सहारनपुर। पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ रुपये से ज्यादा की कथित नकली करेंसी मिलने के मामले का असर अब जिले की सामान्य बैंकिंग व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। जांच एजेंसियों की सक्रियता और करेंसी चेस्ट पर निगरानी के बीच बैंक शाखाओं ने ग्राहकों के लिए नकदी उपलब्ध रखने का तरीका बदल दिया है। अब जरूरत पड़ने पर सीधे करेंसी चेस्ट से कैश लेने के बजाय आसपास की दूसरी बैंक शाखाओं से रकम मंगाकर काम चलाया जा रहा है।
इस वैकल्पिक व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जांच के कारण आम ग्राहकों को कैश निकालने में परेशानी न हो। सहारनपुर के घंटाघर स्थित सोफिया मार्केट और गंगोह में PNB की करेंसी चेस्ट जांच के दायरे में हैं। इसके चलते नकदी के आवागमन और वितरण में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
मामला बेहद गंभीर है क्योंकि जांच में करेंसी चेस्ट के भीतर कथित रूप से **₹17.29 करोड़ की नकली भारतीय मुद्रा** मिलने की बात सामने आई है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में संदिग्ध नोट बैंकिंग सिस्टम की विभिन्न जांच प्रक्रियाओं से गुजरते हुए करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे।
शाखाओं ने ऐसे बदला कैश मैनेजमेंट
सामान्य तौर पर करेंसी चेस्ट बैंक शाखाओं के लिए नकदी की बड़ी जरूरत पूरी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
किसी शाखा में कैश कम होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत करेंसी चेस्ट से नकदी उपलब्ध कराई जा सकती है। इसी तरह शाखाओं में जरूरत से ज्यादा नकदी होने पर उसे चेस्ट तक पहुंचाया जाता है।
लेकिन सहारनपुर में मौजूदा जांच के बीच इस व्यवस्था में बदलाव दिखाई दे रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक जरूरत पड़ने पर बैंक शाखाएं अब आसपास की दूसरी शाखाओं से संपर्क कर नकदी मंगा रही हैं।
मान लीजिए किसी शाखा में ग्राहकों की निकासी ज्यादा होने के कारण कैश कम हो गया, जबकि नजदीकी दूसरी शाखा के पास अतिरिक्त नकदी उपलब्ध है। ऐसी स्थिति में निर्धारित बैंकिंग प्रक्रिया के तहत शाखाओं के बीच नकदी का प्रबंधन किया जा रहा है।
इससे करेंसी चेस्ट पर निर्भरता फिलहाल कम हुई है।
ग्राहकों को परेशानी से बचाना मकसद
पूरे मामले में आम बैंक ग्राहक के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि क्या उसे बैंक से नकदी मिलने में परेशानी होगी?
फिलहाल सामने आई जानकारी के मुताबिक शाखाओं ने इसी स्थिति से बचने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई है।
आसपास की शाखाओं से नकदी मंगाकर कैश की उपलब्धता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
इसका मतलब यह नहीं है कि जिले में कैश की कमी हो गई है। बदलाव मुख्य रूप से नकदी के प्रबंधन और एक शाखा से दूसरी शाखा तक उसके मूवमेंट से जुड़ा है।
इसलिए इसे पूरे बैंकिंग सिस्टम में नकदी संकट के रूप में पेश करना गलत होगा।
सोफिया मार्केट करेंसी चेस्ट से जुड़ा मामला
पूरा प्रकरण सहारनपुर के सोफिया मार्केट स्थित PNB करेंसी चेस्ट से जुड़ा है।
मामले की शुरुआत कैश में कमी सामने आने के बाद हुई। इसके बाद बैंक स्तर पर जांच और विस्तृत ऑडिट शुरू किया गया।
जैसे-जैसे करेंसी चेस्ट में मौजूद नोटों की जांच आगे बढ़ी, कथित नकली नोटों की मात्रा बढ़ती गई।
शुरुआत में करीब 7.40 करोड़ रुपये की नकली करेंसी मिलने की जानकारी सामने आई थी। बाद में जांच आगे बढ़ने पर यह रकम बढ़कर 17 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जांच केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रही।
₹17.29 करोड़ तक पहुंचा मामला
जांच में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक कथित नकली करेंसी का मूल्य बाद में करीब **₹17.29 करोड़** बताया गया।
रिपोर्टों के अनुसार नकली पाए गए नोट ₹500 के मूल्यवर्ग के थे।
सबसे हैरान करने वाली जानकारी नोटों के बंडल से जुड़ी सामने आई।
ऑडिट के दौरान कथित रूप से ऐसे बंडल मिले जिनमें ऊपर और नीचे असली नोट लगाए गए थे, जबकि बीच में संदिग्ध या नकली नोट मौजूद थे।
यही कारण है कि जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि नोटों के सत्यापन और कैश हैंडलिंग की कई परतों के बावजूद यह स्थिति कैसे बनी।
NIA कर रही मामले की जांच
मामले की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA कर रही है।
जांच एजेंसी ने मामले में पूर्व PNB मैनेजर अमित कुमार को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया है। वह मामले में नामजद आरोपियों में शामिल बताया गया है।
इसके बाद जांच का दायरा और बढ़ाया गया।
NIA कथित नकली नोटों के स्रोत, कैश मूवमेंट और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि नकली करेंसी कहां से आई और बैंकिंग व्यवस्था में किस स्तर पर इसे शामिल किया गया।
कैश की पूरी यात्रा खंगाली जा रही
इस मामले में केवल करेंसी चेस्ट के अंदर मिले नोटों की जांच पर्याप्त नहीं है।
जांच एजेंसियों को नोटों की पूरी यात्रा समझनी होगी।
किस तारीख को कितनी नकदी आई, किस शाखा से आई, किस कर्मचारी ने उसे स्वीकार किया, किसने गिनती की और किस मशीन से नोटों की जांच हुई—इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
RBI और PNB की 21 सदस्यीय संयुक्त टीम ने भी कैश ट्रेल की जांच की है।
टीम ने नकदी की प्राप्ति, गिनती, छंटाई, सत्यापन और करेंसी चेस्ट में जमा किए जाने से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की।
RBI जयपुर भेजी गई रकम भी जांच में
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू RBI के जयपुर कार्यालय भेजी गई नकदी से भी जुड़ा है।
जांच में करीब **₹111 करोड़ की करेंसी** भेजे जाने से संबंधित रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नकदी की गिनती से लेकर बंडल तैयार करने, पैकिंग, सीलिंग और डिस्पैच तक की प्रक्रिया में कौन-कौन शामिल था।
यानी जांच अब केवल 'नकली नोट किसने रखे' जैसे एक सवाल तक सीमित नहीं है।
पूरी कैश सप्लाई और हैंडलिंग चेन को खंगाला जा रहा है।
करेंसी चेस्ट आखिर होता क्या है?
आम बैंक शाखा और करेंसी चेस्ट में बड़ा अंतर होता है।
करेंसी चेस्ट को आसान भाषा में बैंकिंग व्यवस्था का बड़ा कैश स्टोरेज सेंटर समझा जा सकता है।
यहां बड़ी मात्रा में मुद्रा रखी जाती है और जरूरत के अनुसार संबंधित बैंक शाखाओं तक नकदी पहुंचाई जाती है।
बैंकों की शाखाओं में ग्राहकों द्वारा जमा की गई अतिरिक्त नकदी भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत करेंसी चेस्ट तक पहुंच सकती है।
इसी वजह से किसी करेंसी चेस्ट में करोड़ों रुपये की कथित नकली करेंसी मिलने का मामला सामान्य शाखा में एक-दो नकली नोट मिलने से कहीं ज्यादा गंभीर है।
जांच के बीच शाखाओं को चाहिए लगातार कैश
करेंसी चेस्ट जांच के दायरे में होने के बावजूद सामान्य बैंकिंग गतिविधियां बंद नहीं हो सकतीं।
ग्राहक रोजाना बैंक से पैसे निकालते हैं।
व्यापारियों को नकदी की जरूरत होती है। ATM में कैश भरना होता है और बैंक शाखाओं को दिनभर के लेनदेन के लिए पर्याप्त रकम रखनी पड़ती है।
ऐसी स्थिति में बैंक के सामने चुनौती है कि जांच भी प्रभावित न हो और ग्राहकों को नकदी भी मिलती रहे।
इसीलिए शाखाओं के बीच कैश ट्रांसफर की वैकल्पिक व्यवस्था महत्वपूर्ण हो गई है।
एक शाखा में ज्यादा कैश तो दूसरी की जरूरत पूरी
नई व्यवस्था को एक आसान उदाहरण से समझा जा सकता है।
अगर किसी शाखा में दिनभर में बड़ी संख्या में ग्राहकों ने नकदी जमा की और निकासी कम हुई तो उसके पास अतिरिक्त कैश हो सकता है।
वहीं पास की दूसरी शाखा में निकासी ज्यादा होने से कैश कम हो सकता है।
ऐसी स्थिति में अतिरिक्त नकदी वाली शाखा से जरूरत वाली शाखा तक कैश पहुंचाकर बैंकिंग कामकाज जारी रखा जा सकता है।
सहारनपुर में फिलहाल इसी तरह शाखाओं के बीच समन्वय बढ़ने की बात सामने आई है।
ATM पर भी पड़ सकती है नजर
बैंक शाखाओं के कैश मैनेजमेंट का सीधा संबंध ATM से भी होता है।
ATM में पर्याप्त नकदी उपलब्ध रखने के लिए नियमित रूप से कैश रिफिल करना पड़ता है।
अगर करेंसी चेस्ट से सामान्य कैश सप्लाई प्रभावित होती है तो बैंक को ATM और शाखा दोनों की जरूरतों को ध्यान में रखकर वैकल्पिक प्रबंधन करना पड़ सकता है।
हालांकि फिलहाल ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि सहारनपुर में व्यापक ATM कैश संकट पैदा हो गया है।
इसलिए ग्राहकों को अनावश्यक रूप से बड़ी नकदी निकालने की जरूरत नहीं है।
बैंकिंग व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
17 करोड़ रुपये से ज्यादा की कथित नकली करेंसी मिलने से सबसे बड़ा सवाल बैंक की आंतरिक निगरानी और करेंसी सत्यापन व्यवस्था पर खड़ा हुआ है।
करेंसी बैंक तक पहुंचने के बाद कई प्रक्रियाओं से गुजरती है।
नोटों की गिनती, छंटाई, मशीन से जांच, बंडलिंग, रिकॉर्डिंग और सुरक्षित भंडारण जैसी व्यवस्थाएं होती हैं।
इसके बावजूद अगर इतनी बड़ी रकम के नकली नोट चेस्ट के भीतर मिले हैं तो जांच के लिए यह पता लगाना जरूरी है कि किस स्तर पर नियंत्रण विफल हुआ।
RBI-PNB की टीम इसी कैश ट्रेल को खंगाल रही है।
तीन अधिकारियों पर पहले हो चुकी कार्रवाई
मामला सामने आने के बाद PNB ने तीन अधिकारियों को निलंबित किया था।
इनकी वास्तविक जिम्मेदारी या आपराधिक भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही तय होगी।
इसलिए किसी भी निलंबित कर्मचारी को केवल निलंबन के आधार पर दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा।
NIA और दूसरी जांच एजेंसियां दस्तावेज, कैश रिकॉर्ड, बैंक खाते, कॉल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
कर्मचारी की संपत्ति भी जांच के घेरे में
मामले की जांच में एक संविदा कर्मचारी की आर्थिक स्थिति भी एजेंसियों के फोकस में आई है।
रिपोर्टों के अनुसार करीब ₹11 हजार मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारी की संपत्तियों और जीवनशैली की जांच की जा रही है। वह बैंक में ड्राइवर-लोडर के तौर पर तैनात बताया गया है और जांच में उसकी भूमिका की पड़ताल जारी है।
यहां भी यह ध्यान रखना जरूरी है कि संपत्ति होना अपने आप में अपराध का प्रमाण नहीं है।
जांच एजेंसी को यह स्थापित करना होगा कि आय और संपत्ति का स्रोत क्या था और उसका कथित नकली करेंसी मामले से कोई संबंध है या नहीं।
दूसरे करेंसी चेस्ट तक जा सकती है जांच
जांच एजेंसियों के सामने एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या नकली नोट इसी करेंसी चेस्ट के अंदर बदले गए या वे किसी दूसरी शाखा या चेस्ट से यहां पहुंचे थे।
अगर कैश ट्रेल किसी दूसरे करेंसी चेस्ट की तरफ जाता है तो जांच सहारनपुर से बाहर भी फैल सकती है।
इसी वजह से बंडल नंबर, सील, कैश रजिस्टर और नकदी भेजने वाली शाखाओं की जानकारी महत्वपूर्ण हो गई है।
जांच पूरी होने के बाद ही नकली करेंसी के वास्तविक स्रोत और पूरे नेटवर्क की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
ग्राहकों को क्या करना चाहिए?
आम ग्राहक को इस मामले से घबराने की जरूरत नहीं है।
अगर बैंक शाखा से नकदी मिल रही है और सामान्य लेनदेन चल रहा है तो केवल सोशल मीडिया पर चल रही खबरों के कारण बड़ी रकम निकालने की जरूरत नहीं है।
नोट लेते समय सामान्य सावधानी जरूर बरती जा सकती है।
अगर किसी नोट की प्रामाणिकता पर संदेह है तो संबंधित बैंक शाखा से संपर्क किया जा सकता है।
सोशल मीडिया पर चलने वाले ऐसे दावों से भी बचना चाहिए कि PNB से मिलने वाले सभी नोट संदिग्ध हैं। ऐसी बात का कोई आधार नहीं है।
बैंक शाखाओं के बीच बढ़ा समन्वय
फिलहाल सहारनपुर में सबसे बड़ा बदलाव कैश मैनेजमेंट में दिखाई दे रहा है।
घंटाघर के सोफिया मार्केट और गंगोह स्थित PNB करेंसी चेस्ट पर जांच एजेंसी की सक्रियता के बीच शाखाएं नकदी की जरूरत पूरी करने के लिए एक-दूसरे पर ज्यादा निर्भर हो गई हैं।
जिस शाखा के पास अतिरिक्त कैश है, वहां से जरूरत वाली शाखा तक रकम पहुंचाकर ग्राहकों की मांग पूरी करने की कोशिश की जा रही है।
इस व्यवस्था का मकसद साफ है—**जांच अपनी जगह जारी रहे लेकिन सामान्य बैंक ग्राहक को कैश की समस्या न हो।**
अब पूरे मामले में NIA की जांच पर नजर है। एजेंसी को यह पता लगाना है कि कथित ₹17.29 करोड़ की नकली करेंसी बैंकिंग सिस्टम में कैसे दाखिल हुई, कितने लोगों की भूमिका रही और क्या इसका नेटवर्क सहारनपुर से बाहर तक फैला था।
जब तक जांच पूरी नहीं होती, आरोपों को अंतिम निष्कर्ष के रूप में लिखना उचित नहीं होगा। लेकिन इतना जरूर है कि इस मामले ने बैंकिंग सिस्टम में नकदी की गिनती, सत्यापन, बंडलिंग और करेंसी चेस्ट की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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