मीरजापुर। गोआश्रय स्थलों में रखे गए बेसहारा पशुओं को अब वर्षभर हरा और पौष्टिक चारा उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए उत्तर प्रदेश चारा विकास नीति के तहत किसानों को नेपियर घास की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में पशुपालन विभाग ने नेपियर घास की खेती के लिए 15 किसानों का चयन किया है। योजना के तहत चयनित किसानों को नेपियर रूट्स उपलब्ध कराए जाएंगे, जिनका रोपण निर्धारित कृषि भूमि में किया जाएगा।

विभाग की इस पहल का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर हरे चारे का उत्पादन बढ़ाना और गोआश्रय स्थलों में संरक्षित पशुओं के लिए नियमित चारे की व्यवस्था करना है। जनपद में संचालित 48 गोआश्रय स्थलों में करीब 14,850 बेसहारा पशु रखे गए हैं। योजना के माध्यम से इन सभी पशुओं को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रत्येक किसान को मिलेंगे छह हजार नेपियर रूट्स

योजना के तहत चयनित प्रत्येक किसान को छह हजार नेपियर रूट्स उपलब्ध कराए जाएंगे। इनका रोपण करीब 0.2 हेक्टेयर भूमि में किया जाएगा। पशुपालन विभाग किसानों को नेपियर की खेती से संबंधित आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराएगा, ताकि घास का उत्पादन बेहतर तरीके से हो सके।

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. भूपेंद्र कुमार पाठक ने बताया कि चयनित किसानों द्वारा लगभग 0.2 हेक्टेयर भूमि में नेपियर का रोपण किया जाएगा। इस पहल से गोआश्रय स्थलों में हरे चारे की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

एक बार रोपण, पांच साल या उससे अधिक उत्पादन

नेपियर घास की खासियत यह है कि इसे हर साल दोबारा लगाने की आवश्यकता नहीं होती। विभाग के अनुसार, एक बार रोपण के बाद लगभग पांच वर्ष या उससे अधिक समय तक हरे चारे का उत्पादन लिया जा सकता है।

इससे किसानों को हर वर्ष दोबारा रोपण करने के खर्च और मेहनत से राहत मिलेगी। वहीं, गोआश्रय स्थलों के लिए भी हरे चारे का लंबे समय तक एक स्थायी स्रोत तैयार हो सकेगा।

नेपियर की इसी विशेषता को देखते हुए इसे बेसहारा पशुओं के लिए वर्षभर चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना में शामिल किया गया है।

48 गोआश्रय स्थलों में 14,850 पशु

जिले में 48 गोआश्रय स्थल संचालित हैं, जहां करीब 14,850 बेसहारा पशुओं को संरक्षित किया गया है। इतनी बड़ी संख्या में पशुओं के लिए प्रतिदिन पर्याप्त चारे की व्यवस्था करना विभाग के लिए बड़ी जिम्मेदारी है।

पशुओं के आहार में हरे चारे का महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर नेपियर घास का उत्पादन होने से गोआश्रय स्थलों को हरे चारे की आपूर्ति में मदद मिलने की उम्मीद है।

विभाग का प्रयास है कि चारे की उपलब्धता को अधिक व्यवस्थित बनाया जाए, ताकि पशुओं को केवल सूखे चारे पर निर्भर न रहना पड़े।

किसानों को भी मिलेगा फायदा

योजना से किसानों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। नेपियर घास की खेती लंबे समय तक उत्पादन देने वाली होने के कारण किसानों के लिए चारा उत्पादन का उपयोगी विकल्प बन सकती है।

एक बार रोपण के बाद कई वर्षों तक उत्पादन मिलने से बार-बार बुआई और रोपण की आवश्यकता नहीं होगी। इससे खेती में लगने वाला श्रम और खर्च कम हो सकता है।

उत्तर प्रदेश चारा विकास नीति के तहत किसानों को हरे चारे की खेती से जोड़ने का उद्देश्य भी यही है कि स्थानीय स्तर पर चारे का उत्पादन बढ़े और पशुपालन क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिले।

पशुओं के पोषण पर जोर

गोआश्रय स्थलों में पशुओं की संख्या अधिक होने के कारण उनके पोषण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। हरा चारा पशुओं के आहार को पौष्टिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

नेपियर घास की उपलब्धता से गोआश्रय स्थलों में पशुओं के भोजन में हरे चारे को शामिल करने में सुविधा होगी। इससे वर्षभर चारे की उपलब्धता बनाए रखने की कोशिश की जा सकेगी।

विशेषकर ऐसे समय में जब मौसम या अन्य कारणों से सामान्य हरे चारे की उपलब्धता प्रभावित होती है, नेपियर घास एक वैकल्पिक और लंबे समय तक चलने वाला स्रोत साबित हो सकती है।

चारे की स्थानीय व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश

गोआश्रय स्थलों के लिए बाहर से चारे की व्यवस्था करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है। परिवहन, लागत और उपलब्धता जैसे कारणों से नियमित आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में स्थानीय किसानों के खेतों में चारा उत्पादन कराने से आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।

नेपियर घास की खेती के जरिए विभाग स्थानीय स्तर पर ही हरे चारे का उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। इससे गोआश्रय स्थलों की चारे की जरूरत को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

भविष्य में बढ़ सकता है दायरा

वित्तीय वर्ष 2026-27 में 15 किसानों को योजना से जोड़कर इसकी शुरुआत की जा रही है। यदि नेपियर घास का उत्पादन उम्मीद के मुताबिक रहा और गोआश्रय स्थलों को इसका नियमित लाभ मिला तो भविष्य में किसानों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

अधिक किसानों के जुड़ने से नेपियर का उत्पादन बढ़ेगा और ज्यादा गोआश्रय स्थलों तक हरे चारे की आपूर्ति की जा सकेगी। इससे बेसहारा पशुओं के लिए चारे की स्थायी व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलेगी।

पांच साल तक लगातार मिल सकेगा हरा चारा

नेपियर घास की लंबे समय तक उत्पादन देने की क्षमता इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। एक बार रोपण के बाद करीब पांच वर्ष या उससे अधिक समय तक हरा चारा मिलने की संभावना है। इससे किसानों को हर साल दोबारा रोपण की जरूरत नहीं पड़ेगी।

विभाग को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से पशुओं को वर्षभर पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध कराने का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। साथ ही चारे की उपलब्धता को लेकर गोआश्रय स्थलों पर आने वाली चुनौतियां भी कम होंगी।

योजना से पशु संरक्षण व्यवस्था को मिलेगी मजबूती

उत्तर प्रदेश चारा विकास नीति के तहत नेपियर घास की खेती को बढ़ावा देने की पहल गोआश्रय स्थलों में संरक्षित बेसहारा पशुओं के लिए बेहतर चारा व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 15 चयनित किसानों को छह-छह हजार नेपियर रूट्स उपलब्ध कराकर करीब 0.2 हेक्टेयर भूमि में इसका रोपण कराया जाएगा।

जिले के 48 गोआश्रय स्थलों में रखे गए 14,850 पशुओं को इस पहल से लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है। यदि योजना के तहत पर्याप्त उत्पादन और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित होती है, तो आने वाले वर्षों में यह मॉडल चारे की समस्या से निपटने में उपयोगी साबित हो सकता है। अब विभाग की निगाहें नेपियर के उत्पादन और गोआश्रय स्थलों तक इसकी प्रभावी आपूर्ति पर रहेंगी।

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