उत्तर प्रदेश :आगरा में रेलवे कर्मचारियों और मेडिकल टीम की तत्परता ने एक गर्भवती महिला और उसके नवजात की सुरक्षित जिंदगी सुनिश्चित कर दी। साबरमती-आगरा एक्सप्रेस में सफर कर रही एक गर्भवती महिला को यात्रा के दौरान अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। स्थिति गंभीर होती देख रेलवे को तत्काल सूचना दी गई, जिसके बाद विभिन्न विभागों ने तेजी से समन्वय स्थापित किया। ट्रेन के आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पहुंचने से पहले ही महिला ने कोच के भीतर एक स्वस्थ शिशु को जन्म दे दिया। समय पर मिली चिकित्सीय सहायता के कारण मां और नवजात दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं।
जानकारी के अनुसार फर्रुखाबाद निवासी गर्भवती महिला अपने परिवार के साथ गाड़ी संख्या 12548 साबरमती-आगरा एक्सप्रेस के एस-2 कोच में यात्रा कर रही थीं। सफर के दौरान अचानक उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। परिजनों और सहयात्रियों ने तुरंत रेलवे की हेल्पलाइन पर सूचना दी। सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन सक्रिय हो गया और संबंधित टिकट जांच कर्मचारी (टीटीई) को तत्काल महिला के कोच में भेजा गया। साथ ही आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर मेडिकल टीम को पूरी तैयारी के साथ मौजूद रहने के निर्देश दिए गए।
ट्रेन अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही थी और इसी दौरान महिला की प्रसव पीड़ा तेज हो गई। आगरा स्टेशन पहुंचने से पहले ही महिला ने कोच में एक स्वस्थ शिशु को जन्म दे दिया। नवजात की पहली किलकारी सुनते ही पूरे डिब्बे का माहौल बदल गया। कुछ समय पहले तक चिंता और तनाव में बैठे यात्रियों ने राहत की सांस ली और मां-बच्चे की सलामती पर खुशी जताई। कई यात्रियों ने रेलवे कर्मचारियों और सहयात्रियों की मदद की सराहना भी की।
जैसे ही ट्रेन आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या पांच पर पहुंची, पहले से तैयार मेडिकल टीम ने तुरंत महिला और नवजात की जांच शुरू कर दी। रेलवे चिकित्सक डॉ. अवंतिका सिन्हा और स्टाफ नर्स सिमरन शर्मा ने दोनों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच में मां और शिशु दोनों पूरी तरह स्वस्थ पाए गए। प्राथमिक उपचार देने के बाद एंबुलेंस की सहायता से दोनों को रेलवे अस्पताल भेजा गया, जहां आगे की चिकित्सा देखभाल उपलब्ध कराई गई।
महिला के पति ने रेलवे प्रशासन, चिकित्सकों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समय पर सहायता नहीं मिलती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। उन्होंने कहा कि रेलवे की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई की वजह से मां और बच्चे दोनों सुरक्षित हैं। यह सफर उनके परिवार के लिए जीवनभर की याद बन गया।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला। हेल्पलाइन पर सूचना मिलने के तुरंत बाद टिकट जांच कर्मचारी, स्टेशन प्रशासन और मेडिकल टीम ने बिना समय गंवाए अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। इसी का परिणाम रहा कि आपात स्थिति में भी किसी तरह की बड़ी परेशानी नहीं हुई और सुरक्षित प्रसव संभव हो सका।
इसी बीच आगरा से ही स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एक दूसरी घटना भी सामने आई, जिसने एंबुलेंस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। जिला महिला चिकित्सालय (लेडी लायल) में एक गर्भवती महिला ने अस्पताल की सीढ़ियों पर बच्चे को जन्म दिया। परिजनों का आरोप है कि प्रसव पीड़ा शुरू होने पर उन्होंने सरकारी एंबुलेंस सेवा को फोन किया, लेकिन काफी इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। मजबूरी में उन्हें प्रसूता को ऑटो रिक्शा से अस्पताल ले जाना पड़ा।
बताया गया कि रास्ते में ही महिला का आंशिक प्रसव हो गया। अस्पताल पहुंचने पर जब परिजन उन्हें अंदर ले जा रहे थे, तभी अस्पताल की सीढ़ियों पर बच्चे का जन्म हो गया। सूचना मिलते ही डॉक्टर और नर्सें मौके पर पहुंचीं तथा सुरक्षित तरीके से प्रसव प्रक्रिया पूरी कराई। इसके बाद जच्चा और बच्चा दोनों को वार्ड में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार दोनों की हालत फिलहाल स्थिर और स्वस्थ है।
आगरा में सामने आई इन दोनों घटनाओं ने स्वास्थ्य सेवाओं की दो अलग-अलग तस्वीरें पेश की हैं। एक ओर रेलवे की त्वरित कार्रवाई और बेहतर समन्वय ने चलती ट्रेन में सुरक्षित प्रसव कराकर मिसाल पेश की, वहीं दूसरी ओर समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने के आरोपों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं के लिए आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं का समय पर उपलब्ध होना बेहद जरूरी है, क्योंकि थोड़ी सी देरी भी मां और नवजात दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।