गोपालगंज। कभी धान और गेहूं की पारंपरिक खेती से अपेक्षित आमदनी हासिल करने के लिए जूझने वाले उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे पंचदेवरी प्रखंड के किसानों ने अब खेती का तरीका बदलना शुरू कर दिया है। पारंपरिक फसलों के बजाय नकदी फसलों और खासकर सब्जियों की खेती की ओर बढ़े किसानों की आर्थिक स्थिति में बदलाव आने लगा है। पंचदेवरी प्रखंड के कुइसा खुर्द, मिश्रौली समेत आसपास के कई गांवों में बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती की जा रही है।
किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि खेतों में तैयार सब्जियों को बेचने के लिए उन्हें दूर की मंडियों का रुख नहीं करना पड़ रहा है। सीमावर्ती उत्तर प्रदेश के व्यापारी सीधे गांव और खेतों तक पहुंचकर किसानों से सब्जियां खरीद रहे हैं। इससे किसानों को तैयार उपज का बेहतर बाजार मिल रहा है और परिवहन पर होने वाला खर्च भी बच रहा है। बाजार की आसान उपलब्धता ने किसानों का उत्साह बढ़ाया है और अधिक संख्या में किसान सब्जी उत्पादन की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
पारंपरिक खेती से नहीं मिल रही थी पर्याप्त आमदनी
पंचदेवरी क्षेत्र में लंबे समय से किसान मुख्य रूप से धान और गेहूं की खेती पर निर्भर रहे हैं। इन फसलों में उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद बाजार मूल्य और कुल आमदनी के बीच अपेक्षित अंतर नहीं बन पा रहा था। किसानों को मौसम, सिंचाई, खाद-बीज और मजदूरी की बढ़ती लागत जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।
फसल तैयार होने के बाद भी किसानों को बाजार तक उपज पहुंचाने और उचित कीमत हासिल करने में परेशानी होती थी। कई बार स्थानीय स्तर पर ही उपज बेचनी पड़ती थी। इससे किसानों को उनकी मेहनत के अनुरूप लाभ नहीं मिल पाता था।
ऐसे में किसानों ने धीरे-धीरे खेती के तौर-तरीकों में बदलाव शुरू किया। नकदी फसलों के रूप में सब्जियों की खेती को अपनाया गया। कम अवधि में तैयार होने वाली सब्जियों और बाजार में लगातार मांग को देखते हुए किसानों ने इसे आय का बेहतर विकल्प माना।