बांदा। बबेरू कोतवाली क्षेत्र के तराया गांव में बुधवार रात एक दर्दनाक हादसे में घर में सो रहे परिवार के चार सदस्य मलबे में दब गए। पड़ोसी की कच्ची मिट्टी की दीवार अचानक गिरने से राजेश सिंह के मकान की पक्की दीवार भी उसकी चपेट में आ गई। हादसे में 40 वर्षीय राजेश सिंह और उनकी छह माह की बेटी रश्मि की इलाज के दौरान मौत हो गई। राजेश की पत्नी सावित्री देवी और उनकी तीन वर्षीय बेटी लक्ष्मी घायल हैं और जिला अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।
घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। हादसे की जानकारी मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और मलबे में दबे परिवार के सदस्यों को बाहर निकालने में जुट गए। ग्रामीणों की तत्परता से सभी को बाहर निकालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बबेरू ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद चारों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया था।
आधी रात को भरभराकर गिरी दीवार
जानकारी के मुताबिक, घटना बुधवार रात करीब दो बजे की है। तराया गांव में राजेश सिंह अपने परिवार के साथ घर में सो रहे थे। इसी दौरान पड़ोसी रामदास की कच्ची मिट्टी की दीवार अचानक गिर गई।
बताया जा रहा है कि कच्ची दीवार का दबाव राजेश सिंह के घर की करीब नौ इंच मोटी पक्की दीवार पर पड़ा। इसके बाद वह दीवार भी क्षतिग्रस्त होकर परिवार के ऊपर जा गिरी। रात के सन्नाटे में दीवार गिरने की तेज आवाज से आसपास के लोग जाग गए।
हादसे के बाद परिवार के सदस्यों के मलबे में दबे होने की जानकारी मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। अंधेरे के बावजूद लोगों ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया।
ग्रामीणों ने मलबे से निकाला
ग्रामीणों ने काफी प्रयास के बाद मलबे में दबे राजेश सिंह, उनकी पत्नी सावित्री देवी और दोनों बेटियों को बाहर निकाला। इसके बाद सभी घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बबेरू ले जाया गया।
परिवार की हालत गंभीर देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन और ग्रामीण घायलों को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां उनका उपचार शुरू किया गया।
हालांकि, इलाज के दौरान राजेश सिंह और उनकी छह माह की बेटी रश्मि की हालत बिगड़ गई। चिकित्सकों के प्रयास के बावजूद दोनों को बचाया नहीं जा सका।
पिता-पुत्री की मौत से परिवार में मातम
एक ही हादसे में पिता और मासूम बेटी की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। छह माह की रश्मि अभी ठीक से दुनिया को समझ भी नहीं पाई थी कि हादसे ने उसकी जान ले ली।
राजेश सिंह की मौत से परिवार ने अपना एक महत्वपूर्ण सदस्य खो दिया। हादसे के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी शोक का माहौल है और बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार के साथ खड़े हैं।
मां और तीन वर्षीय बेटी का इलाज जारी
हादसे में राजेश सिंह की 35 वर्षीय पत्नी सावित्री देवी और उनकी तीन वर्षीय बेटी लक्ष्मी भी घायल हुई हैं। दोनों का जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है।
परिजनों के मुताबिक, दोनों को भी मलबे में दबने के कारण चोटें आई हैं। चिकित्सक उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। हादसे में परिवार के दो सदस्यों की मौत के बाद अब सभी की चिंता घायल मां और मासूम बेटी के स्वास्थ्य को लेकर है।
रात में बचाव कार्य बना चुनौती
घटना देर रात करीब दो बजे हुई, जब अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। अचानक दीवार गिरने से परिवार को संभलने तक का मौका नहीं मिला। ग्रामीणों ने आवाज सुनकर मौके पर पहुंचकर बचाव शुरू किया।
रात के समय अंधेरे में मलबा हटाना आसान नहीं था। इसके बावजूद ग्रामीणों ने अपने स्तर पर प्रयास जारी रखा और परिवार के सदस्यों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। स्थानीय लोगों की तत्परता से घायलों को समय पर उपचार के लिए भेजा जा सका।
कच्चे मकानों की सुरक्षा पर फिर सवाल
तराया गांव की इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में कच्चे मकानों और जर्जर दीवारों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश के मौसम में मिट्टी की दीवारों के कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में पुराने और कच्चे मकानों की समय-समय पर जांच और आवश्यक मरम्मत बेहद जरूरी हो जाती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार आज भी कच्चे मकानों या कच्ची दीवारों के आसपास रहने को मजबूर हैं। लगातार बारिश या नमी के कारण मिट्टी की दीवारों की मजबूती कम हो सकती है और उनके गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
प्रशासन से मदद की उम्मीद
हादसे के बाद पीड़ित परिवार के सामने आर्थिक और सामाजिक संकट भी खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से परिवार की मदद करने की मांग की है। मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता और घायलों के बेहतर इलाज की व्यवस्था किए जाने की मांग उठ सकती है।
प्रशासन की ओर से घटना की जानकारी जुटाई जा रही है। हादसे के कारणों और मकान की स्थिति का भी आकलन किया जा सकता है।
एक हादसे ने उजाड़ दिया परिवार
तराया गांव में हुई यह घटना परिवार के लिए कभी न भूल पाने वाला दुख बन गई है। रात में घर में चैन की नींद सो रहा परिवार अचानक मलबे के नीचे दब गया। ग्रामीणों ने तत्काल मदद कर सभी को बाहर निकाला, लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद भी राजेश सिंह और उनकी छह माह की बेटी रश्मि की जान नहीं बच सकी।
अब परिवार में सावित्री देवी और उनकी तीन वर्षीय बेटी लक्ष्मी का इलाज चल रहा है। गांव के लोग दोनों के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। वहीं, इस घटना ने बारिश के मौसम में कच्ची और कमजोर दीवारों के खतरे को एक बार फिर सामने ला दिया है। प्रशासन के सामने अब ऐसे घरों की सुरक्षा का जायजा लेने और संभावित हादसों को रोकने की चुनौती भी है।