- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- एयरपोर्ट पर घंटों फंसे...
उत्तर प्रदेश
एयरपोर्ट पर घंटों फंसे यात्री पायलट ने उड़ान भरने से किया इनकार
Ratna Netam
10 Sept 2026 2:44 PM IST

x
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर इंडिगो की एक फ्लाइट को लेकर यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कोलकाता जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे 179 यात्रियों ने चेक-इन की प्रक्रिया पूरी कर ली थी और विमान के रवाना होने का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच पायलट और चालक दल ने अपनी निर्धारित ड्यूटी अवधि पूरी होने का हवाला देते हुए विमान को आगे उड़ाने से इनकार कर दिया। अचानक उड़ान रद्द होने की जानकारी मिलने के बाद यात्रियों का गुस्सा फूट पड़ा और एयरपोर्ट परिसर में हंगामे जैसी स्थिति बन गई।
मामला 23 दिसंबर 2025 का है। कोलकाता से यात्रियों को लेकर इंडिगो की फ्लाइट को दोपहर करीब एक बजे वाराणसी पहुंचना था। खराब मौसम और कोहरे की वजह से विमान अपने निर्धारित समय पर नहीं पहुंच पाया। करीब चार घंटे की देरी के बाद विमान शाम करीब पांच बजे वाराणसी एयरपोर्ट पहुंचा।
यही विमान वाराणसी से यात्रियों को लेकर वापस कोलकाता जाने वाला था। कोलकाता जाने वाले 179 यात्री एयरपोर्ट पहुंच चुके थे। यात्रियों ने चेक-इन भी करा लिया और फ्लाइट के रवाना होने का इंतजार करने लगे।
लेकिन विमान के देर से वाराणसी पहुंचने के कारण चालक दल की निर्धारित ड्यूटी अवधि प्रभावित हो गई। आखिरकार पायलट और केबिन क्रू ने अपनी ड्यूटी टाइम लिमिट पूरी होने का हवाला देते हुए आगे उड़ान संचालित करने से इनकार कर दिया।
पायलट ने क्यों नहीं उड़ाया विमान?
पायलट के उड़ान भरने से इनकार की वजह कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं बल्कि विमानन सुरक्षा से जुड़ा नियम था। एयरलाइन पायलट और केबिन क्रू के लिए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन यानी FDTL लागू होती है।
इन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अत्यधिक थकान की स्थिति में कोई पायलट विमान न उड़ाए। लंबे समय तक ड्यूटी करने के बाद थकान पायलट की सतर्कता और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। विमानन क्षेत्र में छोटी सी गलती भी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है, इसलिए चालक दल के काम और आराम की अवधि को नियंत्रित किया जाता है।
वाराणसी एयरपोर्ट के तत्कालीन निदेशक पुनीत गुप्ता ने भी घटना के बाद बताया था कि पायलट और केबिन क्रू के लिए FDTL नियम लागू होते हैं। उनका उद्देश्य चालक दल को अत्यधिक थकान की स्थिति में उड़ान भरने से रोकना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
कोहरे ने बिगाड़ दिया पूरा शेड्यूल
पूरे घटनाक्रम की शुरुआत खराब मौसम के कारण हुई थी। वाराणसी में कोहरे के कारण उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ। कोलकाता से वाराणसी आने वाली फ्लाइट को दोपहर करीब एक बजे पहुंचना था, लेकिन वह लगभग चार घंटे देरी से शाम पांच बजे पहुंची।
इस देरी ने आगे की पूरी उड़ान योजना बिगाड़ दी। विमान को वाराणसी से वापस कोलकाता जाना था, लेकिन तब तक पायलट और चालक दल की ड्यूटी अवधि काफी बढ़ चुकी थी।
यानी जिस फ्लाइट को समय पर वाराणसी पहुंचकर वापस कोलकाता जाना था, उसकी पहली यात्रा में हुई देरी ने दूसरी उड़ान को प्रभावित कर दिया।
179 यात्रियों ने करा लिया था चेक-इन
यात्रियों की नाराजगी की बड़ी वजह यह थी कि उन्हें काफी समय तक उड़ान का इंतजार करना पड़ा। 179 यात्री कोलकाता जाने के लिए चेक-इन कर चुके थे और टर्मिनल में मौजूद थे।
उन्हें उम्मीद थी कि विमान जल्द रवाना होगा। लेकिन काफी इंतजार के बाद पता चला कि चालक दल की ड्यूटी अवधि खत्म होने के कारण विमान अब कोलकाता के लिए उड़ान नहीं भर सकेगा।
फ्लाइट रद्द होने की सूचना मिलते ही यात्रियों का धैर्य जवाब देने लगा। कई यात्रियों ने एयरलाइन की व्यवस्था पर नाराजगी जाहिर की और एयरपोर्ट पर हंगामे जैसी स्थिति बन गई।
यात्रियों का सवाल था कि यदि पायलट और चालक दल की ड्यूटी अवधि खत्म होने वाली थी तो एयरलाइन ने समय रहते वैकल्पिक चालक दल की व्यवस्था क्यों नहीं की।
एयरलाइन अधिकारियों को संभालनी पड़ी स्थिति
यात्रियों का विरोध बढ़ने पर एयरलाइन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने यात्रियों को फ्लाइट रद्द होने की वजह समझाई और उन्हें शांत कराने की कोशिश की।
अधिकारियों के सामने तत्काल चुनौती उन यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की थी जिन्हें उसी दिन कोलकाता पहुंचना था। इनमें कई ऐसे यात्री भी हो सकते थे जिनके आगे के कार्यक्रम और जरूरी काम उड़ान के समय से जुड़े थे।
फ्लाइट के अचानक रद्द होने से यात्रियों की पूरी यात्रा योजना प्रभावित हो गई।
यात्रियों के लिए होटल की व्यवस्था
जब यह स्पष्ट हो गया कि विमान उस रात कोलकाता नहीं जा सकेगा तो यात्रियों को अलग-अलग होटलों में ठहराने की व्यवस्था की गई। यात्रियों को एयरपोर्ट से होटल भेजा गया।
अगली उपलब्ध व्यवस्था के जरिए उन्हें कोलकाता भेजने की तैयारी की गई। रिपोर्ट के मुताबिक बाद में यात्रियों को कोलकाता जाने वाली उड़ान से रवाना किया गया।
हालांकि होटल उपलब्ध करा दिए जाने के बावजूद यात्रियों की नाराजगी कम नहीं हुई क्योंकि कई लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ा और उनकी यात्रा निर्धारित समय पर पूरी नहीं हो सकी।
पायलट का फैसला सुरक्षा नियमों के अनुरूप
पहली नजर में पायलट का विमान उड़ाने से इनकार करना असामान्य लग सकता है, लेकिन विमानन क्षेत्र में पायलट की थकान को गंभीर सुरक्षा जोखिम माना जाता है।
पायलट को उड़ान के दौरान मौसम, एयर ट्रैफिक कंट्रोल के निर्देश, विमान की तकनीकी स्थिति और आपातकालीन परिस्थितियों सहित कई पहलुओं पर लगातार नजर रखनी होती है। इसके लिए मानसिक और शारीरिक रूप से सतर्क रहना जरूरी है।
यही कारण है कि चालक दल के लिए अधिकतम ड्यूटी अवधि और न्यूनतम आराम अवधि जैसे नियम निर्धारित किए जाते हैं। ड्यूटी की स्वीकार्य सीमा पूरी हो जाने पर चालक दल को आगे उड़ान संचालित करने से रोका जा सकता है।
इस मामले में भी एयरपोर्ट प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि FDTL व्यवस्था उड़ान सुरक्षा से समझौता रोकने के लिए लागू है।
यात्रियों का सवाल वैकल्पिक क्रू क्यों नहीं?
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल एयरलाइन की ऑपरेशनल व्यवस्था को लेकर उठा। यात्रियों के लिए पायलट की ड्यूटी अवधि पूरी होना तकनीकी या प्रशासनिक विषय हो सकता है, लेकिन उनकी परेशानी का कारण यह था कि इसके बाद तत्काल दूसरा चालक दल उपलब्ध नहीं कराया जा सका।
यदि एयरपोर्ट पर वैकल्पिक पायलट और केबिन क्रू उपलब्ध होते तो संभव था कि विमान को नए चालक दल के साथ रवाना किया जाता। लेकिन उस समय वाराणसी में वैकल्पिक चालक दल उपलब्ध नहीं होने के कारण विमान को ग्राउंड करना पड़ा।
यही वजह थी कि यात्रियों को रात में होटल भेजना पड़ा।
मौसम खराब होने पर बढ़ती है चुनौती
एयरलाइन कंपनियों के लिए खराब मौसम के दौरान ऐसी परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं। कोहरा, तेज बारिश या अन्य मौसम संबंधी कारणों से एक विमान में हुई कुछ घंटों की देरी आगे की कई उड़ानों के शेड्यूल को प्रभावित कर सकती है।
एक ही विमान और चालक दल दिनभर अलग-अलग शहरों के बीच कई उड़ानें संचालित कर सकते हैं। पहली या दूसरी उड़ान में लंबी देरी होने पर बाद की उड़ानों तक पहुंचते-पहुंचते चालक दल की निर्धारित ड्यूटी अवधि समाप्त हो सकती है।
ऐसी स्थिति में एयरलाइन को वैकल्पिक क्रू की व्यवस्था करनी पड़ती है। वैकल्पिक क्रू उपलब्ध नहीं होने पर फ्लाइट रद्द या अगले दिन के लिए पुनर्निर्धारित की जा सकती है।
सुरक्षा और सुविधा के बीच फंसे यात्री
वाराणसी एयरपोर्ट का यह मामला विमानन क्षेत्र में सुरक्षा और यात्री सुविधा के बीच संतुलन की चुनौती को भी दिखाता है। एक तरफ यात्रियों का समय और उनकी यात्रा योजना महत्वपूर्ण है, वहीं दूसरी तरफ थके हुए पायलट से विमान उड़वाना सुरक्षा के लिहाज से उचित विकल्प नहीं हो सकता।
इसलिए यात्रियों की नाराजगी मुख्य रूप से वैकल्पिक व्यवस्था और लंबी देरी को लेकर थी, जबकि पायलट द्वारा ड्यूटी अवधि पूरी होने के बाद उड़ान से इनकार करना विमानन सुरक्षा नियमों से जुड़ा था।
आखिरकार एयरलाइन को यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था करनी पड़ी और बाद में उन्हें दूसरी उड़ान से कोलकाता भेजा गया। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया कि खराब मौसम और लंबी देरी की स्थिति में एयरलाइंस के पास पर्याप्त स्टैंडबाय क्रू की व्यवस्था कितनी जरूरी है।
Next Story





