अंबेडकरनगर में बाढ़ आपदा से मुकाबले की तैयारी, जवानों को प्रशिक्षण

Update: 2026-07-28 11:10 GMT

अंबेडकरनगर। उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले में सरयू नदी के जलस्तर में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि अभी जिले में बाढ़ का खतरा नहीं है, लेकिन प्रशासन ने संभावित आपदा से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। नदी का जलस्तर पिछले 24 घंटे में सात सेंटीमीटर बढ़ा है। इसके बाद प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों से जुड़े कर्मचारियों एवं स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।

जानकारी के अनुसार, रविवार दोपहर तीन बजे से सोमवार इसी समय तक सरयू नदी के जलस्तर में सात सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। वर्तमान में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 44 सेंटीमीटर नीचे बना हुआ है। खतरे का निशान 92.73 मीटर निर्धारित है। प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि अभी बाढ़ जैसी स्थिति नहीं बनी है, लेकिन लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है।

सरयू नदी के उत्तरी हिस्से में स्थित बस्ती जिले की ओर कटान तेज होने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में नदी किनारे रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन सतर्क है। अधिकारियों द्वारा लगातार नदी के जलस्तर की निगरानी की जा रही है और संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

संभावित बाढ़ आपदा से निपटने के लिए आलापुर तहसील में उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में सिविल डिफेंस वालंटियर्स और आपदा मित्रों का संयुक्त प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस बैठक में पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौजूद रहे। प्रशिक्षण का उद्देश्य बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों को प्रभावी तरीके से संचालित करना था।

उपजिलाधिकारी ने प्रशिक्षण के दौरान कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय त्वरित निर्णय, बेहतर समन्वय और मानवीय दृष्टिकोण के साथ काम करना बेहद जरूरी होता है। उन्होंने स्वयंसेवकों से अपील की कि वे प्रशासन के साथ तालमेल बनाकर काम करें और जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द सहायता पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाएं।

प्रशिक्षण में स्वयंसेवकों को बाढ़ से पहले की तैयारियों, बाढ़ के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और राहत-बचाव कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि जलभराव वाले इलाकों में जाने से बचें और तेज बहाव वाले पानी में प्रवेश न करें। साथ ही बिजली के तारों और खंभों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए।

आपदा मित्रों और वालंटियर्स को बचाव उपकरणों के इस्तेमाल की जानकारी भी दी गई। इसमें लाइफ जैकेट, लाइफ बाय, रस्सी, स्ट्रेचर, टॉर्च और प्राथमिक उपचार किट जैसे उपकरण शामिल रहे। उन्हें बताया गया कि आपदा के समय इन उपकरणों का सुरक्षित और सही तरीके से उपयोग किस प्रकार किया जाए।

प्रशिक्षण के दौरान स्वयंसेवकों को यह भी बताया गया कि आपदा की स्थिति में अफवाहों से बचना चाहिए और केवल प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए। अधिकारियों ने कहा कि राहत कार्यों में धैर्य, संवेदनशीलता और सेवा भावना सबसे महत्वपूर्ण होती है।

इसके अलावा प्रशिक्षण कार्यक्रम में आपातकालीन चिकित्सा सहायता की जानकारी भी दी गई। हृदय गति रुकने और सांस बंद होने जैसी गंभीर परिस्थितियों में जीवन बचाने के लिए प्राथमिक उपचार और सीपीआर तकनीक का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया। स्वयंसेवकों को चेस्ट कंप्रेशन की सही प्रक्रिया समझाई गई, ताकि जरूरत पड़ने पर वे बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल मदद पहुंचा सकें।

प्रशासन का कहना है कि सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लगातार निगरानी जारी रहेगी। अभी स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए सभी तैयारियां पूरी रखी जा रही हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

Tags:    

Similar News