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नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें पुराने चेक बाउंस मामले में अभी खत्म नहीं हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अभिनेता को राहत देते हुए भुगतान के लिए एक और मौका दिया, लेकिन साथ ही स्पष्ट कर दिया कि यह उनका **आखिरी मौका** है। शीर्ष अदालत ने राजपाल यादव को दो सप्ताह के भीतर **2 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने** का निर्देश दिया है। अदालत ने उनका पासपोर्ट भी जमा कराने को कहा है। इस तरह अभिनेता को फिलहाल तत्काल सरेंडर से राहत मिली हुई है, लेकिन निर्धारित शर्त पूरी नहीं होने पर उनकी मुश्किलें फिर बढ़ सकती हैं।
यह मामला करीब डेढ़ दशक पुराने वित्तीय विवाद और सात चेक बाउंस मामलों से जुड़ा है। राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने सात मामलों में अभिनेता की दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए उन्हें तीन महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई थी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभिनेता की तरफ से भुगतान के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया। अदालत ने उनके पिछले आचरण पर नाराजगी भी जाहिर की और स्पष्ट किया कि बार-बार समय नहीं दिया जा सकता।
दो सप्ताह में जमा करने होंगे 2 करोड़
सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को दो सप्ताह का समय देते हुए कहा कि उन्हें 2 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट अदालत की रजिस्ट्री में जमा करना होगा।
ताजा सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले सप्ताह अदालत ने उन्हें सरेंडर से अंतरिम राहत देते हुए 5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त रखी थी। बाद में अभिनेता की ओर से रकम जमा करने के लिए समय मांगा गया। अब अदालत ने दो सप्ताह में 2 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने का निर्देश देते हुए इसे अंतिम अवसर बताया है।
यानी ₹5 करोड़ वाली खबर पिछले आदेश से जुड़ी थी, जबकि मंगलवार की ताजा सुनवाई में ₹2 करोड़ के डिमांड ड्राफ्ट का निर्देश सामने आया है।
कोर्ट ने कहा- यह आखिरी मौका
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता को लेकर कड़ी टिप्पणी भी की। अदालत ने उनके पिछले व्यवहार को देखते हुए भुगतान के वादे पर संदेह जाहिर किया।
कोर्ट ने हल्के अंदाज में उनके अभिनेता होने का जिक्र करते हुए कहा कि उम्मीद है वह अदालत में अभिनय नहीं कर रहे हैं। इसके साथ ही अदालत ने साफ संकेत दिया कि भुगतान को लेकर अब और मोहलत मिलने की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।
शीर्ष अदालत का रुख बताता है कि राजपाल यादव को इस बार निर्धारित समय में आदेश का पालन करना होगा।
पासपोर्ट भी करना होगा जमा
सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक शर्त के साथ राजपाल यादव को अपना पासपोर्ट भी जमा कराने का निर्देश दिया है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मामले की सुनवाई और अदालत की अनुमति के बिना वह देश से बाहर न जाएं। अदालत के इस आदेश के बाद अभिनेता की विदेश यात्रा भी न्यायिक अनुमति से जुड़ी रहेगी।
राजपाल यादव के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण काम निर्धारित समय के भीतर रकम जमा करना होगा।
आखिर क्या है पूरा मामला?
राजपाल यादव का यह कानूनी विवाद उनकी फिल्म **'अता पता लापता'** से जुड़ा है।
मामले के रिकॉर्ड के मुताबिक साल 2010 में फिल्म के निर्माण और उसे पूरा करने के लिए राजपाल यादव की प्रोडक्शन कंपनी को **मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड** से करीब 5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मिली थी।
बाद में रकम की वापसी को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि भुगतान के लिए जारी किए गए सात चेक बाउंस हो गए। इसके बाद नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत सात अलग-अलग शिकायतें दर्ज की गईं।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद मामला मजिस्ट्रेट कोर्ट, सेशन कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।
सात चेक थे विवाद की वजह
शिकायतकर्ता कंपनी का आरोप था कि राजपाल यादव की तरफ से समझौते के तहत सात चेक दिए गए थे।
रिपोर्ट के मुताबिक प्रत्येक चेक करीब **1.05 करोड़ रुपये** का था। जब ये चेक बैंक में प्रस्तुत किए गए तो उनका भुगतान नहीं हुआ। इसी आधार पर सात अलग-अलग चेक बाउंस केस दर्ज हुए।
चेक बाउंस केवल बैंकिंग विवाद नहीं रहता। निर्धारित कानूनी परिस्थितियों में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत यह आपराधिक कार्यवाही का आधार बन सकता है।
राजपाल यादव के मामले में भी इसी प्रावधान के तहत लंबी कानूनी लड़ाई चली।
2018 में आया था निचली अदालत का फैसला
इस मामले में अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और अन्य संबंधित पक्षों को दोषी ठहराया था।
इसके बाद फैसले को ऊपरी अदालतों में चुनौती दी गई। मामला सेशन कोर्ट और फिर दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा।
लंबी सुनवाई के दौरान भुगतान और समझौते की कोशिशें भी होती रहीं। अदालतों ने अभिनेता को बकाया राशि चुकाने के लिए कई अवसर दिए।
इसके बावजूद विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
दिल्ली हाई कोर्ट ने बरकरार रखी सजा
जुलाई 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
हाई कोर्ट ने सात चेक बाउंस मामलों में राजपाल यादव की दोषसिद्धि को बरकरार रखा और प्रत्येक मामले में तीन महीने की साधारण कैद की सजा तय की। हालांकि अदालत ने निर्देश दिया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
इसका मतलब सात मामलों की सजा को जोड़कर अलग-अलग नहीं काटना था।
हाई कोर्ट ने प्रत्येक मामले में आर्थिक भुगतान का भी आदेश दिया। पहले से शिकायतकर्ता को जारी की गई रकम को बाकी भुगतान की गणना में समायोजित करने का निर्देश दिया गया था।
पहले जमा हो चुके हैं 2.25 करोड़
कानूनी कार्यवाही के दौरान राजपाल यादव की तरफ से कुछ रकम पहले भी जमा की गई है।
दिल्ली हाई कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक लगभग **2.25 करोड़ रुपये** पहले शिकायतकर्ता को दिए जा चुके थे। अदालत ने निर्देश दिया था कि इस रकम को बाकी जुर्माने और मुआवजे की गणना करते समय समायोजित किया जाए।
इसके बावजूद पक्षों के बीच पूरा वित्तीय विवाद खत्म नहीं हुआ और मामला आगे बढ़ता रहा।
फरवरी में तिहाड़ भी जाना पड़ा
भुगतान से जुड़े आदेशों का समय पर पालन नहीं होने के बाद राजपाल यादव को फरवरी 2026 में सरेंडर करना पड़ा था।
वह कुछ समय तिहाड़ जेल में भी रहे। बाद में भुगतान और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर उन्हें अंतरिम राहत मिली।
इसके बाद जुलाई में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले ने अभिनेता के सामने दोबारा जेल जाने की स्थिति पैदा कर दी।
हाई कोर्ट ने उन्हें अपने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए समय दिया था। इसी अवधि में अभिनेता ने शीर्ष अदालत का रुख किया।
पिछले सप्ताह SC ने रखी थी ₹5 करोड़ की शर्त
8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में राजपाल यादव की याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई थी।
उस समय अदालत ने उन्हें सरेंडर करने से अंतरिम छूट देते हुए कहा था कि इसके लिए **5 करोड़ रुपये सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा** करने होंगे।
अभिनेता निर्धारित समय में पूरी रकम जमा नहीं कर पाए और उनकी तरफ से अतिरिक्त समय की मांग की गई।
मंगलवार की सुनवाई में इसी मुद्दे पर अदालत ने एक बार फिर विचार किया। इसके बाद दो सप्ताह में ₹2 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने का अंतिम अवसर दिया गया।
इसलिए ₹5 करोड़ और ₹2 करोड़ को लेकर भ्रम नहीं होना चाहिए। ₹5 करोड़ पिछले सप्ताह की अंतरिम राहत से जुड़ी शर्त थी, जबकि ताजा आदेश में ₹2 करोड़ के डिमांड ड्राफ्ट की बात है।
सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत का रुख काफी सख्त दिखाई दिया।
अदालत ने संकेत दिया कि अभिनेता को पहले भी भुगतान के लिए पर्याप्त मौके मिल चुके हैं। कोर्ट ने उनके पिछले आचरण पर भरोसा न होने की बात कही।
अभिनेता की तरफ से वरिष्ठ वकील ने अदालत को भरोसा दिलाया कि इस बार आदेश का पालन किया जाएगा और निर्धारित रकम जमा कर दी जाएगी।
इसके बाद अदालत ने अंतिम अवसर देने का फैसला किया।
अब राजपाल यादव के सामने क्या विकल्प?
राजपाल यादव के लिए अगले दो सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण हैं। अगर वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक ₹2 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट जमा करते हैं तो उनकी अंतरिम राहत आगे की सुनवाई तक बनी रह सकती है।
अगर आदेश का पालन नहीं होता है तो अदालत आगे क्या कदम उठाती है, यह अगली सुनवाई में स्पष्ट होगा। ऐसे में सीधे यह कहना कि रकम जमा नहीं करते ही उसी क्षण जेल भेज दिया जाएगा, कानूनी रूप से ज्यादा सरलीकरण होगा। लेकिन उनकी सरेंडर से मिली राहत खतरे में पड़ सकती है।
साथ ही उन्हें पासपोर्ट जमा करने के आदेश का भी पालन करना होगा।
15 साल से चल रहा विवाद
फिल्म की फाइनेंसिंग से शुरू हुआ यह मामला अब करीब 15 साल पुराना हो चुका है।
2010 में मिली वित्तीय सहायता, बाद में रकम की वापसी को लेकर विवाद, सात चेक का बाउंस होना और फिर अलग-अलग अदालतों में चली कानूनी प्रक्रिया ने इसे लंबा खींच दिया।
राजपाल यादव की तरफ से कई बार समझौते और भुगतान की कोशिशों का हवाला दिया गया, लेकिन शिकायतकर्ता को पूरी रकम मिलने का मुद्दा लगातार बना रहा।
अब मामला देश की सर्वोच्च अदालत में है।
फिलहाल राहत लेकिन शर्त बेहद सख्त
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से राजपाल यादव को तत्काल राहत जरूर मिली है, लेकिन यह राहत बिना शर्त नहीं है।
उन्हें **दो सप्ताह के भीतर ₹2 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करना होगा और अपना पासपोर्ट भी जमा करना होगा।**
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत ने इसे उनका **अंतिम मौका** बताया है। ऐसे में इस बार आदेश का पालन नहीं होने पर अभिनेता के लिए आगे राहत हासिल करना मुश्किल हो सकता है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि राजपाल यादव निर्धारित समय के भीतर ₹2 करोड़ जमा कर पाते हैं या नहीं और सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई में उनकी याचिका तथा सरेंडर से मिली अंतरिम राहत को लेकर क्या फैसला करता है।
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