पीलीभीत। मैलानी से पीलीभीत जा रही पैसेंजर ट्रेन सोमवार दोपहर बड़े हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गई। सडई रेलवे हाल्ट से आगे माला जंगल क्षेत्र में ट्रेन के सामने अचानक एक विशाल पेड़ टूटकर रेलवे ट्रैक पर गिर गया। घने जंगल के बीच अचानक सामने आए खतरे को देखकर लोको पायलट ने तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाए और ट्रेन को पेड़ से कुछ मीटर पहले ही रोक लिया। समय रहते ट्रेन रुक जाने से बड़ा हादसा टल गया।
घटना के समय ट्रेन में बड़ी संख्या में यात्री सवार थे। अचानक ब्रेक लगने से यात्रियों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। ट्रेन के रुकने की वजह पता चलने पर यात्रियों ने राहत की सांस ली। यदि ट्रेन समय रहते नहीं रुकती तो इंजन की ट्रैक पर पड़े विशाल पेड़ से सीधी टक्कर हो सकती थी।
तेज आवाज के साथ ट्रैक पर गिरा पेड़
घटना सोमवार दोपहर उस समय हुई जब पैसेंजर ट्रेन माला के घने जंगल से गुजर रही थी। सडई रेलवे हाल्ट पार करने के बाद ट्रेन आगे बढ़ रही थी। इसी दौरान अचानक तेज आवाज के साथ एक बड़ा पेड़ टूटकर सीधे रेलवे ट्रैक पर गिर गया।
पेड़ गिरने और ट्रेन के वहां पहुंचने के बीच समय बेहद कम था। लोको पायलट की नजर समय रहते ट्रैक पर पड़े पेड़ पर पड़ गई। उन्होंने बिना देर किए ट्रेन को रोकने के लिए इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए।
तेज गति से चल रही ट्रेन कुछ दूरी तय करने के बाद रुक गई। बताया जा रहा है कि इंजन और पेड़ के बीच केवल कुछ मीटर की दूरी बची थी।
लोको पायलट की सतर्कता से बची यात्रियों की जान
पूरे घटनाक्रम में लोको पायलट की सतर्कता अहम साबित हुई। जंगल के बीच रेलवे ट्रैक पर अचानक पेड़ गिरने जैसी स्थिति में प्रतिक्रिया के लिए बेहद कम समय मिलता है। समय रहते खतरे को पहचानकर ब्रेक लगाने से ट्रेन पेड़ से टकराने से बच गई।
यदि लोको पायलट को पेड़ कुछ देर से दिखाई देता तो दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती थी। इंजन की विशाल पेड़ से टक्कर होने पर ट्रेन के डिब्बों और यात्रियों को नुकसान पहुंचने का खतरा था।
घटना के बाद ट्रेन में सवार यात्रियों के बीच भी लोको पायलट की सूझबूझ की चर्चा रही।
अचानक ब्रेक लगते ही यात्रियों में हड़कंप
ट्रेन में बैठे यात्रियों को शुरुआत में घटना की जानकारी नहीं थी। अचानक इमरजेंसी ब्रेक लगने और ट्रेन के जंगल के बीच रुक जाने से यात्री घबरा गए।
लोग एक-दूसरे से ट्रेन रुकने का कारण पूछने लगे। बाद में पता चला कि आगे रेलवे ट्रैक पर पेड़ गिरा हुआ है और संभावित दुर्घटना से बचने के लिए ट्रेन रोकी गई है।
स्थिति की जानकारी मिलने के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली। हालांकि ट्रैक बाधित होने से उनकी यात्रा कुछ समय के लिए प्रभावित हुई।
माला का घना जंगल बना चुनौती
जिस स्थान पर घटना हुई, वह माला का घना जंगल क्षेत्र है। रेलवे लाइन के दोनों तरफ बड़ी संख्या में पेड़ मौजूद हैं। मौसम में बदलाव, तेज हवा, बारिश या पेड़ों की कमजोर स्थिति के कारण उनके गिरने का खतरा बना रह सकता है।
रेलवे ट्रैक के बिल्कुल पास मौजूद कमजोर या सूखे पेड़ रेल यातायात के लिए खतरा बन सकते हैं। विशेष रूप से मानसून के दौरान मिट्टी में नमी बढ़ने और तेज हवा चलने पर पेड़ों के गिरने की आशंका बढ़ जाती है।
इस घटना ने रेलवे लाइन के आसपास मौजूद पेड़ों की नियमित निगरानी की जरूरत भी सामने रखी है।
ट्रैक बाधित होने से परिचालन प्रभावित
पेड़ सीधे रेलवे ट्रैक पर गिरने के कारण ट्रेन को आगे बढ़ाना संभव नहीं था। ऐसे में ट्रैक से पेड़ हटाने और रेलवे लाइन को सुरक्षित घोषित करने के बाद ही परिचालन सामान्य किया जा सकता था।
रेलवे ट्रैक पर किसी भारी वस्तु या पेड़ के गिरने की स्थिति में केवल उसे हटाना ही पर्याप्त नहीं होता। यह भी जांचना जरूरी होता है कि गिरने के दौरान पटरियों, सिग्नल या आसपास के रेलवे उपकरणों को कोई नुकसान तो नहीं पहुंचा।
रेलवे कर्मियों द्वारा आवश्यक जांच के बाद ही ट्रेन को आगे बढ़ाने की अनुमति दी जाती है।
कुछ मीटर का फासला बना जिंदगी और हादसे के बीच दूरी
इस घटना में सबसे महत्वपूर्ण बात ट्रेन और गिरे हुए पेड़ के बीच बची दूरी रही। लोको पायलट ने जिस समय ब्रेक लगाए, उस समय ट्रेन पेड़ के काफी करीब पहुंच चुकी थी। इसके बावजूद ट्रेन टक्कर से पहले रुक गई।
कुछ मीटर की यही दूरी संभावित दुर्घटना और सुरक्षित बचाव के बीच अंतर बन गई। घटना में किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है।
यात्रियों के लिए यह सफर कुछ समय के लिए डरावना जरूर बन गया, लेकिन समय रहते खतरा टल जाने से बड़ी राहत मिली।
रेलवे ट्रैक के आसपास पेड़ों की निगरानी जरूरी
घटना के बाद माला जंगल क्षेत्र में रेलवे ट्रैक के किनारे मौजूद पेड़ों की स्थिति पर भी ध्यान देने की जरूरत है। ऐसे पेड़ जो कमजोर हो चुके हैं या ट्रैक की दिशा में ज्यादा झुके हुए हैं, वे भविष्य में खतरा बन सकते हैं।
मानसून और तेज हवा के दौरान रेलवे के लिए ऐसे हिस्सों की निगरानी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। कमजोर पेड़ों की समय रहते पहचान कर नियमानुसार सुरक्षित उपाय किए जाएं तो ऐसी घटनाओं का जोखिम कम किया जा सकता है।
सूझबूझ से टल गई बड़ी अनहोनी
मैलानी-पीलीभीत पैसेंजर ट्रेन के साथ सोमवार को हुआ घटनाक्रम कुछ ही सेकंड में बड़ी दुर्घटना का रूप ले सकता था। घने जंगल के बीच अचानक रेलवे ट्रैक पर विशाल पेड़ गिरा और ट्रेन तेजी से उसी दिशा में आगे बढ़ रही थी।
लोको पायलट ने खतरा देखते ही इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को कुछ मीटर पहले रोक दिया। इस सतर्कता से ट्रेन में सवार यात्रियों की यात्रा सुरक्षित रही और संभावित बड़ा हादसा टल गया।
घटना ने एक बार फिर साबित किया कि रेल संचालन में लोको पायलट की सतर्कता और त्वरित निर्णय कितना महत्वपूर्ण होता है। साथ ही जंगल से गुजरने वाले रेलवे मार्गों पर ट्रैक और आसपास के पेड़ों की नियमित निगरानी की आवश्यकता भी सामने आई है।