गोंडा। उत्तर प्रदेश के गोंडा में भाजपा विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने अपने पिता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के दोबारा संसद पहुंचने की कामना के साथ करीब 35 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा की। गोंडा सदर विधानसभा सीट से विधायक प्रतीक भूषण सिंह अपने समर्थकों के साथ कांवड़ लेकर निकले और पैदल यात्रा पूरी की। इस दौरान उन्होंने भगवान शिव की आराधना की और अपने पिता के राजनीतिक भविष्य को लेकर अपनी इच्छा जाहिर की। धार्मिक आयोजन के बीच उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है।
प्रतीक भूषण सिंह ने कहा कि उनकी मनोकामना है कि उनके पिता बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर संसद पहुंचें। उन्होंने कांवड़ यात्रा को आस्था से जोड़ते हुए कहा कि उन्होंने भगवान शिव से यही प्रार्थना की है। हालांकि बृजभूषण शरण सिंह भविष्य में किस सीट से चुनाव लड़ेंगे या भाजपा उन्हें टिकट देगी या नहीं, इसे लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए विधायक की बात को उनकी व्यक्तिगत कामना के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
35 किलोमीटर पैदल चले प्रतीक भूषण
प्रतीक भूषण सिंह की कांवड़ यात्रा करीब 35 किलोमीटर लंबी रही। वह बड़ी संख्या में समर्थकों और श्रद्धालुओं के साथ यात्रा में शामिल हुए। कांवड़ लेकर पैदल चलते हुए उन्होंने धार्मिक परंपरा का निर्वहन किया।
यात्रा के दौरान जगह-जगह समर्थक भी उनके साथ दिखाई दिए। भगवान शिव के जयकारों के बीच कांवड़ यात्रा आगे बढ़ती रही। धार्मिक यात्रा होने के बावजूद बृजभूषण शरण सिंह को फिर से संसद भेजने की कामना वाले बयान ने इसे राजनीतिक चर्चा से भी जोड़ दिया।
प्रतीक भूषण सिंह ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान उन्होंने अपने पिता के लिए प्रार्थना की है। उनका कहना था कि वह चाहते हैं कि बृजभूषण शरण सिंह दोबारा संसद में दिखाई दें।
पिता के लिए मांगी मन्नत
विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने अपनी यात्रा के उद्देश्य को लेकर कहा कि उन्होंने अपने पिता के दोबारा सांसद बनने की कामना की है।
राजनीतिक परिवार से आने वाले प्रतीक खुद गोंडा सदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक हैं। उनके पिता बृजभूषण शरण सिंह उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और छह बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं।
ऐसे में बेटे की तरफ से पिता के फिर संसद पहुंचने की इच्छा जाहिर किए जाने के बाद उनके भविष्य के चुनावी सफर को लेकर चर्चाएं तेज होना स्वाभाविक है।
लेकिन फिलहाल भाजपा या बृजभूषण शरण सिंह की तरफ से अगले लोकसभा चुनाव को लेकर कोई ऐसी औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है, जिससे यह कहा जा सके कि वह निश्चित रूप से चुनाव मैदान में उतरेंगे।
छह बार सांसद रह चुके हैं बृजभूषण
बृजभूषण शरण सिंह उत्तर प्रदेश के कैसरगंज और आसपास के इलाके में लंबे समय से प्रभावशाली राजनीतिक चेहरा रहे हैं। वह छह बार लोकसभा के सदस्य चुने जा चुके हैं।
उनका राजनीतिक सफर कई दशकों में फैला हुआ है। उन्होंने गोंडा, बलरामपुर और कैसरगंज जैसे संसदीय क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया है। बाद में कैसरगंज उनकी प्रमुख राजनीतिक सीट के रूप में पहचानी जाने लगी।
लंबे समय तक संसद में रहने के कारण पूर्वांचल और अवध के कुछ हिस्सों में उनका राजनीतिक प्रभाव माना जाता रहा है। यही कारण है कि लोकसभा चुनाव में उनके टिकट को लेकर भी काफी चर्चा होती रही है।
2024 में नहीं मिला था टिकट
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बृजभूषण शरण सिंह को कैसरगंज से उम्मीदवार नहीं बनाया था। उनकी जगह पार्टी ने उनके छोटे बेटे **करण भूषण सिंह** को टिकट दिया था।
करण भूषण सिंह ने चुनाव जीतकर परिवार की इस सीट पर राजनीतिक मौजूदगी बरकरार रखी। वह वर्तमान में कैसरगंज से सांसद हैं।
इस तरह परिवार में वर्तमान समय में एक बेटा लोकसभा में और दूसरा उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रतिनिधित्व कर रहा है। करण भूषण सिंह सांसद हैं, जबकि प्रतीक भूषण सिंह गोंडा सदर से विधायक हैं।
अब प्रतीक की ओर से पिता के फिर संसद पहुंचने की कामना किए जाने के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में बृजभूषण शरण सिंह फिर चुनावी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना चाहेंगे।
क्या फिर चुनाव लड़ेंगे बृजभूषण?
यह सवाल फिलहाल राजनीतिक अटकलों तक सीमित है। अगले लोकसभा चुनाव में अभी समय है और भाजपा ने उम्मीदवारों को लेकर किसी तरह की प्रक्रिया सार्वजनिक नहीं की है।
बृजभूषण शरण सिंह भी लगातार सार्वजनिक और सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय दिखाई देते रहे हैं। उनकी राजनीतिक गतिविधियों के कारण समय-समय पर उनके चुनावी भविष्य को लेकर चर्चा होती रहती है।
लेकिन टिकट का फैसला राजनीतिक दल के स्तर पर होता है। इसलिए बेटे की इच्छा या समर्थकों की मांग को भाजपा की चुनावी रणनीति के संकेत के तौर पर पेश करना अभी जल्दबाजी होगी।
प्रतीक भूषण सिंह का बयान इतना जरूर बताता है कि परिवार के स्तर पर बृजभूषण शरण सिंह की संसदीय राजनीति में वापसी की इच्छा मौजूद है।
परिवार की राजनीति में मजबूत मौजूदगी
बृजभूषण शरण सिंह का परिवार वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय है। उनके बेटे प्रतीक भूषण सिंह गोंडा सदर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं।
वहीं करण भूषण सिंह 2024 में कैसरगंज लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार बने और चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।
इस तरह पिता के सक्रिय सांसद नहीं रहने के बावजूद परिवार की राजनीतिक मौजूदगी विधानसभा और लोकसभा दोनों स्तरों पर बनी हुई है।
प्रतीक भूषण सिंह का 35 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा के बाद पिता के लिए फिर संसद पहुंचने की कामना करना इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है।
धार्मिक यात्रा के बीच राजनीतिक संदेश
कांवड़ यात्रा मूल रूप से भगवान शिव की आराधना और धार्मिक आस्था से जुड़ी परंपरा है। श्रद्धालु पवित्र जल लेकर शिव मंदिरों तक पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
प्रतीक भूषण सिंह ने भी अपनी यात्रा को धार्मिक आस्था और मनोकामना से जोड़ा। लेकिन जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से पिता के दोबारा संसद पहुंचने की इच्छा जाहिर की तो इस यात्रा से एक राजनीतिक संदेश भी निकलने लगा।
समर्थकों के बीच उनकी यात्रा और बयान की चर्चा हुई। राजनीतिक रूप से इसे बृजभूषण शरण सिंह की भविष्य की सक्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन इसकी कोई औपचारिक पुष्टि नहीं है।
प्रतीक भूषण भी दो बार के विधायक
प्रतीक भूषण सिंह खुद उत्तर प्रदेश की राजनीति में स्थापित नाम हैं। वह गोंडा सदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक हैं और लगातार दूसरी बार विधानसभा पहुंचे हैं।
अपने क्षेत्र में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक आयोजनों में उनकी सक्रियता रहती है। इस बार 35 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा ने उन्हें एक बार फिर चर्चा में ला दिया।
यात्रा के दौरान पिता के राजनीतिक भविष्य को लेकर दिए गए बयान के कारण यह कार्यक्रम स्थानीय धार्मिक आयोजन से आगे बढ़कर प्रदेश की राजनीतिक खबर बन गया।
अब निगाह बृजभूषण के अगले कदम पर
बृजभूषण शरण सिंह ने लंबे समय तक लोकसभा में प्रतिनिधित्व किया है। 2024 में उनका टिकट कटने के बाद उनके बेटे करण भूषण सिंह को कैसरगंज से मैदान में उतारा गया था और उन्होंने जीत हासिल की।
ऐसे में अगर भविष्य में बृजभूषण दोबारा लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं तो सबसे बड़ा सवाल सीट और भाजपा के टिकट को लेकर होगा। वर्तमान में कैसरगंज से उनके बेटे ही सांसद हैं।
क्या भविष्य में राजनीतिक समीकरण बदलेंगे, बृजभूषण को किसी दूसरी सीट से मौका मिलेगा या वह चुनावी राजनीति से अलग भूमिका में सक्रिय रहेंगे—इन सवालों का जवाब आने वाले समय में मिलेगा।
फिलहाल किसी सीट या उम्मीदवारी को लेकर दावा करना उचित नहीं होगा।
प्रतीक भूषण सिंह ने अपनी तरफ से इच्छा जरूर साफ कर दी है। करीब **35 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा** पूरी करने के दौरान उन्होंने भगवान शिव से कामना की कि उनके पिता बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर संसद पहुंचें।
अब यह कामना भविष्य में राजनीतिक हकीकत बनती है या नहीं, यह भाजपा की रणनीति, बृजभूषण शरण सिंह के फैसले और आने वाले चुनावी समीकरणों पर निर्भर करेगा। फिलहाल बेटे की कांवड़ यात्रा और पिता के लिए मांगी गई मन्नत ने गोंडा से लेकर उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों तक नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।
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