लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, चुनाव, धार्मिक आयोजनों और आपदा राहत जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में सहयोग करने वाले प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के स्वयंसेवकों की आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा मजबूत करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार शाम होने वाली प्रदेश कैबिनेट की बैठक में पीआरडी स्वयंसेवकों के दैनिक ड्यूटी भत्ते में बढ़ोतरी और उनके परिवारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने से संबंधित प्रस्ताव रखा जाएगा।

प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर पीआरडी स्वयंसेवकों का दैनिक ड्यूटी भत्ता 500 रुपये से बढ़कर 600 रुपये हो जाएगा। इस निर्णय का लाभ प्रदेश में कार्यरत 31 हजार से अधिक पीआरडी स्वयंसेवकों को मिलने की उम्मीद है। ड्यूटी भत्ते में प्रतिदिन 100 रुपये की वृद्धि से नियमित रूप से सरकारी कार्यों में लगाए जाने वाले जवानों की आमदनी में सुधार होगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 18 अगस्त को गोरखपुर में आयोजित पीआरडी स्वयंसेवक सम्मेलन में ड्यूटी भत्ता बढ़ाने और कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा की थी। अब इन घोषणाओं से संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट के सामने औपचारिक स्वीकृति के लिए रखा जाना है। घोषित योजना के अंतर्गत पीआरडी जवानों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को सालाना पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा मिलने की बात कही गई है।  

पीआरडी स्वयंसेवक पुलिस और प्रशासन के सहायक के रूप में अनेक जिम्मेदारियां संभालते हैं। बड़े मेलों, त्योहारों, सार्वजनिक कार्यक्रमों, यातायात संचालन, चुनाव ड्यूटी और आपदा प्रबंधन के दौरान उनकी सेवाएं ली जाती हैं। इसके बावजूद उनके लिए नियमित कर्मचारियों जैसी कई सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में कैशलेस इलाज की व्यवस्था जवानों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण राहत साबित हो सकती है।

ड्यूटी के दौरान घायल होने अथवा स्वयंसेवक या उसके परिवार के किसी सदस्य के बीमार पड़ने की स्थिति में इलाज का खर्च आर्थिक संकट का कारण बन जाता है। प्रस्तावित कैशलेस व्यवस्था से पात्र लाभार्थियों को सरकारी और सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार की सुविधा मिलने की उम्मीद है। हालांकि योजना की विस्तृत पात्रता, अस्पतालों की सूची और दावा प्रक्रिया से जुड़े नियम कैबिनेट की स्वीकृति तथा शासनादेश जारी होने के बाद पूरी तरह स्पष्ट होंगे।

पीआरडी जवानों के भत्ते में इससे पहले भी कई बार वृद्धि की जा चुकी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वर्ष 2019 तक उन्हें 250 रुपये प्रतिदिन का ड्यूटी भत्ता मिलता था। इसे वर्ष 2019 में बढ़ाकर 375 रुपये और वर्ष 2022 में 395 रुपये किया गया। बाद में भत्ते को बढ़ाकर 500 रुपये प्रतिदिन किया गया था। नया प्रस्ताव लागू होने के बाद यह राशि 600 रुपये प्रतिदिन हो जाएगी। सरकार का कहना है कि पीआरडी जवानों की जिम्मेदारियों और सेवाओं को ध्यान में रखकर उनकी सुविधाओं में लगातार वृद्धि की जा रही है।

मंगलवार शाम पांच बजे मुख्यमंत्री आवास पर प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में डेढ़ दर्जन से अधिक प्रस्तावों पर विचार किए जाने की संभावना है। इनमें न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 900 नई अदालतों के गठन का प्रस्ताव भी शामिल बताया जा रहा है। नई अदालतों के संचालन के लिए 6,656 नियमित और 2,428 आउटसोर्स पदों के सृजन की तैयारी है। कैबिनेट की स्वीकृति मिलने पर न्यायालयों में लंबित मुकदमों के निस्तारण की गति बढ़ाने और न्यायिक ढांचे पर बढ़ते बोझ को कम करने में सहायता मिल सकती है।  

प्रदेश में आबादी और मुकदमों की संख्या बढ़ने के साथ न्यायालयों पर कार्यभार भी लगातार बढ़ रहा है। नई अदालतों के गठन से अलग-अलग जिलों में न्यायिक सेवाओं का विस्तार होने की संभावना है। प्रस्तावित नियमित पदों में न्यायालयों के संचालन से जुड़े विभिन्न श्रेणी के कर्मचारी शामिल हो सकते हैं, जबकि सहायता सेवाओं के लिए आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति की जा सकती है। पदों का श्रेणीवार विवरण और अदालतों की स्थापना वाले जिलों की जानकारी प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद सामने आने की उम्मीद है।

बैठक में किसानों, दुकानदारों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार किए जाने की खबर है। इनमें परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने से संबंधित प्रस्ताव शामिल हो सकता है। इसके अलावा अलग-अलग विभागों की नीतियों, वित्तीय प्रावधानों और प्रशासनिक निर्णयों पर भी कैबिनेट की मुहर लगने की संभावना है।

पीआरडी स्वयंसेवकों के लिए प्रस्तावित निर्णय को सरकार की सामाजिक सुरक्षा नीति के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले प्रदेश सरकार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में भी वृद्धि कर चुकी है। अब पीआरडी जवानों के दैनिक भत्ते में बढ़ोतरी और परिवार सहित कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव जमीनी स्तर पर सरकारी व्यवस्था में सहयोग देने वाले स्वयंसेवकों के लिए राहत लेकर आ सकता है।

हालांकि ड्यूटी भत्ता बढ़ाने और चिकित्सा सुविधा का लाभ वास्तविक रूप से कब से मिलेगा, यह कैबिनेट के निर्णय और उसके बाद जारी होने वाले शासनादेश पर निर्भर करेगा। बैठक से पहले इसे स्वीकृत निर्णय के बजाय प्रस्ताव के रूप में लिखा जाना उचित होगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद सरकार इसके क्रियान्वयन की तारीख, बजट और पात्रता संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सकती है।

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