बनारस। रेलवे में लंबे समय से चली आ रही मांगों की अनदेखी से नाराज रेलकर्मियों ने गुरुवार को बनारस रेल मंडल कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया। एनई रेलवे मेंस कांग्रेस (एनईआरएमसी) के आह्वान पर आयोजित आंदोलन में बड़ी संख्या में रेलकर्मी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने रेलवे के निगमीकरण और निजीकरण पर तत्काल रोक लगाने के साथ पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने की मांग उठाई।

धरने के दौरान रेल कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आवाज बुलंद की और रेलवे प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। कर्मचारियों का कहना था कि लंबे समय से उनकी समस्याओं और मांगों को संबंधित स्तर पर उठाया जा रहा है, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।

बड़ी संख्या में कर्मचारी हुए एकत्र

मांगों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए बनारस रेल मंडल के विभिन्न क्षेत्रों और विभागों से बड़ी संख्या में रेलकर्मी मंडल कार्यालय के सामने पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और संगठन के पदाधिकारियों ने आंदोलन के उद्देश्य और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।

आंदोलनकारियों ने कहा कि रेलवे देश की महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवा है और इसके संचालन में कर्मचारियों की भूमिका बेहद अहम है। ऐसे में रेलवे से जुड़े नीतिगत फैसलों में कर्मचारियों के हितों और भविष्य को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

निजीकरण और निगमीकरण के खिलाफ आवाज

धरना-प्रदर्शन के दौरान रेलवे के निगमीकरण और निजीकरण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। कर्मचारियों का कहना था कि रेलवे जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवा के निजीकरण से कर्मचारियों के रोजगार और सेवा शर्तों पर असर पड़ सकता है।

प्रदर्शनकारियों ने रेलवे के विभिन्न कार्यों और सेवाओं में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि रेलवे को सार्वजनिक क्षेत्र की संस्था के रूप में मजबूत किया जाना चाहिए और इसके संचालन में कर्मचारियों की भूमिका को सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

संगठन के नेताओं ने कहा कि रेलवे के निजीकरण या निगमीकरण की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों का कर्मचारियों की ओर से विरोध जारी रहेगा।

पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग

रेल कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई। कर्मचारियों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा उनके भविष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए पेंशन व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

धरने में वक्ताओं ने कहा कि पुरानी पेंशन योजना की बहाली कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में शामिल है। संगठन लंबे समय से इस मुद्दे को विभिन्न मंचों पर उठाता रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन के लिए भरोसेमंद पेंशन व्यवस्था आवश्यक है।

एनईआरएमसी महामंत्री ने रेलवे प्रशासन पर साधा निशाना

धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए एनई रेलवे मेंस कांग्रेस के महामंत्री अखिलेश पांडेय ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को रेल प्रशासन लगातार अनदेखा कर रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं को कई बार प्रशासन के सामने रखा गया है, लेकिन उनका समाधान नहीं किया जा रहा है।

अखिलेश पांडेय ने कर्मचारियों से एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों और हितों से जुड़े मुद्दों पर संगठन पीछे नहीं हटेगा।

कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेने की मांग

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि रेलवे में कर्मचारियों की संख्या, कार्य परिस्थितियों और सेवा से जुड़े कई मुद्दे लंबे समय से चर्चा में हैं। कर्मचारियों की जिम्मेदारियां लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई हैं, लेकिन उनके हितों से जुड़े विषयों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

कर्मचारियों का कहना था कि रेलवे के सुचारु संचालन में कर्मचारियों की भूमिका केंद्रीय है। ट्रेन परिचालन से लेकर तकनीकी, वाणिज्यिक और अन्य विभागों तक हजारों कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। ऐसे में उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान जरूरी है।

संगठन ने एकजुटता का दिया संदेश

धरने के माध्यम से एनईआरएमसी ने कर्मचारियों के बीच एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की। बड़ी संख्या में कर्मचारियों की मौजूदगी को संगठन ने अपनी मांगों के प्रति समर्थन के रूप में प्रस्तुत किया।

संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दों पर सभी रेलकर्मियों को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। उन्होंने कहा कि मांगों को लेकर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखा जाएगा।

आंदोलन आगे बढ़ाने की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि रेलवे प्रशासन कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं करता है तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है। कर्मचारियों ने निगमीकरण और निजीकरण पर रोक तथा पुरानी पेंशन योजना की बहाली को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया।

धरना-प्रदर्शन के दौरान संगठन के नेताओं ने कहा कि कर्मचारियों की मांगें केवल व्यक्तिगत हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रेलवे के भविष्य और सार्वजनिक सेवा व्यवस्था से भी जुड़ी हैं।

मांगों पर फैसले का इंतजार

बनारस रेल मंडल कार्यालय के सामने हुए इस प्रदर्शन के बाद अब रेलकर्मियों की नजर प्रशासन की प्रतिक्रिया पर है। कर्मचारियों और संगठन का कहना है कि लंबे समय से उठाई जा रही मांगों पर ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए।

गुरुवार को हुए धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में रेलकर्मियों की भागीदारी ने यह संकेत दिया कि निगमीकरण, निजीकरण और पेंशन व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर कर्मचारियों के बीच असंतोष बना हुआ है। संगठन ने भी साफ कर दिया है कि मांगों की अनदेखी जारी रहने पर आंदोलन को आगे बढ़ाने से पीछे नहीं हटेगा।

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