पटना। राजधानी पटना से सटे बिहटा प्रखंड के कंचनपुर गांव में श्राद्धकर्म का भोज खाने के बाद करीब 50 लोगों की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है। सोमवार रात गांव में आयोजित भोज में शामिल लोगों को मंगलवार को अचानक उल्टी-दस्त और पेट से जुड़ी अन्य परेशानियां होने लगीं। एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने से गांव में अफरा-तफरी मच गई। प्रभावित लोगों को बिहटा के रेफरल अस्पताल के साथ आसपास के निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें करीब आधा दर्जन लोगों की हालत चिंताजनक बताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, कंचनपुर गांव में सोमवार रात एक परिवार की ओर से श्राद्धकर्म का आयोजन किया गया था। इसमें गांव और आसपास के बड़ी संख्या में लोगों को भोज के लिए बुलाया गया था। लोगों ने रात में भोजन किया और अपने-अपने घर चले गए। उस समय अधिकांश लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं हुई, लेकिन अगले दिन मंगलवार को कई लोगों की तबीयत अचानक खराब होने लगी।
शुरुआत में कुछ लोगों को पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत हुई। इसके बाद एक के बाद एक कई परिवारों से इसी तरह के मामले सामने आने लगे। देखते ही देखते बीमार लोगों की संख्या बढ़कर करीब 50 तक पहुंच गई। एक साथ इतने लोगों में समान लक्षण दिखाई देने के बाद भोज में परोसे गए भोजन को लेकर आशंका जताई जाने लगी।
परिजनों ने बीमार लोगों को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाना शुरू किया। कई मरीजों को बिहटा रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि कुछ लोगों को बेहतर उपचार के लिए निजी अस्पतालों में ले जाया गया। मरीजों में बच्चे, महिलाएं और पुरुष भी शामिल बताए जा रहे हैं। चिकित्सकों की निगरानी में सभी का इलाज किया जा रहा है।
करीब आधा दर्जन मरीजों की हालत चिंताजनक बताई गई है। गंभीर रूप से प्रभावित लोगों पर डॉक्टर विशेष निगरानी रख रहे हैं। उल्टी और दस्त की वजह से शरीर में पानी की कमी होने का खतरा रहता है, इसलिए मरीजों को जरूरत के अनुसार दवाएं और तरल पदार्थ दिए जा रहे हैं। हालांकि सभी मरीजों की स्थिति को लेकर विस्तृत आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन सामने आना बाकी है।
घटना के बाद गांव में चिंता का माहौल है। जिन घरों के सदस्य भोज में शामिल हुए थे, वे अपने परिजनों की सेहत को लेकर सतर्क हैं। कई लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने भोज में खाना खाया था, लेकिन फिलहाल उनमें किसी तरह के लक्षण सामने नहीं आए हैं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी महसूस होने पर लोगों को तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेने की सलाह दी जा रही है।
एक साथ इतने लोगों के बीमार पड़ने के कारण प्रथम दृष्टया भोजन से जुड़ी समस्या की आशंका जताई जा रही है। हालांकि इसे निश्चित रूप से फूड पॉइजनिंग कहना जांच और चिकित्सकीय पुष्टि के बाद ही उचित होगा। यह पता लगाया जाना जरूरी है कि भोज में कौन-कौन से व्यंजन परोसे गए थे और उनमें से किसी खाद्य सामग्री के दूषित होने की आशंका है या नहीं।
आमतौर पर दूषित भोजन या पानी के सेवन के बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द, कमजोरी और बुखार जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। अलग-अलग संक्रमणों में लक्षण शुरू होने का समय भी अलग हो सकता है। ऐसे मामलों में सबसे बड़ी चिंता शरीर में पानी और जरूरी लवणों की कमी की होती है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में स्थिति तेजी से गंभीर हो सकती है।
कंचनपुर गांव की इस घटना में भी स्वास्थ्य विभाग की जांच महत्वपूर्ण होगी। भोज में इस्तेमाल किए गए पानी, खाद्य सामग्री या बचे हुए भोजन के नमूने उपलब्ध होने की स्थिति में उनकी जांच से बीमारी के कारण का पता लगाने में मदद मिल सकती है। मरीजों में दिखाई दे रहे लक्षणों और मेडिकल जांच के आधार पर डॉक्टर भी कारण का आकलन कर सकते हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक सोमवार रात तक सबकुछ सामान्य था। मंगलवार को जब कई लोगों को एक जैसी शिकायतें होने लगीं तो घटना की गंभीरता सामने आई। इसके बाद बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने का सिलसिला शुरू हुआ। गांव के कई परिवार प्रभावित होने के कारण स्थानीय स्तर पर भी लोग एक-दूसरे की मदद में जुटे रहे।
सामूहिक भोज के बाद बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने की घटनाओं में समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। लगातार उल्टी-दस्त होने की स्थिति में मरीज को पर्याप्त तरल पदार्थ और चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत पड़ सकती है। गंभीर लक्षण दिखाई देने पर अस्पताल में भर्ती कराना जरूरी हो सकता है।
फिलहाल प्रभावित लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। करीब 50 लोगों के बीमार होने और आधा दर्जन की हालत चिंताजनक बताए जाने के कारण स्वास्थ्य विभाग की निगरानी भी महत्वपूर्ण हो गई है। जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि लोगों की तबीयत बिगड़ने की असली वजह क्या थी और भोज में परोसे गए किसी विशेष खाद्य पदार्थ या पानी से इसका संबंध था या नहीं।