जांच प्रक्रिया के आधार पर लोन देता है। अलग-अलग बैंकों की ड्यू डिलिजेंस प्रक्रिया भी अलग हो सकती है।
इसलिए खरीदार को खुद भी जमीन के स्वामित्व, नक्शे की मंजूरी, निर्माण की अनुमति और जरूरत के अनुसार दूसरे दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए।
नई व्यवस्था से बैंक स्तर पर भी स्वीकृत नक्शे की जांच पर ज्यादा जोर बढ़ेगा।
अवैध बिल्डरों पर पड़ेगा सीधा असर
इस फैसले का सबसे बड़ा असर ऐसे बिल्डरों और डेवलपर्स पर पड़ सकता है जो बिना जरूरी मंजूरी के मकान या फ्लैट तैयार करते हैं।
प्रॉपर्टी खरीदने वाले अधिकांश मध्यमवर्गीय परिवार बैंक लोन पर निर्भर रहते हैं।
अगर बिना स्वीकृत नक्शे वाली संपत्ति को बैंक फाइनेंस मिलना मुश्किल हो जाता है तो ऐसी संपत्तियों को बेचना भी कठिन होगा।
यानी विकास प्राधिकरण का लक्ष्य अवैध निर्माण पर केवल नोटिस या ध्वस्तीकरण के जरिए कार्रवाई करना नहीं बल्कि उसके वित्तीय स्रोत को भी नियंत्रित करना है।
जब खरीदार को लोन ही नहीं मिलेगा तो बिना अनुमति वाली परियोजनाओं की मांग स्वाभाविक रूप से कम हो सकती है।
खरीदार को क्या फायदा होगा?
पहली नजर में यह नियम होम लोन प्रक्रिया को थोड़ा सख्त बना सकता है, लेकिन वैध संपत्ति खरीदने वाले ग्राहक के लिए यह सुरक्षा की अतिरिक्त परत साबित हो सकता है।
अगर बैंक लोन से पहले स्वीकृत मानचित्र की जांच करता है तो ग्राहक को शुरुआती स्तर पर ही पता चल सकता है कि निर्माण अनुमति प्राप्त है या नहीं।
इससे ऐसे मकान या फ्लैट खरीदने का जोखिम कम हो सकता है जिन पर भविष्य में विकास प्राधिकरण की कार्रवाई हो।
हालांकि ग्राहक को केवल बैंक की जांच पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
बड़ी रकम की प्रॉपर्टी खरीदते समय स्वतंत्र कानूनी जांच कराना भी बेहतर होता है।
नक्शा पास होना क्या होता है?
शहर में भवन निर्माण के लिए जमीन मालिक या बिल्डर को संबंधित विकास प्राधिकरण अथवा सक्षम स्थानीय निकाय के पास प्रस्तावित भवन का नक्शा जमा करना होता है।
इस नक्शे में प्लॉट का आकार, भवन का क्षेत्रफल, मंजिलों की संख्या, सेटबैक, प्रवेश-निकास, पार्किंग और दूसरी जरूरी जानकारियां होती हैं।
संबंधित प्राधिकरण भवन उपविधियों और लागू नियमों के अनुसार इसकी जांच करता है।
सभी आवश्यक शर्तें पूरी होने पर मानचित्र स्वीकृत किया जाता है।
इसके बाद निर्माण को उसी स्वीकृत योजना और लागू नियमों के अनुसार किया जाना चाहिए।
सिर्फ नक्शा पास होना पर्याप्त नहीं है। अगर मंजूरी दो मंजिल की है और निर्माण चार मंजिल का कर दिया गया तो अतिरिक्त निर्माण अनधिकृत माना जा सकता है।
होम लोन लेने से पहले तैयार रखें दस्तावेज
नई सख्ती के बाद होम लोन के लिए आवेदन करने वाले ग्राहकों को संपत्ति से जुड़े दस्तावेज पहले से व्यवस्थित रखने चाहिए।
आमतौर पर बैंक आवेदक की आय और क्रेडिट प्रोफाइल के अलावा संपत्ति से जुड़े कई दस्तावेज मांगते हैं।
इनमें सेल डीड या एग्रीमेंट, जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज, स्वीकृत भवन मानचित्र और परियोजना की प्रकृति के अनुसार दूसरी अनुमतियां शामिल हो सकती हैं।
फ्लैट खरीदने की स्थिति में बिल्डर की परियोजना से जुड़े दस्तावेज भी जांचे जाते हैं।
किस दस्तावेज की जरूरत होगी, यह संपत्ति और बैंक की नीति पर निर्भर करेगा।
फ्लैट खरीदने वाले RERA भी जांचें
अगर ग्राहक किसी नए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीद रहा है तो उसे संबंधित राज्य के **RERA पोर्टल** पर परियोजना की जानकारी जरूर जांचनी चाहिए, जहां परियोजना का पंजीकरण लागू हो।
वहां प्रोजेक्ट के पंजीकरण, प्रमोटर और घोषित योजना से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
लेकिन RERA रजिस्ट्रेशन और बिल्डिंग मैप अप्रूवल अलग-अलग नियामकीय पहलू हैं।
इसलिए केवल यह देखकर कि प्रोजेक्ट RERA में दर्ज है, बाकी दस्तावेजों की जांच छोड़ देना सही नहीं होगा।
खरीदार को स्वीकृत नक्शा और दूसरी जरूरी अनुमतियां भी देखनी चाहिए।
पुराना मकान खरीदने वाले भी रहें सावधान
यह मामला केवल नई बिल्डिंग या बिल्डर प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है।
अगर आप किसी व्यक्ति से पुराना मकान खरीद रहे हैं तो उसमें भी स्वीकृत नक्शे और वास्तविक निर्माण के बीच अंतर हो सकता है।
उदाहरण के लिए पुराने मालिक ने बाद में एक अतिरिक्त मंजिल, कमरा या दुकान बना ली हो और उसकी अनुमति न ली हो।
ऐसी स्थिति में बैंक की तकनीकी और कानूनी टीम आपत्ति उठा सकती है।
इसलिए रीसेल प्रॉपर्टी खरीदते समय भी वास्तविक निर्माण को स्वीकृत नक्शे से मिलाना जरूरी है।
कमर्शियल इस्तेमाल भी बन सकता है परेशानी
कई शहरों में आवासीय भवनों का व्यावसायिक इस्तेमाल भी समस्या बनता है।
मकान का नक्शा आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत होता है लेकिन बाद में वहां दुकान, कार्यालय, गोदाम या दूसरी व्यावसायिक गतिविधि शुरू कर दी जाती है।
ऐसे मामलों में जमीन के उपयोग और भवन नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
अगर बैंक संपत्ति पर नया ऋण देने जा रहा है तो इस तरह के अंतर तकनीकी या कानूनी जांच में सामने आ सकते हैं।
इसलिए केवल नक्शा मौजूद होना नहीं बल्कि उसका वास्तविक निर्माण और उपयोग से मेल खाना भी महत्वपूर्ण है।
लोन रिजेक्ट हुआ तो पहले कारण समझें
अगर किसी संपत्ति पर बैंक नक्शे से संबंधित कारण बताकर लोन देने से मना करता है तो तुरंत दूसरे बैंक में आवेदन करने के बजाय समस्या समझना बेहतर होगा।
हो सकता है भवन का मानचित्र स्वीकृत न हो, वास्तविक निर्माण मंजूरी से अलग हो या जमीन के दस्तावेज में कोई समस्या हो।
अगर कमी नियमित प्रक्रिया से ठीक की जा सकती है तो संबंधित विकास प्राधिकरण से जानकारी ली जा सकती है।
लेकिन बिना समाधान किए केवल ऐसा बैंक तलाशना जो लोन दे दे, भविष्य में बड़ी कानूनी परेशानी पैदा कर सकता है।
अवैध कॉलोनियों में बढ़ सकती है मुश्किल
इस सख्ती का असर अनधिकृत या नियमों के विपरीत विकसित कॉलोनियों में संपत्ति खरीदने वालों पर ज्यादा पड़ सकता है।
ऐसे क्षेत्रों में कई बार प्लॉट की रजिस्ट्री उपलब्ध होती है लेकिन लेआउट या भवन निर्माण से जुड़ी जरूरी मंजूरियां स्पष्ट नहीं होतीं।
लोग केवल कम कीमत देखकर ऐसी संपत्ति खरीद लेते हैं।
बाद में बिजली, पानी, सड़क, सीवर, नक्शा स्वीकृति या बैंक लोन में समस्या सामने आती है।
इसलिए किसी भी कॉलोनी में प्लॉट या मकान खरीदने से पहले उसके विकास की वैधानिक स्थिति जांचना जरूरी है।
नक्शा और रजिस्ट्री एक चीज नहीं
प्रॉपर्टी खरीदारों को एक और महत्वपूर्ण अंतर समझना चाहिए।
**रजिस्ट्री होना और बिल्डिंग का नक्शा पास होना दो अलग बातें हैं।**
रजिस्ट्री संपत्ति के हस्तांतरण से जुड़ा दस्तावेज है, जबकि मानचित्र स्वीकृति भवन निर्माण से जुड़े नियमों के पालन से संबंधित होती है।
इसलिए केवल रजिस्ट्री दिखाकर यह नहीं माना जा सकता कि उस जमीन पर बना पूरा निर्माण भी अधिकृत है।
होम लोन से पहले बैंक अगर स्वीकृत नक्शे की जांच करता है तो इसी तरह की समस्याओं की पहचान शुरुआती स्तर पर हो सकती है।
बैंक की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी
विकास प्राधिकरण की सख्ती के बाद बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को अपनी प्रॉपर्टी ड्यू डिलिजेंस और मजबूत करनी पड़ सकती है।
लोन मंजूरी से पहले बैंक की कानूनी टीम टाइटल और दूसरे दस्तावेजों की जांच करती है, जबकि तकनीकी टीम संपत्ति का मूल्यांकन कर सकती है।
अब स्वीकृत मानचित्र को विशेष महत्व दिए जाने से बिना अनुमति वाले निर्माण को संस्थागत वित्त मिलना मुश्किल हो सकता है।
हालांकि वास्तविक प्रक्रिया बैंक, संपत्ति की श्रेणी और संबंधित स्थानीय नियमों के आधार पर अलग हो सकती है।
घर खरीदने से पहले ये जांच सबसे जरूरी
नई व्यवस्था आम खरीदार के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी देती है—घर खरीदने का फैसला केवल लोकेशन, कीमत और बैंक EMI देखकर नहीं करें।
सबसे पहले यह जांचें कि जमीन का मालिक कौन है और विक्रेता को उसे बेचने का अधिकार है या नहीं।
इसके बाद स्वीकृत नक्शा देखें और वास्तविक निर्माण से उसकी तुलना करें।
नई परियोजना होने पर लागू RERA विवरण जांचें। संपत्ति पर पहले से कोई कर्ज या कानूनी विवाद तो नहीं है, इसकी भी जांच जरूरी है।
इसके अलावा पानी, बिजली, पार्किंग, पहुंच मार्ग और लागू स्थानीय अनुमतियों की स्थिति भी देखनी चाहिए।
अवैध निर्माण रोकने में कितना असर?
विकास प्राधिकरण का यह कदम प्रभावी साबित हो सकता है क्योंकि रियल एस्टेट बाजार का बड़ा हिस्सा बैंक फाइनेंस पर निर्भर है।
अगर बैंक बिना स्वीकृत नक्शे वाली इमारतों को होम लोन देना बंद करते हैं तो ऐसे निर्माण की बिक्री क्षमता सीधे प्रभावित हो सकती है।
लेकिन इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि बैंक निर्देशों को कितनी सख्ती से लागू करते हैं और स्वीकृत नक्शे की डिजिटल सत्यापन व्यवस्था कितनी मजबूत है।
अगर विकास प्राधिकरण और बैंकों के बीच डेटा साझा करने की ऑनलाइन व्यवस्था विकसित होती है तो फर्जी या पुराने नक्शे के आधार पर लोन लेने का जोखिम भी कम किया जा सकता है।
घर खरीदने वालों के लिए बड़ा सबक
कुल मिलाकर विकास प्राधिकरण की नई सख्ती का उद्देश्य **बिना स्वीकृत नक्शे वाले निर्माण को बैंक फाइनेंस से रोकना और अवैध निर्माण पर आर्थिक दबाव बढ़ाना** है।
अब घर खरीदने या बनाने के लिए होम लोन लेने वालों को संपत्ति के कानूनी दस्तावेजों के साथ स्वीकृत बिल्डिंग मैप पर भी विशेष ध्यान देना होगा।
खरीदार के लिए इसका फायदा यह हो सकता है कि किसी संदिग्ध या अनधिकृत संपत्ति की समस्या लोन लेने के शुरुआती चरण में ही सामने आ जाए।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि **रजिस्ट्री, बैंक लोन और नक्शा स्वीकृति तीनों को एक ही चीज न समझें।** घर खरीदने से पहले संबंधित प्राधिकरण से मानचित्र की वैधता जांचना और जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र कानूनी सलाह लेना भविष्य की बड़ी परेशानी से बचा सकता है।
नई सख्ती से होम लोन की प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच बढ़ सकती है, लेकिन लंबे समय में इससे वैध निर्माण को बढ़ावा और अनधिकृत बिल्डिंग कारोबार पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।